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थम गया चुनावी शोर, अब बूथ संभालने पर जोर
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जौनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए प्रचार का शोर मंगलवार की शाम छह बजे के बाद थम गया। बैनर-पोस्टर, लाउडस्पीकर उतारकर प्रत्याशी अब पैदल राह पकड़ लिए हैं। घर-घर जाकर मतदाताओं से मिलने और उन्हें अपने पक्ष में मनाने का सिलसिला तेज हो गया है। पिछले पंद्रह दिनों से प्रचार-प्रसार में जोर लगाए प्रत्याशियों का पूरा ध्यान अब मतदान दिवस पर बूथ संभालने को लेकर है। घरों से एक-एक वोट निकलवाने और अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए वह तेज तर्रार समर्थकों की टीम को सक्रिय करने में लगे हैं। उधर, अंतिम समय में धनबल-बाहुबल के इस्तेमाल की आशंका के मद्देनजर प्रशासन भी चौकन्ना है। पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।
पहले चरण के तहत 15 अप्रैल को मतदान सुबह सात बजे से शुरू होकर शाम छह बजे तक चलेगा। आयोग के निर्देशानुसार मतदान समाप्ति के 48 घंटे पहले प्रचार रोक लगनी थी। चुनाव प्रचार का अंतिम दिन होने के कारण प्रत्याशियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। पैदल व बाइक रैली निकाली तो जगह-जगह नुक्कड़ सभाओं कर मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश में जुटे रहे। शाम छह बजते ही पुलिस-प्रशासन के साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट ने गांव-गांव घूमकर सभी बैनर-पोस्टर व लाउड स्पीकर उतरवा दिए। प्रत्याशियों को आचार संहिता के पालन की हिदायत भी दी जाती रही। किसी भी तरह से पैसा, शराब, साड़ी, उपहार आदि देकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। गांवों की सुरक्षा समितियों को इस पर निगरानी के लिए अलर्ट किया गया। प्रचार थमने के बाद प्रत्याशी अपने करीबियों के साथ बैठकर ज्यादा से ज्यादा वोट निकलवाने की रुपरेखा बनाते रहे। एक-एक मोहल्ला और घर की जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों को सौंपते रहे। हर कोई इस कोशिश में लगा रहा कि मतदाता उनके खेमे में आ जाएं, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े।
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पहले चरण के तहत 15 अप्रैल को मतदान सुबह सात बजे से शुरू होकर शाम छह बजे तक चलेगा। आयोग के निर्देशानुसार मतदान समाप्ति के 48 घंटे पहले प्रचार रोक लगनी थी। चुनाव प्रचार का अंतिम दिन होने के कारण प्रत्याशियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। पैदल व बाइक रैली निकाली तो जगह-जगह नुक्कड़ सभाओं कर मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश में जुटे रहे। शाम छह बजते ही पुलिस-प्रशासन के साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट ने गांव-गांव घूमकर सभी बैनर-पोस्टर व लाउड स्पीकर उतरवा दिए। प्रत्याशियों को आचार संहिता के पालन की हिदायत भी दी जाती रही। किसी भी तरह से पैसा, शराब, साड़ी, उपहार आदि देकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। गांवों की सुरक्षा समितियों को इस पर निगरानी के लिए अलर्ट किया गया। प्रचार थमने के बाद प्रत्याशी अपने करीबियों के साथ बैठकर ज्यादा से ज्यादा वोट निकलवाने की रुपरेखा बनाते रहे। एक-एक मोहल्ला और घर की जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों को सौंपते रहे। हर कोई इस कोशिश में लगा रहा कि मतदाता उनके खेमे में आ जाएं, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े।
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