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दहेज हत्या में पति को आजीवन कारावास
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 26 Jul 2016 01:32 AM IST
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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जलालपुर थाना क्षेत्र के रेहटी गांव में दहेज की मांग को लेकर चार वर्ष पूर्व नवविवाहिता को जलाकर मार डालने वाले पति को सोमवार को दोषी करार देते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज एमपी सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही डेढ़ हजार रुपए अर्थदंड लगाया है।
जबकि संदेह का लाभ देते हुए आरोपी ससुर, सास व मौसिया सास को बरी कर दिया गया। अभियोजन कथानक के अनुसार- जलालपुर थाना क्षेत्र के राजेपुर (त्रिमुहानी) निवासी श्याम मिलन ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अपनी पुत्री गीता की शादी 13 जून 2011 को रेहटी गांव निवासी टिंकू उर्फ मृत्युंजय पुत्र रामसहाय के साथ किया था।
हैसियत के मुताबिक दान दहेज भी दिया था। पुत्री विदा होकर ससुराल गई तो पति टिंकू उर्फ मृत्युंजय, ससुर रामसहाय, सास शांति देवी, मौसिया सास मांती देवी ने दहेज में सोने की अंगूठी व 50 हजार रुपये नगद की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे।
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मांग पूरी नहीं होने पर 12 जून 2012 की रात मेरी पुत्री को जला दिए। उपचार के दौरान 20 जून को जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव ने न्यायालय में कुल नौ गवाह पेश किया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात तथा मृतका के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं डेढ़ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि संदेह का लाभ देते हुए आरोपी ससुर, सास व मौसिया सास को बरी कर दिया गया।
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जबकि संदेह का लाभ देते हुए आरोपी ससुर, सास व मौसिया सास को बरी कर दिया गया। अभियोजन कथानक के अनुसार- जलालपुर थाना क्षेत्र के राजेपुर (त्रिमुहानी) निवासी श्याम मिलन ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अपनी पुत्री गीता की शादी 13 जून 2011 को रेहटी गांव निवासी टिंकू उर्फ मृत्युंजय पुत्र रामसहाय के साथ किया था।
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हैसियत के मुताबिक दान दहेज भी दिया था। पुत्री विदा होकर ससुराल गई तो पति टिंकू उर्फ मृत्युंजय, ससुर रामसहाय, सास शांति देवी, मौसिया सास मांती देवी ने दहेज में सोने की अंगूठी व 50 हजार रुपये नगद की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे।
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मांग पूरी नहीं होने पर 12 जून 2012 की रात मेरी पुत्री को जला दिए। उपचार के दौरान 20 जून को जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव ने न्यायालय में कुल नौ गवाह पेश किया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात तथा मृतका के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं डेढ़ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि संदेह का लाभ देते हुए आरोपी ससुर, सास व मौसिया सास को बरी कर दिया गया।