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Jaunpur News: बाल संगत में बच्चों का होता है सार्वभौमिक विकास
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मड़ियाहूं पड़ाव स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में प्रस्तुति देते बाल कलाकार। आयोजक
जौनपुर। मड़ियाहूं पड़ाव स्थित संत निरंकारी भवन में शुक्रवार को जोन स्तरीय निरंकारी बाल समागम का आयोजन हुआ। बच्चों को बाल संगत से जोड़ने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बाल संगत में आने से बच्चों का सार्वभौमिक व आध्यात्मिक विकास होता है।
केंद्रीय ज्ञान प्रचारक संत जीएस तिवारी ने कहा कि बाल संगत के साथ प्यार, नम्रता व सहनशीलता जैसे दैवीय गुण ग्रहण करते हैं।
यही गुण उनके अपने कैरियर और मिशन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। बच्चे मन के सच्चे होते हैं, उनमें बैर, इर्ष्या, द्वेष आदि बुराइयां नहीं होती। आज के बच्चे आने वाले अच्छे समाज की नींव के पत्थर हैं जो आगे चलकर सुदृढ़ तथा उंच-नीच की भावना से उठकर स्वच्छ समाज का निर्माण करने में सक्षम होंगे।
उन्होंने कहा की निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज बच्चों और युवाओं को श्रेष्ठ संस्कार दे रही हैं। ताकि आने वाली पीढ़ी न केवल अपने परिवार का बल्कि अपने देश का भी नाम रोशन करें। युवा , बच्चे ,सद्गुरु से ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर आध्यात्म को अपनाएं। बच्चे और युवा अपने माता-पिता तथा बड़ों का चरण स्पर्श कर सम्मान किया करें। घर परिवार में प्रेम हो, सत्कार हो, यही व्यावहारिक सीख निरंकारी मिशन दे रहा है। जब बच्चे सत्संग में आते हैं तो रहने का तरीका बदल जाता है।
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मानसिक, शारीरिक, नैतिक गुणों के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना के विकास पर भी निरंतर बल देता आ रहा है।बच्चों और युवाओं ने गीत ,भजन, कविताएं और लघु नाटक के साथ प्रेरक विचार व्यक्त किए। जोन प्रभारी अमरनाथ विश्वकर्मा ने निरंकारी बाल समागम के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त किया। संवाद
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केंद्रीय ज्ञान प्रचारक संत जीएस तिवारी ने कहा कि बाल संगत के साथ प्यार, नम्रता व सहनशीलता जैसे दैवीय गुण ग्रहण करते हैं।
यही गुण उनके अपने कैरियर और मिशन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। बच्चे मन के सच्चे होते हैं, उनमें बैर, इर्ष्या, द्वेष आदि बुराइयां नहीं होती। आज के बच्चे आने वाले अच्छे समाज की नींव के पत्थर हैं जो आगे चलकर सुदृढ़ तथा उंच-नीच की भावना से उठकर स्वच्छ समाज का निर्माण करने में सक्षम होंगे।
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उन्होंने कहा की निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज बच्चों और युवाओं को श्रेष्ठ संस्कार दे रही हैं। ताकि आने वाली पीढ़ी न केवल अपने परिवार का बल्कि अपने देश का भी नाम रोशन करें। युवा , बच्चे ,सद्गुरु से ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर आध्यात्म को अपनाएं। बच्चे और युवा अपने माता-पिता तथा बड़ों का चरण स्पर्श कर सम्मान किया करें। घर परिवार में प्रेम हो, सत्कार हो, यही व्यावहारिक सीख निरंकारी मिशन दे रहा है। जब बच्चे सत्संग में आते हैं तो रहने का तरीका बदल जाता है।
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मानसिक, शारीरिक, नैतिक गुणों के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना के विकास पर भी निरंतर बल देता आ रहा है।बच्चों और युवाओं ने गीत ,भजन, कविताएं और लघु नाटक के साथ प्रेरक विचार व्यक्त किए। जोन प्रभारी अमरनाथ विश्वकर्मा ने निरंकारी बाल समागम के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त किया। संवाद