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पितर तर्पण संग मांगा आशीर्वाद
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 18 Sep 2016 12:47 AM IST
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गोमती नदी के हनुमान घाट पर पितराें को तर्पण करते लोग।
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शनिवार से पितृ पक्ष शुरू हो गया। 15 दिन चलने वाले पितृपक्ष के लिए शहर के लोग गोमती नदी के गोपी घाट और हनुमान घाट पर पहुंच कर अपने पितरों को तर्पण कर रहे हैं। लोग अपने पितरों को खुश करने के लिए इन स्थानों पर दान पुण्य भी कर रहे है। ताकि पितरों का आशीर्वाद उनके परिवार पर बना रहे।
गोमती नदी के घाटों पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग तर्पण करने के लिए पहुंचे। पंडित जी ने ने विधि-विधान से तर्पण की प्रक्त्रिस्या संपन्न कराई। इसके अलावा सई नदी, बसुई और बरुणा नदी के घाटों पर भी तर्पण के लिए लोगों की भीड़ रही। लोगों ने विधि के अनुसार तर्पण किया।
मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पूर्वज धरती पर आते हैं। पितृपक्ष में नदी, तालाब व जलस्रोतों में पितरों की शांति के लिए तर्पण किया जाता है। भाद्र पक्ष पूर्णिमा की तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होती है। अश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा रही है।
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जिस तिथि को व्यक्ति की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि में श्राद्ध करना बताया गया है। 17 सितंबर को प्रतिपदा का तर्पण हुआ। 30 को पितृ मोक्ष अमावस्या के साथ ही पितृपक्ष का समापन हो जाएगा। लोगों ने जौ, तिल, कुशा और पवित्र वस्त्र आदि सामग्री के द्वारा पितरों की शांति, ऋषियों व सूर्य को प्रसन्न करने के लिए तर्पण किया।
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गोमती नदी के घाटों पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग तर्पण करने के लिए पहुंचे। पंडित जी ने ने विधि-विधान से तर्पण की प्रक्त्रिस्या संपन्न कराई। इसके अलावा सई नदी, बसुई और बरुणा नदी के घाटों पर भी तर्पण के लिए लोगों की भीड़ रही। लोगों ने विधि के अनुसार तर्पण किया।
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मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पूर्वज धरती पर आते हैं। पितृपक्ष में नदी, तालाब व जलस्रोतों में पितरों की शांति के लिए तर्पण किया जाता है। भाद्र पक्ष पूर्णिमा की तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होती है। अश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा रही है।
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जिस तिथि को व्यक्ति की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि में श्राद्ध करना बताया गया है। 17 सितंबर को प्रतिपदा का तर्पण हुआ। 30 को पितृ मोक्ष अमावस्या के साथ ही पितृपक्ष का समापन हो जाएगा। लोगों ने जौ, तिल, कुशा और पवित्र वस्त्र आदि सामग्री के द्वारा पितरों की शांति, ऋषियों व सूर्य को प्रसन्न करने के लिए तर्पण किया।