{"_id":"67670ddc89af508b8401c784","slug":"consumption-of-five-tons-of-nutritious-food-in-a-month-yet-13-thousand-children-are-malnourished-jaunpur-news-c-193-1-jon1002-126940-2024-12-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaunpur News: महीने में पांच टन पुष्टाहार की खपत फिर भी 13 हजार बच्चे कुपोषित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaunpur News: महीने में पांच टन पुष्टाहार की खपत फिर भी 13 हजार बच्चे कुपोषित
विज्ञापन
बच्चों को स्वस्थ और खुशहाल बचपन देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए हर माह पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। एक माह में औसत पांच टन पुष्टाहार की खपत होती है। इसके बावजूद भी जिले में 13320 बच्चे कुपोषित हैं।
करीब 55 लाख की आबादी वाले जिले में शून्य से छह वर्ष के तक के बच्चों की संख्या 4.01 लाख के करीब है। इन बच्चों का बचपन स्वस्थ रखने के लिए भोजन के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक आहार देने की योजना है। जिले में संचालित कुल 5321 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण के साथ ही हाट कुक्ड योजना लागू है। जहां से बच्चों संग गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण आहार दिया जाता है। इसके बावजूद भी कुपोषण पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग पा रही है। हालांकि विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जून माह में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 22349 थी। वहीं अक्तूबर में घटकर 13320 पर पहुंच गई, जिसमें से 9029 कुपोषित बच्चों में सुधार आया है।
बच्चों का कुपोषण खत्म करने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों से गंभीर अति कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है। 10 बेड का केंद्र कभी कभार ही भरता है। कभी आठ तो कभी पांच बच्चे ही यहां पहुंचते हैं। शुक्रवार को केंद्र की पड़ताल हुई तो सिर्फ चार बच्चे भर्ती मिले। यहां अक्तूबर में 17 बच्चे, नवंबर में आठ, 19 दिसंबर तक चार बच्चे भर्ती हुए हैं। केंद्र के चिकित्सक डॉ. शशांक ने बताया कि गंभीर कुपोषित बच्चों को 21 दिन और नाॅर्मल को 14 दिन रखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
करीब 55 लाख की आबादी वाले जिले में शून्य से छह वर्ष के तक के बच्चों की संख्या 4.01 लाख के करीब है। इन बच्चों का बचपन स्वस्थ रखने के लिए भोजन के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक आहार देने की योजना है। जिले में संचालित कुल 5321 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण के साथ ही हाट कुक्ड योजना लागू है। जहां से बच्चों संग गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण आहार दिया जाता है। इसके बावजूद भी कुपोषण पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग पा रही है। हालांकि विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जून माह में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 22349 थी। वहीं अक्तूबर में घटकर 13320 पर पहुंच गई, जिसमें से 9029 कुपोषित बच्चों में सुधार आया है।
विज्ञापन
बच्चों का कुपोषण खत्म करने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों से गंभीर अति कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है। 10 बेड का केंद्र कभी कभार ही भरता है। कभी आठ तो कभी पांच बच्चे ही यहां पहुंचते हैं। शुक्रवार को केंद्र की पड़ताल हुई तो सिर्फ चार बच्चे भर्ती मिले। यहां अक्तूबर में 17 बच्चे, नवंबर में आठ, 19 दिसंबर तक चार बच्चे भर्ती हुए हैं। केंद्र के चिकित्सक डॉ. शशांक ने बताया कि गंभीर कुपोषित बच्चों को 21 दिन और नाॅर्मल को 14 दिन रखा जाता है।
विज्ञापन