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गांव में बैठे-बैठे लीजिए लखनऊ के डॉक्टरों से परामर्श
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ई संजीवनी एप के माध्यम से लखनऊ के चिकित्सक से परामर्श ले रहे मरीज।
- फोटो : JAUNPUR
घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से ले रहे सलाह
- ई-संजीवनी ओपीडी एप के जरिए मरीजों को नुस्खा सुझा रहे सूबे भर के डाक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। कोरोना के चलते इंटरनेट का उपयोग गांवों में भी बढ़ा है। आनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ आनलाइन दवाई भी होने लगी है। महराजगंज ब्लाक का मोहकुचा के मरीज अपने गांव से ही लखनऊ, झांसी, बलरामपुर आदि जिलों के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले रहे हैं। ई-संजीवनी ओपीडी एप इस सेवा का आधार है, जिस पर नुस्खा मिल जाता है। मरीज दवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या दुकान से ले सकता है।
कोरोना के कारण लॉक डाउन में लोग घरों में कैद हो गए थे। भय के मारे लोग अस्पतालों तक जाने से कतराते थे और चिकित्सक भी दूर से ही मरीजों को देखते थे। ऐसे में ई-संजीवनी ओपीडी एप लोकप्रिय होता गया। महराजगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत आने वाले मोहकुचा गांव में हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाया गया है, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) डॉ. सौरभ तैनात हैं। वह इस केंद्र पर एप के जरिए मरीजों का संपर्क विभिन्न शहरों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों से कराते हैं। वहां से नुस्खा लेकर उनका इलाज कराते हैं। डॉ. सौरभ ने बताया कि चार माह में तीन सौ से अधिक लोग ई-संजीवनी एप से लाभ पा चुके हैं। सितंबर में 52, अक्तूबर में 105, नवंबर में 78 और दिसंबर में 70 से अधिक लोगों को ई-संजीवनी ओपीडी के एप के जरिए निशुल्क ओपीडी की सेवा ले चुके हैं। अब लोगों का रुझान इसमें बढ़ा है। दूसरे गांवों को लोगों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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ऐसे जुड़ रहे मरीज
मरीज को अपने मोबाइल पर ई-संजीवनी एप डाउनलोड करना होता है। उस पर पंजीकरण कराने के लिए मधुमेह, तापमान, रक्तचाप आदि का विवरण दर्ज करना होता है। पंजीकरण के बाद मरीज को एक घंटे से डेढ़ घंटे में चिकित्सक की उपस्थिति का समय दे दिया जाता है। पंजीकरण के बाद एप पर पेंडिंग और वेटिंग दिखता है। वेटिंग दिखने का मतलब है कि 5 से 10 मिनट में डाक्टर की कॉल आने वाली है। तय समय पर डॉक्टर को दिखाना होता है। उसके नुस्खा लिखकर आ जाता है। स्थानीय चिकित्सक दवा देते समय बताता है कि कब-कब और कैसे-कैसे दवा लेनी है।
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केजीएमयू के डाक्टर से ली सलाह
मोहकुचा कमला बाजार के सुरेश यादव (32) का 12 दिसंबर को रक्तचाप बढ़ गया था और सिरदर्द था। वह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सीएचओ डॉ सौरभ से मिले तो उन्हें ई-संजीवनी जरिए केजीएमयू लखनऊ के डॉक्टर असलम काजमी से संपर्क कराया। डाक्टर ने पांच मिनट उनसे बात की। उसके बाद तीन दिन की रक्तचाप की दवा लिख कर दी। खानपान और व्यायाम के बारे में बताया। पांच दिन बाद दिखाने को कहा गया। वह लगातार संपर्क करके दवा ले रहे हैं। इसी तरह श्याम कुमार (49) को दो महीने से घुटनों में दर्द था। उन्हें 23 दिसंबर को झांसी मेडिकल कॉलेज की डॉ. जूही सरन से परामर्श कराया गया। डाक्टर ने उन्हें ठंड से बचने, योग करने, रोज शाम एक ग्लास दूध पीने की सलाह दी। एक सप्ताह की दवा लिखी।
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बलराम अस्पताल की डाक्टर ने किया इलाज
रामजी यादव (60) को दो दिन से बुखार और बदन दर्द था। सीएचओ ने उनकी लखनऊ के बलरामपुर हॉस्पिटल की डॉ. सविता भट्ट से बात कराई। डॉक्टर ने दो दिन की दवा और खून की जांच कराने की सलाह दी। ऐसे ही मिठाई लाल (53) को केजीएमयू की डॉ. सानिया रऊफ को दिखाया गया। उनका कफ सूख गया था। डॉक्टर ने कुछ दवाएं लिखीं, भाप लेने और गर्म पानी का गरारा करने को कहा। मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दवा मिल गई और जो दवा नहीं मिली उसे बाहर से खरीदना पड़ा।
