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1680 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी नहीं बन पाई हैं आत्म निर्भर
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जौनपुर। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से भले ही लाख कवायद की जा रही हो, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण सरकार की यह मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1680 ग्राम पंचायतों में तैनात बैंकिंग करेस्पांडेंट सखी (बीसी) अभी तक काम शुरू नहीं कर पाई है, जबकि उनको तैनात हुए तकरीबन छह माह से अधिक का समय गुजर गया है। काम शुरू न होने से इन बीसी सखियों की आय नहीं हो पा रही है, जिससे वह अभी तक आत्मनिर्भर नहीं बन पाई हैं।
एनआरएलएम के तहत गठित महिला समूह की महिलाएं इनकम कर आत्मनिर्भर बन सके, इसके मद्देनजर सरकार ने गठित समूहों में शामिल महिलाओं को बीसी सखी के रूप में तैनात करने का फरमान जारी किया गया था। इस दौरान हर ग्राम पंचायत में एक-एक महिला को बीसी सखी के रूप में तैनात किया था, जो ग्राम पंचायतों में बैंकिंग संबंधी कार्य शुरू कर अपनी इनकम कर आत्मनिर्भर बनेंगी। जिसके क्रम में जिले के 1740 ग्राम पंचायतों में बीसी सखी के रूप में तैनात किया गया है, जिसमें से अभी तक 1680 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी अपना काम शुरू नहीं कर पाई हैं। इसमें से 1328 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। साथ ही 1082 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी को डिवाइस बांटा गया है, जिसमें से 1143 ग्राम पंचायतों मे तैनात बीसी सखी को सामान खरीद काम शुरू करने के लिए 75 हजार रूपया भी दिया जा चुका है, जिसमें से सिर्फ 760 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी ही सामान खरीद कर कार्य शुरू कर सकी है।
बीसी सखी को छह माह तक मिलेगा मानदेय
जौनपुर। बीसी सखी को बैंकिंग संबंधी कार्य शुरू करने के लिए सरकार की ओर से छह माह तक मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। इस दौरान एक बीसी सखी को प्रति माह चार हजार रुपये की दर से मानदेय मिलेगा। इसके अलावा, उनकेे काम करने के अनुसार कमीशन भी दिया जाएगा, जिससे वह आत्मनिर्भर बन जाएंगी।
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ग्राम पंचायतों में बीसी सखी के रूप में तैनात महिलाओं को कार्य करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनको प्रशिक्षण देने का कार्य भी किया जा रहा है। शीघ्र ही सभी ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखियों को प्रशिक्षित कर काम शुरू कराकर आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जाएगा। - ओपी यादव, उपायुक्त मनरेगा
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एनआरएलएम के तहत गठित महिला समूह की महिलाएं इनकम कर आत्मनिर्भर बन सके, इसके मद्देनजर सरकार ने गठित समूहों में शामिल महिलाओं को बीसी सखी के रूप में तैनात करने का फरमान जारी किया गया था। इस दौरान हर ग्राम पंचायत में एक-एक महिला को बीसी सखी के रूप में तैनात किया था, जो ग्राम पंचायतों में बैंकिंग संबंधी कार्य शुरू कर अपनी इनकम कर आत्मनिर्भर बनेंगी। जिसके क्रम में जिले के 1740 ग्राम पंचायतों में बीसी सखी के रूप में तैनात किया गया है, जिसमें से अभी तक 1680 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी अपना काम शुरू नहीं कर पाई हैं। इसमें से 1328 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। साथ ही 1082 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी को डिवाइस बांटा गया है, जिसमें से 1143 ग्राम पंचायतों मे तैनात बीसी सखी को सामान खरीद काम शुरू करने के लिए 75 हजार रूपया भी दिया जा चुका है, जिसमें से सिर्फ 760 ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखी ही सामान खरीद कर कार्य शुरू कर सकी है।
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बीसी सखी को छह माह तक मिलेगा मानदेय
जौनपुर। बीसी सखी को बैंकिंग संबंधी कार्य शुरू करने के लिए सरकार की ओर से छह माह तक मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। इस दौरान एक बीसी सखी को प्रति माह चार हजार रुपये की दर से मानदेय मिलेगा। इसके अलावा, उनकेे काम करने के अनुसार कमीशन भी दिया जाएगा, जिससे वह आत्मनिर्भर बन जाएंगी।
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ग्राम पंचायतों में बीसी सखी के रूप में तैनात महिलाओं को कार्य करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनको प्रशिक्षण देने का कार्य भी किया जा रहा है। शीघ्र ही सभी ग्राम पंचायतों में तैनात बीसी सखियों को प्रशिक्षित कर काम शुरू कराकर आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जाएगा। - ओपी यादव, उपायुक्त मनरेगा