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एंबुुलेंस न मिलने पर ठेले से पहुंचाया अस्पताल, नहीं बच पाई जान

Tue, 12 Apr 2022 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2022 12:21 AM IST
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Due to non-availability of ambulance, transported by hand to the hospital, life could not be saved
जौनपुर ः केराकत में ठेलेगाड़ी पर मरीज को ले जाता युवक। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। काम के दौरान बेहोश हुए अधिवक्ता के मुंशी को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने पर ठेले से अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ठेले पर ले जाते समय किसी ने तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। इस मामले में सीएमओ का कहना है कि एंबुलेंस पहुंच गई थी। दस कदम पर ही अस्पताल था। इसी वजह से लोग जल्दी में ठेले पर ही लेकर चले गए थे।
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चंदवक थाना क्षेत्र के सिधौनी गांव निवासी अरुण यादव (55) केराकत अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष छोटेलाल निडर के सहायक थे। वह किराए का मकान लेकर रेलवे स्टेशन रोड पर रहते थे। सोमवार की शाम साढ़े चार बजे वह कामकाज निपटाकर घर जाने की तैयारी में थे। बताया जाता है कि इसी दौरान वह बेहोश होकर गिर पडे़। लोगों ने चेहरे पर पानी का छिड़काव किया। होश में न आने पर अधिवक्ताओं ने एंबुलेंस को फोन किया। आरोप है कि करीब 15-20 मिनट तक इंतजार के बाद जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो अधिवक्ता उन्हें ठेलागाड़ी पर ही लादकर लगभग 700 मीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया।
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उधर ठेलागाड़ी पर अधिवक्ता के मुंशी के लादकर अस्पताल ले जाने की किसी ने तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद प्रजापति ने बताया कि मैं और अन्य कई अधिवक्ता साथियों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया था। लेकिन, एंबुलेंस आने में देर होने पर हमलोग सामने दिखे ठेले से ही लेकर उन्हें अस्पताल ले गए। लेकिन, चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद सरकारी एंबुलेंस के लिए मेरे पास फोन आया था। उस समय करीब आधा घंटा बीत चुका था। मामला सोशल मीडिया में आने पर स्वास्थ्य विभाग ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी है। सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि एंबुलेंस पहुंच गई थी। दस कदम पर ही अस्पताल था। लोग इस कारण जल्दी में ठेले पर ही लेकर चले गए थे। मृतक जिस अधिवक्ता के साथ काम करता था, उन्होंने ने भी यही बयान दिया है। मृतक की तीन बेटियां और दो बेटे हैं। सबसे बड़ी बेटी बीए पास कर चुकी है जबकि सबसे छोटा बेटा 14 साल का है।
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