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ई-संजीवनी एप पर ओपीडी सेवाएं शुरू होने से ग्रामवासी नजदीकी उपकेंद्र पर जाकर या घर बैठे ही स्वास्थ्य संबंधी परामर्श ले रहे हैं। इस योजना से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी आई है। आसानी से चिकित्सा सुविधाएं भी मिल रही हैं। इसका प्रसार किया जा रहा है। -डॉ राकेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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- ई-संजीवनी ओपीडी एप के जरिए मरीजों को नुस्खा सुझा रहे सूबे भर के डाक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। कोरोना के चलते इंटरनेट का उपयोग गांवों में भी बढ़ा है। आनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ आनलाइन दवाई भी होने लगी है। महराजगंज ब्लाक का मोहकुचा के मरीज अपने गांव से ही लखनऊ, झांसी, बलरामपुर आदि जिलों के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले रहे हैं। ई-संजीवनी ओपीडी एप इस सेवा का आधार है, जिस पर नुस्खा मिल जाता है। मरीज दवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या दुकान से ले सकता है।
कोरोना के कारण लॉक डाउन में लोग घरों में कैद हो गए थे। भय के मारे लोग अस्पतालों तक जाने से कतराते थे और चिकित्सक भी दूर से ही मरीजों को देखते थे। ऐसे में ई-संजीवनी ओपीडी एप लोकप्रिय होता गया। महराजगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत आने वाले मोहकुचा गांव में हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाया गया है, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) डॉ. सौरभ तैनात हैं। वह इस केंद्र पर एप के जरिए मरीजों का संपर्क विभिन्न शहरों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों से कराते हैं। वहां से नुस्खा लेकर उनका इलाज कराते हैं। डॉ. सौरभ ने बताया कि चार माह में तीन सौ से अधिक लोग ई-संजीवनी एप से लाभ पा चुके हैं। सितंबर में 52, अक्तूबर में 105, नवंबर में 78 और दिसंबर में 70 से अधिक लोगों को ई-संजीवनी ओपीडी के एप के जरिए निशुल्क ओपीडी की सेवा ले चुके हैं। अब लोगों का रुझान इसमें बढ़ा है। दूसरे गांवों को लोगों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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ऐसे जुड़ रहे मरीज
मरीज को अपने मोबाइल पर ई-संजीवनी एप डाउनलोड करना होता है। उस पर पंजीकरण कराने के लिए मधुमेह, तापमान, रक्तचाप आदि का विवरण दर्ज करना होता है। पंजीकरण के बाद मरीज को एक घंटे से डेढ़ घंटे में चिकित्सक की उपस्थिति का समय दे दिया जाता है। पंजीकरण के बाद एप पर पेंडिंग और वेटिंग दिखता है। वेटिंग दिखने का मतलब है कि 5 से 10 मिनट में डाक्टर की कॉल आने वाली है। तय समय पर डॉक्टर को दिखाना होता है। उसके नुस्खा लिखकर आ जाता है। स्थानीय चिकित्सक दवा देते समय बताता है कि कब-कब और कैसे-कैसे दवा लेनी है।
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केजीएमयू के डाक्टर से ली सलाह
मोहकुचा कमला बाजार के सुरेश यादव (32) का 12 दिसंबर को रक्तचाप बढ़ गया था और सिरदर्द था। वह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सीएचओ डॉ सौरभ से मिले तो उन्हें ई-संजीवनी जरिए केजीएमयू लखनऊ के डॉक्टर असलम काजमी से संपर्क कराया। डाक्टर ने पांच मिनट उनसे बात की। उसके बाद तीन दिन की रक्तचाप की दवा लिख कर दी। खानपान और व्यायाम के बारे में बताया। पांच दिन बाद दिखाने को कहा गया। वह लगातार संपर्क करके दवा ले रहे हैं। इसी तरह श्याम कुमार (49) को दो महीने से घुटनों में दर्द था। उन्हें 23 दिसंबर को झांसी मेडिकल कॉलेज की डॉ. जूही सरन से परामर्श कराया गया। डाक्टर ने उन्हें ठंड से बचने, योग करने, रोज शाम एक ग्लास दूध पीने की सलाह दी। एक सप्ताह की दवा लिखी।
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बलराम अस्पताल की डाक्टर ने किया इलाज
रामजी यादव (60) को दो दिन से बुखार और बदन दर्द था। सीएचओ ने उनकी लखनऊ के बलरामपुर हॉस्पिटल की डॉ. सविता भट्ट से बात कराई। डॉक्टर ने दो दिन की दवा और खून की जांच कराने की सलाह दी। ऐसे ही मिठाई लाल (53) को केजीएमयू की डॉ. सानिया रऊफ को दिखाया गया। उनका कफ सूख गया था। डॉक्टर ने कुछ दवाएं लिखीं, भाप लेने और गर्म पानी का गरारा करने को कहा। मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दवा मिल गई और जो दवा नहीं मिली उसे बाहर से खरीदना पड़ा।
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ई-संजीवनी एप पर ओपीडी सेवाएं शुरू होने से ग्रामवासी नजदीकी उपकेंद्र पर जाकर या घर बैठे ही स्वास्थ्य संबंधी परामर्श ले रहे हैं। इस योजना से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी आई है। आसानी से चिकित्सा सुविधाएं भी मिल रही हैं। इसका प्रसार किया जा रहा है। -डॉ राकेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी