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Dhananjay Singh: अपहरण मामले में धनंजय सिंह समेत दो को सात-सात साल की सजा, नहीं लड़ पाएंगे लोकसभा चुनाव

Wed, 06 Mar 2024 05:46 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 06 Mar 2024 05:46 PM IST
सार

नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर का अपहरण कराने, पिस्टल सटाकर रंगदारी मांगने के आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह को बुधवार को सजा सुनाई गई है। मैनेजर ने 10 मई 2020 को लाइन बाजार थाने में अपहरण, रंगदारी व अन्य धाराओं में पूर्व सांसद धनंजय सिंह व विक्रम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 

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Bahubali Dhananjay Singh 7 year sentenced for kidnapping and extortion
Dhananjay singh - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल के अपहरण, रंगदारी मांगने, धमकाने और आपराधिक साजिश के मामले में एडीजे चतुर्थ / विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) शरद कुमार त्रिपाठी की अदालत ने बुधवार को पूर्व सांसद धनंजय सिंह और उनके सहयोगी संतोष विक्रम सिंह को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों अभियुक्तों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। पहली बार सजा मिलने के साथ ही यह भी तय हो गया कि धनंजय सिंह अब लोकसभा 2024 और विधानसभा 2027 का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। धनंजय लोकसभा का चुनाव जौनपुर संसदीय सीट से लड़ने की तैयारी कर रहे थे।

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अदालत के आदेश से दोनों अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया। अदालत ने आदेश में कहा कि मामले में यह सिद्ध हुआ है कि अभियुक्तों ने वादी मुकदमा को उसके कार्यक्षेत्र से जबरन अपने घर बुलवाकर पिस्तौल दिखाकर उसे और उसकी कंपनी के लोगों को डराया धमकाया गया। रंगदारी मांगी गई। विधि का नियम है कि अपराधी को अपराध के अनुपात के अनुसार दंडित किया जाए।
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Bahubali Dhananjay Singh 7 year sentenced for kidnapping and extortion
Dhananjay Singh - फोटो : अमर उजाला
कड़ी सुरक्षा के बीच बुधवार की दोपहर धनंजय सिंह और उनके सहयोगी को अदालत लाया गया। कचहरी परिसर और उसके बाहर धनंजय समर्थकों की भीड़ लगी रही। धनंजय जैसे ही पुलिस के वाहन से उतरे, वैसे ही समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस कर्मी बड़ी मुश्किल से दोनों अभियुक्तों को लेकर अदालत में गए। दोनों पक्षों से दलील दी गई, फिर अदालत ने सजा का एलान कर दिया। साथ ही तल्ख टिप्पणी भी की है।

अदालत ने कहा कि मैनेजर और उसकी कंपनी के कर्मचारियों पर दबाव डाला गया कि नमामि गंगे परियोजना में मात्र अभियुक्तों की ही दुकान की गिट्टी और बालू का प्रयोग किया जाए। अन्यथा की स्थिति में वादी और उसकी कंपनी के लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। मगर, मामले को देखने से यह स्पष्ट है कि समर्थ, सक्षम होने के बावजूद अभियुक्तों ने वादी को घटना के समय व उसके पश्चात किसी तरह की कोई भी शारीरिक हानि नहीं पहुंचाई।

अभियुक्त धनंजय सिंह जनप्रतिनिधि रहे हैं। दूसरे अभियुक्त संतोष विक्रम सिंह सहयोगी है। अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज अधिकांश मुकदमे दोष मुक्ति, उन्मोचन, फाइनल रिपोर्ट या सरकार द्वारा वापस लिए जाने के आधार पर समाप्त हो चुके हैं। इस न्यायालय के समक्ष भी बुलाए जाने पर अभियुक्त ट्रायल के दौरान हाजिर होते रहे हैं।

अदालत ने कहा- बयान से मुकरे वादी पर कार्रवाई उचित नहीं, प्रतिकर नहीं मिलेगा

अदालत ने कहा कि अभियुक्तों को अपहरण, रंगदारी मांगने, अपमानित करने, धमकाने और आपराधिक साजिश के तहत दोष सिद्ध किया गया है। मामले को देखने से निश्चित तौर पर स्पष्ट है कि वादी मुकदमा को जबरन ऐसे ले जाया गया था कि वह हत्या होने के खतरे में पड़ गया था। मगर, वादी को मामले में किसी तरह की कोई भी शारीरिक चोट नहीं आई है। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि इस मामले में सजा की अवधि में समायोजित की जाएगी।
 
अभियोजन पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि बयान से मुकरने वाले वादी के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्रवाई की जाए। इस पर अदालत ने कहा कि न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि अभियुक्त निश्चित तौर पर सांसद / विधायक / सक्षम व्यक्ति थे, जिनके खिलाफ वादी ने घटना के तुरंत बाद मुकदमा दर्ज कराया था।

विवेचना के आरंभिक दौर में मामले का समर्थन भी किया गया। वादी निश्चित तौर पर एक सामान्य कंपनी का कर्मचारी था। बाद में नौकरी, परिवार और भविष्य की चिंताओं के मद्देनजर उसके द्वारा पूर्ण रूप से अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया गया, परंतु घटना के मूल तथ्यों को उसके द्वारा साबित किया गया है। अतः न्यायालय के निष्कर्ष में उसके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 की कार्रवाई उचित प्रतीत नहीं होती है। यह जरूर है कि न्यायालय आरोपी को अर्थदंड में प्रतिकर पाने से वंचित करती है।

