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कुत्ता काटे या बंदर, एआरवी नहीं अस्पतालों के अंदर

Mon, 28 Sep 2020 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 12:03 AM IST
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Dog bitten or monkey, ARV not inside hospitals
जौनपुर। एंटी रेबिज वैक्सीन (एआरवी) का जिले में टोटा है। किसी भी सीएचसी-पीएचसी पर एआरवी उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में भी एआरवी की कमी बनी हुई है। पूरे जिले के मरीज इंजेक्शन के जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इंजेक्शन लगवाने के लिए सुबह से 6 बजे ही जिला अस्पताल में लंबी कतार लग रहीं है। बाजारों में एआरवी ऊंचे दामों पर मिल रही है। इससे मरीजों को दुश्वारी झेलनी पड़ रही है। मजबूरी से लोग बाजार से कई गुना महंगे दाम पर खरीद कर इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
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पिछले एक माह से जिले के सभी अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण यहां आने वाले मरीजों को बाजार से इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा हैं। बंदर, बेसहारा व पालतू कुत्ते लोगों को काट लेते हैं। इनके काटने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य हो जाता है। जब मरीज स्थानीय सरकारी अस्पताल में पहुंचते हैं तो वहां का स्टॉक खत्म होने की बात कहते हुए जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। एक सप्ताह से जिला अस्पताल में भी एंटी रेबिज वैक्सीन नहीं थी। शुक्रवार को 320 वायल वैक्सीन मिली, जिसे सोमवार से लगाया जाएगा।
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इंजेक्शन लगवाने के लिए लोगों को ज्यादा परेशान न होना पड़े, इसके लिए सभी सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था की गई है। लोग अपने आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या अन्य कोई फोटो पहचान पत्र वाली आईडी दिखाकर निशुल्क इंजेक्शन लगवाते हैं, लेकिन सीएचसी पर एआरवी की सप्लाई ठप है।
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महराजगंज सीएचसी में एक माह से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। यहां रोजाना औसतन 8-10 लोग रोजाना कुत्ता काटने पर पहुंचते हैं। उनको बाजार से इंजेक्शन लाकर लगवाना पड़ता है, जिसकी कीमत 320 से 360 रुपये के बीच है। कुत्ता काटने पर एक व्यक्ति को चार से पांच इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ स्वतंत्र कुमार ने बताया कि एक सितंबर से ही जिले में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है और जल्द ही आने की संभावना है।

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जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबिज इंजेक्शन का टोटा है। उत्तर प्रदेश मेडिसिन कारपोरेशन को पत्र भेज कर 10 हजार वायल की आपूर्ति की मांग की गई है। लोगों को जिला अस्पताल में जाकर इंजेक्शन लगवाने को कहा गया है। -डॉ. राकेश कुमार, सीएमओ जौनपुर
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