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शाम ढलते ही बढ़ी ठिठुरन
jaunpur
Updated Sat, 14 Jan 2017 01:18 AM IST
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कड़ाके की ठंड में शाल ओढ़कर काम पर जाती महिलाएं।
बर्फीली हवा के आगे शुक्रवार को भी धूप की किरणें बेअसर साबित हुईं। मौसम पूरी तरह साफ रहा और सुबह से ही धूप निकली थी, बर्फ जैसी हवा ने लोगों को दिन में भी कंपाया। शाम ढलते ही ठिठुरन और बढ़ गई। जल्दी लोग घरों में कैद हो गए। बाजारों में सन्नाटा पसर गया।
गुरुवार को जिले का अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। जबकि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस लुढ़क कर 4 डिग्री सेल्सियस रह गया। पिछले सोमवार से ही तापमान में निरंतर गिरावट आई है।
शुक्रवार को भी बर्फीली हवा ने लोगों को पूरे दिन कंपाया। धूप में भी लोग अलाव का सहारा लिया। कार्यालयों में लोग ब्लोवर और हीटर के सहारे काम करते देखे गए। खास तौर से बाइक से चलने वाले लोगों को अधिक परेशानी हुई। ठंड का आसर बाजारों में भी देखा गया।
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उधर, ठंड, अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बहुत अंतर हर उम्र वर्ग के लोगों के लिए जानलेवा होती है। इससे बचाव बेहद जरूरी है। उक्त बातें वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. वीएस उपाध्याय ने कही। उनका कहना है कि ठंड से धमनियां सिकुड़ने लगती हैं जिसके कारण हार्ट अटैक और लकवा की आशंका बढ़ जाती है।
धमनियों का रक्त गाढ़ा हो जाता है। एलर्जी, नजला जुकाम, खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। निमोनिया की भी शिकायत देखने को मिलती है। एलर्जी से बचने के लिए वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
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गुरुवार को जिले का अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। जबकि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस लुढ़क कर 4 डिग्री सेल्सियस रह गया। पिछले सोमवार से ही तापमान में निरंतर गिरावट आई है।
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शुक्रवार को भी बर्फीली हवा ने लोगों को पूरे दिन कंपाया। धूप में भी लोग अलाव का सहारा लिया। कार्यालयों में लोग ब्लोवर और हीटर के सहारे काम करते देखे गए। खास तौर से बाइक से चलने वाले लोगों को अधिक परेशानी हुई। ठंड का आसर बाजारों में भी देखा गया।
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उधर, ठंड, अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बहुत अंतर हर उम्र वर्ग के लोगों के लिए जानलेवा होती है। इससे बचाव बेहद जरूरी है। उक्त बातें वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. वीएस उपाध्याय ने कही। उनका कहना है कि ठंड से धमनियां सिकुड़ने लगती हैं जिसके कारण हार्ट अटैक और लकवा की आशंका बढ़ जाती है।
धमनियों का रक्त गाढ़ा हो जाता है। एलर्जी, नजला जुकाम, खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। निमोनिया की भी शिकायत देखने को मिलती है। एलर्जी से बचने के लिए वैक्सीनेशन कराना चाहिए।