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Jaunpur News: हदबंदी की 294 फाइलों पर लापरवाही की धूल, वादकारी कई महीनों से तहसील के काट रहे चक्कर
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मछलीशहर। शासन के निर्देशानुसार गेहूं की फसल कटने के बाद अप्रैल, मई और जून के महीनों में विशेष अभियान चलाकर भूमि की पैमाइश की जाती है। नियमानुसार, हदबंदी के मामलों का समय पर निस्तारण होने के बाद ही किसान अगली खेती के लिए मेड़बंदी कर पाते हैं। पक्की पैमाइश हो जाने से भूमि संबंधी आपसी विवादों से भी हमेशा के लिए निजात मिल जाती है लेकिन मछलीशहर तहसील में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है। यहां राजस्व निरीक्षकों (कानूनगो) की शिथिलता के कारण हदबंदी और पत्थरगड़ी के 294 मामले दफ्तरों में धूल फांक रहे हैं।
राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भूमि संबंधी विवादों के निस्तारण के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 के अंतर्गत उपजिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल किया जाता है। इसके लिए किसान संबंधित भूमि का नक्शा, खसरा और खतौनी के साथ बैंक में निर्धारित शुल्क जमा कर चालान की कॉपी संलग्न करते हैं।
वाद दाखिल होने के बाद एस़डीएम प्रारंभिक पैमाइश का आदेश देते हैं। इसके बाद संबंधित गांव के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को मौके पर पैमाइश कर ''''फील्ड बुक'''' के साथ न्यायालय में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करनी होती है। रिपोर्ट आने पर न्यायालय दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई करता है और अंतिम आदेश देता है। इस पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लग जाता है, वह भी तब जब राजस्व कर्मी अपनी जिम्मेदारी समय पर निभाएं।
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अब जून का महीना बीतने को है और जुलाई में बारिश शुरू हो जाएगी। बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाने के कारण पैमाइश संभव नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में अब किसानों को अपनी धान की फसल कटने (नवंबर-दिसंबर) तक का लंबा इंतजार करना होगा। राजस्व कर्मियों की इस निष्क्रियता के कारण काश्तकारों के समय और पैसे की बर्बादी तो हो ही रही है, साथ ही गांवों में जमीनी विवाद भी जस के तस बने हुए हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
अकेले मई माह में हदबंदी के लगभग 94 नए मुकदमे दाखिल हुए हैं
इससे पहले जनवरी से अप्रैल तक के लगभग 200 मुकदमे पहले से ही लंबित हैं
इन सभी 294 मामलों की पत्रावलियां (फाइलें) प्रारंभिक पैमाइश और रिपोर्ट के लिए संबंधित राजस्व निरीक्षकों के पास अटकी हुई हैं
इसके अतिरिक्त, पत्थरगड़ी की भी कई दर्जन फाइलें राजस्व निरीक्षकों के कार्यालयों में लंबित पड़ी हैं।
विशेष अभियान चलाकर अब तक कुल 170 मामलों का निस्तारण कराया जा चुका है। न्यायालय के आदेश के बाद भी जो पत्रावलियां अभी राजस्व निरीक्षकों के पास लंबित हैं, उन्हें तत्काल निपटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। जितने भी मामले पेंडिंग हैं, उनका जल्द से जल्द निस्तारण कराया जाएगा।- अजय उपाध्याय, उपजिलाधिकारी मछलीशहर
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राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भूमि संबंधी विवादों के निस्तारण के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 के अंतर्गत उपजिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल किया जाता है। इसके लिए किसान संबंधित भूमि का नक्शा, खसरा और खतौनी के साथ बैंक में निर्धारित शुल्क जमा कर चालान की कॉपी संलग्न करते हैं।
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वाद दाखिल होने के बाद एस़डीएम प्रारंभिक पैमाइश का आदेश देते हैं। इसके बाद संबंधित गांव के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को मौके पर पैमाइश कर ''''फील्ड बुक'''' के साथ न्यायालय में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करनी होती है। रिपोर्ट आने पर न्यायालय दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई करता है और अंतिम आदेश देता है। इस पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लग जाता है, वह भी तब जब राजस्व कर्मी अपनी जिम्मेदारी समय पर निभाएं।
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अब जून का महीना बीतने को है और जुलाई में बारिश शुरू हो जाएगी। बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाने के कारण पैमाइश संभव नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में अब किसानों को अपनी धान की फसल कटने (नवंबर-दिसंबर) तक का लंबा इंतजार करना होगा। राजस्व कर्मियों की इस निष्क्रियता के कारण काश्तकारों के समय और पैसे की बर्बादी तो हो ही रही है, साथ ही गांवों में जमीनी विवाद भी जस के तस बने हुए हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
अकेले मई माह में हदबंदी के लगभग 94 नए मुकदमे दाखिल हुए हैं
इससे पहले जनवरी से अप्रैल तक के लगभग 200 मुकदमे पहले से ही लंबित हैं
इन सभी 294 मामलों की पत्रावलियां (फाइलें) प्रारंभिक पैमाइश और रिपोर्ट के लिए संबंधित राजस्व निरीक्षकों के पास अटकी हुई हैं
इसके अतिरिक्त, पत्थरगड़ी की भी कई दर्जन फाइलें राजस्व निरीक्षकों के कार्यालयों में लंबित पड़ी हैं।
विशेष अभियान चलाकर अब तक कुल 170 मामलों का निस्तारण कराया जा चुका है। न्यायालय के आदेश के बाद भी जो पत्रावलियां अभी राजस्व निरीक्षकों के पास लंबित हैं, उन्हें तत्काल निपटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। जितने भी मामले पेंडिंग हैं, उनका जल्द से जल्द निस्तारण कराया जाएगा।- अजय उपाध्याय, उपजिलाधिकारी मछलीशहर