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हत्या में उम्र कैद की सजा
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 08 Oct 2016 01:07 AM IST
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लाइनबाजार थाना क्षेत्र में 19 वर्ष पूर्व नाजायज संबंध और गहने की मांग को लेकर चाकू से लेखपाल की हत्या के मामले में शुक्रवार को एडीजे प्रथम बुधिराम यादव ने एक हत्यारोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
साथ ही अर्थदंड की धनराशि में से 10 हजार रुपये वादी मुकदमा को देने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार लाइनबाजार थाना क्षेत्र के गंगापट्टी निवासी अमरनाथ यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी की मेरे पिता वासुदेव यादव लेखपाल थे। पिता अपने नवनिर्मित मकान गंगा पट्टी में रहते थे।
वहां उनके अवैध संबंध हो गए। 25 अगस्त 1997 को अभियुक्त पचोखर निवासी ओमप्रकाश यादव ने अवैध संबंधों से क्षुब्ध होकर मेरे पिता की चाकू से घोंप कर हत्या कर दी। साथ ही अपनी मां को भी घायल कर दिया। जब मैं मौके पर पहुंचा तो अभियुक्त ने चाकू लहराते हुए मुझे जान से मारने की धमकी दी।
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अभियुक्त ओमप्रकाश की शादी मेरे चाचा की पुत्री से हुई थी। लेकिन मेरे पिता के अवैध संबंधों की गांव में चर्चा होने के कारण चाचा ने अपनी पुत्री को वापस बुलाकर उसकी शादी अन्यत्र कर दी। इससे नाराज होकर अभियुक्त पैसा व जेवरात वापस करने का दबाव बनाने के साथ ही लड़ाई व झगड़ा कर रहा था।
इसी रंजिश को लेकर अभियुक्त ने घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता विजय यादव, बलिराम यादव व लालमणी मिश्र ने कुल सात गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परीसिलन के पश्चात आरोपी ओमप्रकाश यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड की धनराशि में से 10 हजार रुपये वादी मुकदमा को देने का आदेश दिया है।
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साथ ही अर्थदंड की धनराशि में से 10 हजार रुपये वादी मुकदमा को देने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार लाइनबाजार थाना क्षेत्र के गंगापट्टी निवासी अमरनाथ यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी की मेरे पिता वासुदेव यादव लेखपाल थे। पिता अपने नवनिर्मित मकान गंगा पट्टी में रहते थे।
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वहां उनके अवैध संबंध हो गए। 25 अगस्त 1997 को अभियुक्त पचोखर निवासी ओमप्रकाश यादव ने अवैध संबंधों से क्षुब्ध होकर मेरे पिता की चाकू से घोंप कर हत्या कर दी। साथ ही अपनी मां को भी घायल कर दिया। जब मैं मौके पर पहुंचा तो अभियुक्त ने चाकू लहराते हुए मुझे जान से मारने की धमकी दी।
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अभियुक्त ओमप्रकाश की शादी मेरे चाचा की पुत्री से हुई थी। लेकिन मेरे पिता के अवैध संबंधों की गांव में चर्चा होने के कारण चाचा ने अपनी पुत्री को वापस बुलाकर उसकी शादी अन्यत्र कर दी। इससे नाराज होकर अभियुक्त पैसा व जेवरात वापस करने का दबाव बनाने के साथ ही लड़ाई व झगड़ा कर रहा था।
इसी रंजिश को लेकर अभियुक्त ने घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता विजय यादव, बलिराम यादव व लालमणी मिश्र ने कुल सात गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परीसिलन के पश्चात आरोपी ओमप्रकाश यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड की धनराशि में से 10 हजार रुपये वादी मुकदमा को देने का आदेश दिया है।