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राजकीय आईटीआई से 20.60 लाख बरामद
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Sun, 26 Jul 2015 12:40 AM IST
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जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने शनिवार को राजकीय आईटीआई, सिद्दीकपुर में छापा मारा। छापेमारी में कार्यालय से 20.60 लाख रुपये बरामद हुए।
कालेज प्रशासन का दावा है कि उक्त रुपये प्रायोगिक परीक्षा फीस के हैं जबकि जिला प्रशासन इसे धन उगाही का मामला मानकर जांच शुरू कर दिया है।
एडीएम फाइनेंस रामभजन सोनकर, डिप्टी कलेक्टर नागेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ कोषाधिकारी संजय राय ने पुलिस बल के साथ परिसर के सभी कार्यालयों की तलाशी ली।
जिलाधिकारी को शिकायत मिली थी कि राजकीय आईटीआई कालेज प्रशासन परीक्षा कराने और सेंटर बनाने के नाम पर धनउगाही कर रहा है।
मां शांति पूर्व माध्यमिक विद्यालय, सिद्दीकपुर के प्रबंधक दिनेश कुमार सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि वर्ष 2014 में उनके विद्यालय को आईटीआई परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था।
वर्ष 2015 में रुपये की मांग पूरी नहीं की गई तो उनके विद्यालय को सेंटर नहीं बनाया गया। जबकि दूर के विद्यालयों को केंद्र बना दिया गया। उनके विद्यालय की दूरी आईटीआई कालेज सिद्दीकपुर से महज दो किलोमीटर है।
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उनकी शिकायत पर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने शनिवार को दोपहर करीब एक बजे मय फोर्स और अधिकारियों की टीम के साथ आईटीआई कालेज पहुंच गए। उनके पहुंचते ही कालेज में हड़कंप मच गया।
छात्रों को कालेज से छोड़ दिया गया। प्रशासनिक कार्यालय से सभी कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया। एक-एक कार्यालय की सघन तलाशी ली गई।
कार्यालय से कुल 20.60 लाख रुपये बरामद हुए। रुपयों की गिनती के लिए कोषाधिकारी संजय राय को मय स्टाफ के साथ मौके पर बुलाया गया।
करीब तीन घंटे की कार्यवाही में सभी रुपयों का की गिनती पूरी की गई और उनका मिलान किया गया कि किस मद का पैसा राजकीय आईटीआई कालेज के कार्यालय में डंप किया गया है।
आखिर ये रुपये बैंक में क्यों नहीं जमा किए गए इसके लिए कालेज के प्रधानाचार्य संजय आर्या ने सफाई देते हुए कहा है कि यह सभी पैसा प्रायोगिक परीक्षा फीस के हैं।
कुछ कालेजों के प्रबंधक प्रैक्टिकल परीक्षा होने के पहले ही फीस जमा कर देते हैं। कालेजों का ही पैसा कार्यालय में रखा गया था।
प्रैक्टिकल में बहुत से सामान खरीदने की आवश्यकता होती है इस नाते परीक्षा के समय में कालेज में कैश रखना होता है।
इस संबंध में जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी का कहना है कि राजकीय आईटीआई कालेज सिद्दीकपुर के कार्यालय से रुपये बरामद हुए हैं। इसकी जांच की जा रही है। जांच में कालेज प्रशासन अगर दोषी पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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कालेज प्रशासन का दावा है कि उक्त रुपये प्रायोगिक परीक्षा फीस के हैं जबकि जिला प्रशासन इसे धन उगाही का मामला मानकर जांच शुरू कर दिया है।
एडीएम फाइनेंस रामभजन सोनकर, डिप्टी कलेक्टर नागेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ कोषाधिकारी संजय राय ने पुलिस बल के साथ परिसर के सभी कार्यालयों की तलाशी ली।
जिलाधिकारी को शिकायत मिली थी कि राजकीय आईटीआई कालेज प्रशासन परीक्षा कराने और सेंटर बनाने के नाम पर धनउगाही कर रहा है।
मां शांति पूर्व माध्यमिक विद्यालय, सिद्दीकपुर के प्रबंधक दिनेश कुमार सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि वर्ष 2014 में उनके विद्यालय को आईटीआई परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था।
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वर्ष 2015 में रुपये की मांग पूरी नहीं की गई तो उनके विद्यालय को सेंटर नहीं बनाया गया। जबकि दूर के विद्यालयों को केंद्र बना दिया गया। उनके विद्यालय की दूरी आईटीआई कालेज सिद्दीकपुर से महज दो किलोमीटर है।
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उनकी शिकायत पर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने शनिवार को दोपहर करीब एक बजे मय फोर्स और अधिकारियों की टीम के साथ आईटीआई कालेज पहुंच गए। उनके पहुंचते ही कालेज में हड़कंप मच गया।
छात्रों को कालेज से छोड़ दिया गया। प्रशासनिक कार्यालय से सभी कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया। एक-एक कार्यालय की सघन तलाशी ली गई।
कार्यालय से कुल 20.60 लाख रुपये बरामद हुए। रुपयों की गिनती के लिए कोषाधिकारी संजय राय को मय स्टाफ के साथ मौके पर बुलाया गया।
करीब तीन घंटे की कार्यवाही में सभी रुपयों का की गिनती पूरी की गई और उनका मिलान किया गया कि किस मद का पैसा राजकीय आईटीआई कालेज के कार्यालय में डंप किया गया है।
आखिर ये रुपये बैंक में क्यों नहीं जमा किए गए इसके लिए कालेज के प्रधानाचार्य संजय आर्या ने सफाई देते हुए कहा है कि यह सभी पैसा प्रायोगिक परीक्षा फीस के हैं।
कुछ कालेजों के प्रबंधक प्रैक्टिकल परीक्षा होने के पहले ही फीस जमा कर देते हैं। कालेजों का ही पैसा कार्यालय में रखा गया था।
प्रैक्टिकल में बहुत से सामान खरीदने की आवश्यकता होती है इस नाते परीक्षा के समय में कालेज में कैश रखना होता है।
इस संबंध में जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी का कहना है कि राजकीय आईटीआई कालेज सिद्दीकपुर के कार्यालय से रुपये बरामद हुए हैं। इसकी जांच की जा रही है। जांच में कालेज प्रशासन अगर दोषी पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।