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इंग्लैंड की सियासत के बाद भी गांव के मिट्टी की खुशबू नहीं भूले आब्दी

Sun, 26 Jun 2022 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 11:33 PM IST
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Even after the politics of England, Abdi did not forget the fragrance of the soil of the village
क्षेत्र के बड़ागांव निवासी नफीस आब्दी के इंग्लैंड के एल्बम्स शहर के डिप्टी मेयर बनने पर गांव में खुशी का माहौल है। यहां उनके चाहने वालों में उनकी सादगी और प्यार की चर्चा शुरू हो गई। उनका परिवार 40 साल पहले भले ही गांव छोड़ दिया, लेकिन उनका गांव से लगाव आज भी बरकरार है।
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एसडीएम रहे गांव निवासी सैयद यूसुफ हसन आब्दी की दो बेटियां और पांच बेटों में सैयद नफीस आब्दी छठवें नंबर पर थे। 31 अक्टूबर 1957 को जन्मे नफीस की प्राथमिक शिक्षा गांव और शाहगंज स्थित सेंट थामस इंटर कॉलेज में हुई। सरकारी नौकरी में होने वाले स्थानांतरण से बच्चों की शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए पिता वर्ष 1975 में लखनऊ में बस गए। उच्च शिक्षा के बाद श्री आब्दी वर्ष 1980 में विदेश मंत्रालय की नौकरी की। इंग्लैंड स्थित विदेश मंत्रालय में ट्रेजरी, नम्बर दस डाउनिंग स्ट्रीट आदि पदों पर तैनात रहे। तीस वर्ष की सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वहीं रहकर सियासत में कदम रखा। वर्ष 1990 में कार्पोरेटर (पार्षद) बने। क्रिकेट के शौकीन आब्दी इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के सदस्य भी हैं। 23 जून को आए चुनाव परिणाम में में वो डिप्टी मेयर बने। गांव में जन्मे और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले सैयद नफीस आब्दी को गांव की मिट्टी की खुशबू उन्हें अपनों से दूर नहीं कर सकी। उनके भांजे सैयद फैजी बताते हैं कि मामा साल में एक बार जब परिवार से मिलने लखनऊ आते हैं तो कुछ दिन के लिए गांव जरूर आते हैं। तीन साल पहले गांव आए थे, जो पुराने मकान की रिपेयरिंग और पेंटिंग कराकर लौटे। फ़िलहाल परिवार का कोई सदस्य गांव में नहीं रहता। रिश्तेदार घर की देख रेख करते हैं। फैजी ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से वह दो साल से स्वदेश नहीं आ सके। पूर्व प्रधान मो. अजहर, हसन मेंहदी, मो. आसिफ़ बताते हैं कि परिवार में वही एक ऐसे हैं जिन्हें गांव से खासा लगाव और यहां के लोगों से प्रेम है। घर रहने पर आम ग्रामीणों की ही वेशभूषा में रहते। गांव आने पर लोगों को घर पर बुलाना और दूसरों के घर पहुंचकर उनकी हालचाल लेना नहीं भूलते।
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