{"_id":"657c999c6427ba1435000f58","slug":"danger-of-blight-on-potatoes-farmers-should-be-alert-jaunpur-news-c-193-1-jon1002-9614-2023-12-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaunpur News: आलू पर झुलसा रोग का खतरा, किसान रहे सजग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaunpur News: आलू पर झुलसा रोग का खतरा, किसान रहे सजग
विज्ञापन
जौनपुर। लगातार मौसम में बदलाव व तापमान गिरने से इस समय आलू की फसल में कई तरह के रोग लगने की संभावना है। अगर समय रहते इनका प्रबंधन न किया गया तो आलू की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र अमिहित डॉ. संदीप कुमार ने बताया है कि ऐसे मौसम में आलू की फसल को झुलसा एवं अन्य बीमारियां बहुत अधिक नुकसान पहुंचती हैं। इससे बचाव के लिए किसान सावधानी बरतें और जरूरी दवाओं का छिड़काव करें। बताया कि बीते दिनों हुई बारिश व कोहरे आलू की फसल के लिए नुकसान देय रहा। हालांकि अभी मौसम साफ है कोहरा भी ज्यादा नहीं है। यह मौसम आलू के लिए ठीक है। आने वाले समय में यदि बदली व कोहरा अधिक पड़ेगा तो आलू की फसल में झुलसा व अन्य बीमारियां लगने की अधिक संभावना रहेगी, जिससे बचाव करना बहुत आवश्यक है।
कहा कि आलू की झुलसा बीमारी में रोग के लक्षण सबसे पहले पत्तियों पर धब्बे के रूप में शुरू होता है । यह धब्बा दो से चार दिनों में बहुत तेजी से पूरी फसल पर फैल जाता है जिसके कारण खेत की पूरी फसल झुलस जाती है। इसके अलावा इस बीमारी का असर पौधे के तने से होते हुए जमीन में आलू के कंदों पर भी हो जाता है। परिणाम स्वरूप आलू सड़ने लगते हैं और पूरी फसल बर्बाद होने लगती है। इससे उपज में 40 से 60 प्रतिशत या उससे भी अधिक नुकसान हो जाता है।
विज्ञापन
ऐसे करें बचाव
प्रतिदिन आलू की फसल का निरीक्षण जरूरी है। फसल में नत्रजन यानी यूरिया का प्रयोग अधिक ना करें। घुलनशील सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। लक्षण दिखाई देते ही फफूंदी नाशक कॉपर ऑक्सिक्लोराइड तीन ग्राम प्रति लीटर अथवा मैनकोज़ेब दो ग्राम प्रति लीटर की दर से फसल पर छिड़कें। रोग की उग्र अवस्था में रिडोमिल गोल्ड 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
विज्ञापन
वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र अमिहित डॉ. संदीप कुमार ने बताया है कि ऐसे मौसम में आलू की फसल को झुलसा एवं अन्य बीमारियां बहुत अधिक नुकसान पहुंचती हैं। इससे बचाव के लिए किसान सावधानी बरतें और जरूरी दवाओं का छिड़काव करें। बताया कि बीते दिनों हुई बारिश व कोहरे आलू की फसल के लिए नुकसान देय रहा। हालांकि अभी मौसम साफ है कोहरा भी ज्यादा नहीं है। यह मौसम आलू के लिए ठीक है। आने वाले समय में यदि बदली व कोहरा अधिक पड़ेगा तो आलू की फसल में झुलसा व अन्य बीमारियां लगने की अधिक संभावना रहेगी, जिससे बचाव करना बहुत आवश्यक है।
विज्ञापन
कहा कि आलू की झुलसा बीमारी में रोग के लक्षण सबसे पहले पत्तियों पर धब्बे के रूप में शुरू होता है । यह धब्बा दो से चार दिनों में बहुत तेजी से पूरी फसल पर फैल जाता है जिसके कारण खेत की पूरी फसल झुलस जाती है। इसके अलावा इस बीमारी का असर पौधे के तने से होते हुए जमीन में आलू के कंदों पर भी हो जाता है। परिणाम स्वरूप आलू सड़ने लगते हैं और पूरी फसल बर्बाद होने लगती है। इससे उपज में 40 से 60 प्रतिशत या उससे भी अधिक नुकसान हो जाता है।
विज्ञापन
ऐसे करें बचाव
प्रतिदिन आलू की फसल का निरीक्षण जरूरी है। फसल में नत्रजन यानी यूरिया का प्रयोग अधिक ना करें। घुलनशील सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। लक्षण दिखाई देते ही फफूंदी नाशक कॉपर ऑक्सिक्लोराइड तीन ग्राम प्रति लीटर अथवा मैनकोज़ेब दो ग्राम प्रति लीटर की दर से फसल पर छिड़कें। रोग की उग्र अवस्था में रिडोमिल गोल्ड 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।