तीन साल 10 माह पुराने मुकदमे में हुई सजा

प्रकरण के अनुसार, मुजफ्फरनगर निवासी अभिनव सिंघल ने 10 मई 2020 को लाइन बाजार थाने में अपहरण, रंगदारी और अन्य धाराओं में पूर्व सांसद धनंजय सिंह व संतोष विक्रम सिंह और दो अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभिनव सिंघल का आरोप था कि संतोष विक्रम सिंह और अन्य दो लोग पचहटिया स्थित साइट पर आए थे। वहां से असलहे के बल पर चारपहिया वाहन से उनका अपहरण कर मोहल्ला कालीकुत्ती स्थित धनंजय सिंह के घर ले जाया गया।

धनंजय सिंह पिस्टल लेकर आए और गालीगलौज करते हुए उनकी फर्म को कम गुणवत्ता वाली सामग्री की आपूर्ति करने के लिए दबाव डालने लगे। इन्कार करने पर धमकी देते हुए धनंजय ने रंगदारी मांगी। किसी प्रकार से उनके चंगुल से निकलकर लाइन बाजार थाने गए और आरोपियों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने गत मंगलवार को धनंजय सिंह और उनके सहयोगी को दोषी करार दिया था। बुधवार को सजा का एलान किया है।

अभियोजन ने कहा- उम्रकैद की सजा मिले
अभियोजन पक्ष ने कहा कि अभियुक्तों ने वादी का अपहरण करके उसे मृत्यु के भय में डाला। जनप्रतिनिधि ने अपराध किया है, इसलिए वह अधिक से अधिक दंड का पात्र है। आईपीसी की धारा 364 के अंतर्गत उसे आजीवन कारावास, धारा 386 के अंतर्गत 10 वर्ष के कारावास, धारा 504 के अंतर्गत दो वर्ष के कारावास, धारा 506 के अंतर्गत सात वर्ष के कारावास और धारा 120-बी के अंतर्गत आजीवन कारावास से दंडित किया जाए। अभियोजन ने यह भी प्रार्थना पत्र दिया गया कि वादी अभिनव सिंघल अपने बयान में सही से अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया है। ऐसी स्थिति में साक्षी के विरुद्ध भी कार्रवाई किया जाना न्यायोचित है।

बचाव पक्ष की दलील, राजनीतिक रंजिश के कारण मुकदमा

अभियुक्तों के ऊपर राजनीतिक रंजिश के कारण मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मामले में वादी या किसी अन्य व्यक्ति को किसी तरह की कोई भी चोट नहीं लगी। अभियुक्त विद्वेषपूर्ण राजनीति के शिकार हुए हैं। अभियुक्तों का चरित्र उत्तम है। जो भी मुकदमे हैं, वे राजनीतिक रंजिश की वजह से दर्ज किए गए हैं। धनंजय सिंह के खिलाफ दर्ज ज्यादातर मुकदमे किसी न किसी तरह से समाप्त हो चुके हैं।

अभियुक्त धनंजय सिंह जनप्रतिनिधि रहे हैं। वास्तव में शिकायत मिलने पर वादी को नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत हो रहे कार्य की गुणवत्ता के बारे में जानकारी हेतु बुलाया गया था। किसी तरह का कोई अपराध नहीं किया गया था। मामले में अभियुक्तों का अपराध करने का कोई आशय नहीं था। चुनाव होने के कारण यह मुकदमा दर्ज कराया गया था। भविष्य में अपराध करने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए अभियुक्तों को कम से कम दंड से दंडित किया जाए।

धनंजय सिंह ने कहा- वह जनप्रतिनिधि रहा, कम से कम दंड मिले
अभियुक्त धनंजय सिंह ने अदालत में खुद बहस की और कहा कि वह जनप्रतिनिधि रहे हैं। संविधान में पूरा विश्वास है। जनप्रतिनिधि होने के कारण उनके पास शिकायतें आती रहती हैं, जिस कारण प्रशासनिक अधिकारियों और जरूरी लोगों को बुलवाकर उनके निस्तारण हेतु चर्चा की जाती है। इसीलिए वादी को बुलाया गया था। मामले में न्यायालय के समक्ष समस्त बातें प्रत्येक स्तर पर सही सही बताई गई हैं।

जमानत प्रदान करते समय उच्च न्यायालय ने समस्त दस्तावेज देखे थे। फिर, यह माना गया था कि अभियुक्तों के ऊपर मामला मात्र डराने-धमकाने का है। मामले में वादी ने स्वयं बयान देकर घटना से इन्कार किया है। वादी को बयान देने के लिए उसके द्वारा बहलाया-फुसलाया नहीं गया था। वादी के बयान के कारण ही मामले में अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई थी। मगर, बाद में राजनीतिक दबाव के कारण मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

अभियुक्त मामले में पहले ही कई माह तक जेल में रहे हैं। जेल में बिताई गई अवधि ही इस मामले में पर्याप्त सजा है। अतः मामले में नरमी बरतते हुए और अभियुक्तों के अच्छे आचरण-विचार व जनप्रतिनिधि होने का ध्यान रखते हुए उन्हें कम से कम दंड से दंडित किया जाए।
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