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कोरोनाः जौनपुर में 83.5 प्रतिशत की दर से स्वस्थ हो रहे मरीज, केवल 93 लोगों का हो रहा इलाज
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महाराजगंज क्षेत्र के सांवसा गांव में कोरोना का सैंपल लेती चिकित्सकीय टीम
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच जिले में राहत भरी बात यह है कि यहां ठीक होने वाले मरीजों का औसत सूबे से बेहतर है। जिले में प्रवासियों के आगमन के समय तेजी से बीमारी फैलने लगी थी लेकिन अब उस पर नियंत्रण होने लगा है। मृत्यु दर भी सूबे में कम है और रिकवरी रेट भी ठीक है। जिले में रिकवरी दर 83.5 प्रतिशत है जबकि मृत्यु दर 1.3 है। दोनों ही राज्य स्तर के औसत दर से काफी बेहतर है। यही नहीं प्रति दस लाख आबादी पर सूबे में 206 एक्टिव केस हैं जबकि जौनपुर में यह आंकड़ा 93 ही है।
जिले में कोरोना का कहर 23 मार्च से शुरू हुआ था। तबलीगी जमात से लौटे लोगों में संक्रमण पाया गया था। उसके बाद प्रवासियों की आमद के साथ ही संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी। एक वक्त था, जब समूचे पूर्वांचल में जौनपुर कोरोना का हॉटस्पॉट बन चुका था। आए दिन सौ से अधिक मरीज मिल रहे थे। फिलहाल 44 सौ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। 42 लोगों की अब तक कोरोना से मौत हुई है। मगर इसके बीच राहत भरी बात यह है कि स्वस्थ होने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग तो यहां तक दावा कर रहा है कि जिले में कोरोना संक्रमण नियंत्रित होने लगा है। घर-घर सर्वे, अधिक जांच और निगरानी की कड़ी व्यवस्था से संक्रमण को नियंत्रित किया जा सका है। प्रदेश में 10 लाख जनसंख्या पर 738 लोग संक्रमित हुए हैं जबकि जौनपुर में यह संख्या 620 की है। सूबे में 10 लाख जनसंख्या पर 206 एक्टिव केस हैं जबकि यहां यह संख्या 93 है। कोविड मरीजों का रिकवरी रेट प्रदेश में 70 प्रतिशत है और जौनपुर में 83.50 प्रतिशत है। मृत्यु दर सूबे के 1.6 के सापेक्ष 1.3 है।
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जिले में मरीजों के इलाज की व्यवस्था
कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए लगभग 800 बेड की व्यवस्था की गई है। कोविड केयर सेंटर पूविवि में 215 और आश्रम पद्धति विद्यालय मटियारी में 400 बेड का एल-1 अस्पताल, सीएचसी रेहटी में 50 बेड, ट्रामा सेंटर हौज में 26 बेड का एल-2 अस्पताल बनाया गया है। जिला महिला अस्पताल में 100 बेड का एल-2 अस्पताल 25 अगस्त से शुरू हो जाएगा। मरीजों को लाने के लिए 33 एंबुलेंस लगाई गई है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल रूम से मरीजों का रोजाना हाल लिया जाता है। किसी को कठिनाई होने पर निराकरण कराया जाता है। कोविड अस्पतालों में भी अच्छी व्यवस्था है। सीटी स्कैनर, एवीजी मशीन, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। 18 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है।
कम से कम 15 कांटेक्ट ट्रेसिंग जरूरी
कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग की संख्या बढ़ा दी गई। अभी तक एक पॉजिटिव मरीज पर कम से कम नौ लोगों की ट्रेसिंग की जा रही थी, मगर अब इसे 15 कर दिया गया है। डीएम ने सभी एसडीएम को निर्देश दिया है कि कोरोना मरीज मिलने के बाद वह स्वयं 15 कांटेक्ट ट्रेस करें और इसकी सूची स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे उनकी जांच कराई जा सके।
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जिले में कोरोना का कहर 23 मार्च से शुरू हुआ था। तबलीगी जमात से लौटे लोगों में संक्रमण पाया गया था। उसके बाद प्रवासियों की आमद के साथ ही संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी। एक वक्त था, जब समूचे पूर्वांचल में जौनपुर कोरोना का हॉटस्पॉट बन चुका था। आए दिन सौ से अधिक मरीज मिल रहे थे। फिलहाल 44 सौ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। 42 लोगों की अब तक कोरोना से मौत हुई है। मगर इसके बीच राहत भरी बात यह है कि स्वस्थ होने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
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स्वास्थ्य विभाग तो यहां तक दावा कर रहा है कि जिले में कोरोना संक्रमण नियंत्रित होने लगा है। घर-घर सर्वे, अधिक जांच और निगरानी की कड़ी व्यवस्था से संक्रमण को नियंत्रित किया जा सका है। प्रदेश में 10 लाख जनसंख्या पर 738 लोग संक्रमित हुए हैं जबकि जौनपुर में यह संख्या 620 की है। सूबे में 10 लाख जनसंख्या पर 206 एक्टिव केस हैं जबकि यहां यह संख्या 93 है। कोविड मरीजों का रिकवरी रेट प्रदेश में 70 प्रतिशत है और जौनपुर में 83.50 प्रतिशत है। मृत्यु दर सूबे के 1.6 के सापेक्ष 1.3 है।
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जिले में मरीजों के इलाज की व्यवस्था
कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए लगभग 800 बेड की व्यवस्था की गई है। कोविड केयर सेंटर पूविवि में 215 और आश्रम पद्धति विद्यालय मटियारी में 400 बेड का एल-1 अस्पताल, सीएचसी रेहटी में 50 बेड, ट्रामा सेंटर हौज में 26 बेड का एल-2 अस्पताल बनाया गया है। जिला महिला अस्पताल में 100 बेड का एल-2 अस्पताल 25 अगस्त से शुरू हो जाएगा। मरीजों को लाने के लिए 33 एंबुलेंस लगाई गई है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल रूम से मरीजों का रोजाना हाल लिया जाता है। किसी को कठिनाई होने पर निराकरण कराया जाता है। कोविड अस्पतालों में भी अच्छी व्यवस्था है। सीटी स्कैनर, एवीजी मशीन, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। 18 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है।
कम से कम 15 कांटेक्ट ट्रेसिंग जरूरी
कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग की संख्या बढ़ा दी गई। अभी तक एक पॉजिटिव मरीज पर कम से कम नौ लोगों की ट्रेसिंग की जा रही थी, मगर अब इसे 15 कर दिया गया है। डीएम ने सभी एसडीएम को निर्देश दिया है कि कोरोना मरीज मिलने के बाद वह स्वयं 15 कांटेक्ट ट्रेस करें और इसकी सूची स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे उनकी जांच कराई जा सके।