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अटाला मस्जिद मामला: अटाला माता मंदिर बताकर को दाखिल किया गया था वाद, बहस पूरी; 28 मई को आएगा आदेश
Wed, 22 May 2024 11:49 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Wed, 22 May 2024 11:49 PM IST
सार
Jaunpur News: बहस के दौरान यह हवाला दिया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनेक रिपोर्ट्स में यह लिखा है कि वाद संपत्ति अटाला माता मंदिर के स्थान पर अटाला मस्जिद बनाई गई और अटाला देवी मंदिर के भवन के पत्थरों से अटाला मस्जिद का निर्माण किया गया। अटाला मस्जिद में अटाला शब्द एक हिंदू शब्द है, जिसका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है।
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मस्जिद को अटाला माता मंदिर बताने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रभारी सिविल जज सीनियर डिवीजन किरन मिश्रा की अदालत में अटाला मस्जिद को अटाला माता मंदिर बताने के मामले में दाखिल वाद पर बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई। अब 28 मई को आदेश आएगा। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। यह वाद 17 मई को दाखिल किया गया था।
मुकदमे में क्षेत्राधिकार व पोषणीयता पर बहस अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह और अजय प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से की। अदालत को बताया कि वाद संपत्ति अटाला माता मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है। इस कारण इस मुकदमे पर पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 लागू नहीं होता है।
विपक्षी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वक्फ एक्ट 1995 की धारा 4 के अधीन आज तक वाद संपत्ति का सर्वे नहीं किया है। इसके कारण वाद संपत्ति पर वक्फ एक्ट 1995 लागू नहीं होता है। राजस्व अभिलेखों में वर्तमान में वाद संपत्ति अटाला माता मंदिर की मालिक केंद्र सरकार है। वाद संपत्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अभिलेखों में अटाला मस्जिद के नाम से दर्ज है और राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद नाम से दर्ज है।
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विपक्षी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और विपक्षी प्रबंधन कमेटी अटाला मस्जिद ने अटाला देवी मंदिर की पहचान मिटाने के लिए राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद दर्ज करवा लिया, जबकि जामा मस्जिद अलग संपत्ति है। इसे स्थानीय लोग बड़ी मस्जिद भी कहते हैं।
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मुकदमे में क्षेत्राधिकार व पोषणीयता पर बहस अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह और अजय प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से की। अदालत को बताया कि वाद संपत्ति अटाला माता मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है। इस कारण इस मुकदमे पर पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 लागू नहीं होता है।
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विपक्षी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वक्फ एक्ट 1995 की धारा 4 के अधीन आज तक वाद संपत्ति का सर्वे नहीं किया है। इसके कारण वाद संपत्ति पर वक्फ एक्ट 1995 लागू नहीं होता है। राजस्व अभिलेखों में वर्तमान में वाद संपत्ति अटाला माता मंदिर की मालिक केंद्र सरकार है। वाद संपत्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अभिलेखों में अटाला मस्जिद के नाम से दर्ज है और राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद नाम से दर्ज है।
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विपक्षी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और विपक्षी प्रबंधन कमेटी अटाला मस्जिद ने अटाला देवी मंदिर की पहचान मिटाने के लिए राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद दर्ज करवा लिया, जबकि जामा मस्जिद अलग संपत्ति है। इसे स्थानीय लोग बड़ी मस्जिद भी कहते हैं।