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अस्पतालों को ही बना दिया कूड़ा डंपिंग जोन
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 21 Mar 2016 01:13 AM IST
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बदलापुर सीएचसी गेट पर डाला गया कचरा।
बायो मेडिकल कचरे को अस्पताल परिसर और आसपास ही डंप किया जा रहा है। स्थिति यह है कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के मुख्य दरवाजे पर ही कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जबकि 24 घंटे के अंदर इसे निस्तारित करने का नियम है। इससे अस्पताल में आने-जाने वाले मरीजों और तीमारदारों में संक्रमण फैलने की आशंका प्रबल हो गई है। प्रतिदिन जिले में 10 टन से अधिक बायो मेडिकल कचरा निकलता है।
वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है लेकिन इसके निस्तारण का टेंडर अभी तक नहीं कराया गया।बीमारियों से निजात के लिए लोग जिला अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी जाते हैं और वहां अन्य बीमारी के शिकार हो जातें हैं। यहां से निकलने वाले बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए 50 लाख रुपये प्रति वर्ष का बजट भी आवंटित है। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र 10 हजार रुपये इस मद में खर्च भी करता है, लेकिन स्थिति बद से बदतर है।
बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ही लिया जाए तो मुख्य गेट पर गंदगी का ढेर लगा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस अस्पताल के मुख्य गेट पर ही कूड़ा जमा किया जाता है। इसके अलावा शाहगंज, मड़ियाहूं, मुंगराबादशाहपुर, मछलीशहर, केराकत आदि अस्पतालों में कहीं परिसर में तो कहीं आसपास ही कूड़े और बायो मेडिकल कचरे का ढेर लगा हुआ है। इन अस्पतालों से होकर जिले के तमाम अफसर गुजरते हैं बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हो रहा है
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बारिश के दिनों में स्थित और भी बदतर हो जाती है। अस्पताल के बाहर जमा कूड़े से उठने वाली बदबू के चलते इधर से गुजरने वाला हर कोई अस्पताल प्रशासन को कोसता है। कमोबेश यही स्थिति सभी पीएचसी और सीएचसी की है। जानकारी के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर मौन हैं । जब कि स्वच्छता मानव जीवन की नैसर्गिक आवश्यकता है । गंदगी के ढेर से मच्छरों का प्रकोप बढ रहा है । कई बीमारियों का सीधा संबंध मच्छरों से है ।
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है लेकिन इसके निस्तारण का टेंडर अभी तक नहीं कराया गया।बीमारियों से निजात के लिए लोग जिला अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी जाते हैं और वहां अन्य बीमारी के शिकार हो जातें हैं। यहां से निकलने वाले बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए 50 लाख रुपये प्रति वर्ष का बजट भी आवंटित है। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र 10 हजार रुपये इस मद में खर्च भी करता है, लेकिन स्थिति बद से बदतर है।
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बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ही लिया जाए तो मुख्य गेट पर गंदगी का ढेर लगा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस अस्पताल के मुख्य गेट पर ही कूड़ा जमा किया जाता है। इसके अलावा शाहगंज, मड़ियाहूं, मुंगराबादशाहपुर, मछलीशहर, केराकत आदि अस्पतालों में कहीं परिसर में तो कहीं आसपास ही कूड़े और बायो मेडिकल कचरे का ढेर लगा हुआ है। इन अस्पतालों से होकर जिले के तमाम अफसर गुजरते हैं बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हो रहा है
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बारिश के दिनों में स्थित और भी बदतर हो जाती है। अस्पताल के बाहर जमा कूड़े से उठने वाली बदबू के चलते इधर से गुजरने वाला हर कोई अस्पताल प्रशासन को कोसता है। कमोबेश यही स्थिति सभी पीएचसी और सीएचसी की है। जानकारी के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर मौन हैं । जब कि स्वच्छता मानव जीवन की नैसर्गिक आवश्यकता है । गंदगी के ढेर से मच्छरों का प्रकोप बढ रहा है । कई बीमारियों का सीधा संबंध मच्छरों से है ।