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घायल कांवरिए को नहीं समय से नहीं मिली चिकित्सा सुविधा
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:21 AM IST
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मछलीशहर। सड़क हादसे में कांवरिए के मौत के बाद उसके साथी कांवरियों ने आरोप लगाया कि यदि समय से उपचार मिल गया होता तो नीरज दुबे की मौत न होती। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कांवर यात्रा के लिए तैयारी ही नहीं की है। रास्ते में चिकित्सा का उचित प्रबंध नहीं और न ही यातायात नियंत्रण का।
बेलासिन गांव से कांवर यात्रा पर गए कन्हैया मिश्र, संदीप दुबे , सन्दीप पाण्डे, सर्वेश, दीपक, कलेक्टर, राज मिश्र आदि ने बताया कि वे सोमवार को घर से प्रयाग जल लेने के लिए निकले थे। त्रयोदशी तिथि को गुरुवार के दिन दियावां नाथ मंदिर में जलाभिषेक करना था। इलाहाबाद से जल लेकर वे लौट रहे थे। कावरियों का जत्था मंगलवार की रात सतहरिया पहुंचा तो पुलिस चौकी पर विश्राम कर सुबह तैयार होकर निकल रहे थे। तभी हादसा हो गया। घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सूचना के आधे घंटे तक नहीं आई तो ऑटोरिक्शा पर लादकर मुंगराबादशाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां कोई डाक्टर नहीं मिले। आधे घंटे बाद पुलिस आई तो अपनी जिप्सी से जिला चिकित्सालय ले गई। जहां कांवरिया नीरज की मौत हो गई। सूचना पर 100 नम्बर पुलिस पहुंची तो घायल को छोड़ हादसे के बाद भाग रहे वाहन का पीछा कर ली। इस प्रकार घायल को समय से इलाज नहीं मिल सका। लापरवाही के कारण ही आक्रोशित होकर कावरिया वाहनों में तोडफ़ोड़ किए। जब मौत की सूचना घरवालों को हुई तो कोहराम मच गया। मां चंद्रावती का रो रोकर बुरा हाल है। मृतक नीरज घर पर रहकर खेती करता था। जबकि उसके तीन भाई मुंबई में रहते हैं। नीरज की दस वर्ष पूर्व शादी हुई थी किंतु एक वर्ष बाद ही पत्नी को त्यागकर भक्तिभाव में लीन हो गया था। वह सभी धार्मिक आयोजनों में बढ़ चढ़कर भाग लेता था। भाई विनय दूबे, धीरज दूबे और पंकज दुबे मुम्बई में रहते हैं। पड़ोस में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रामशृंगार शुक्ला ने बताया कि नीरज दुबे पिछले साल ही कांवर यात्रा का पांच वर्ष पूरा करने के बाद अपनी कांवर यात्रा का उद्यापन कर दिया था। अब उसे नही जाना था किंतु होनी को कौन टाल सकता है। साथियों के कहने पर वह इस बार भी कांवर यात्रा पर निकल गया था।
बेलासिन गांव से कांवर यात्रा पर गए कन्हैया मिश्र, संदीप दुबे , सन्दीप पाण्डे, सर्वेश, दीपक, कलेक्टर, राज मिश्र आदि ने बताया कि वे सोमवार को घर से प्रयाग जल लेने के लिए निकले थे। त्रयोदशी तिथि को गुरुवार के दिन दियावां नाथ मंदिर में जलाभिषेक करना था। इलाहाबाद से जल लेकर वे लौट रहे थे। कावरियों का जत्था मंगलवार की रात सतहरिया पहुंचा तो पुलिस चौकी पर विश्राम कर सुबह तैयार होकर निकल रहे थे। तभी हादसा हो गया। घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सूचना के आधे घंटे तक नहीं आई तो ऑटोरिक्शा पर लादकर मुंगराबादशाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां कोई डाक्टर नहीं मिले। आधे घंटे बाद पुलिस आई तो अपनी जिप्सी से जिला चिकित्सालय ले गई। जहां कांवरिया नीरज की मौत हो गई। सूचना पर 100 नम्बर पुलिस पहुंची तो घायल को छोड़ हादसे के बाद भाग रहे वाहन का पीछा कर ली। इस प्रकार घायल को समय से इलाज नहीं मिल सका। लापरवाही के कारण ही आक्रोशित होकर कावरिया वाहनों में तोडफ़ोड़ किए। जब मौत की सूचना घरवालों को हुई तो कोहराम मच गया। मां चंद्रावती का रो रोकर बुरा हाल है। मृतक नीरज घर पर रहकर खेती करता था। जबकि उसके तीन भाई मुंबई में रहते हैं। नीरज की दस वर्ष पूर्व शादी हुई थी किंतु एक वर्ष बाद ही पत्नी को त्यागकर भक्तिभाव में लीन हो गया था। वह सभी धार्मिक आयोजनों में बढ़ चढ़कर भाग लेता था। भाई विनय दूबे, धीरज दूबे और पंकज दुबे मुम्बई में रहते हैं। पड़ोस में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रामशृंगार शुक्ला ने बताया कि नीरज दुबे पिछले साल ही कांवर यात्रा का पांच वर्ष पूरा करने के बाद अपनी कांवर यात्रा का उद्यापन कर दिया था। अब उसे नही जाना था किंतु होनी को कौन टाल सकता है। साथियों के कहने पर वह इस बार भी कांवर यात्रा पर निकल गया था।
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