फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Advocates furious over irregularities in revenue courts

Jaunpur News: राजस्व न्यायालयों में अनियमितता पर भड़के अधिवक्ता

Sat, 08 Mar 2025 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Mar 2025 12:14 AM IST
विज्ञापन
Advocates furious over irregularities in revenue courts
केराकत। केराकत तहसील में व्याप्त अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अधिवक्ताओं ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिवक्ता संघ केराकत की बैठक संघ के अध्यक्ष राजमणि यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें तहसील न्यायालयों में चल रही अव्यवस्थाओं पर चर्चा की गई और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया गया। कहा कि 12 मार्च तक समाधान न होने पर प्रदर्शन किया जाएगा। संघ के अधिवक्ताओं ने बताया कि एक माह पहले तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस उदासीन रवैये से अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है।अधिवक्ता संघ ने निर्णय लिया कि 12 मार्च तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीण न्यायालय को छोड़कर सभी न्यायालयों के कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो संघ धरना-प्रदर्शन करने और अन्य कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य होंगे।इस मुद्दे को लेकर डीएम जौनपुर, आयुक्त वाराणसी मंडल, राजस्व परिषद लखनऊ और मुख्यमंत्री कार्यालय लखनऊ को भी पत्र भेजा गया है, ताकि जल्द से जल्द समाधान निकाला जा सके। संघ के अध्यक्ष राजमणि यादव ने स्पष्ट किया कि यदि तहसील प्रशासन जल्द समाधान नहीं करता, तो अधिवक्ता संघ अपने अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाने को मजबूर होगा। इस मौके पर महामंत्री दिनेश पांडेय, विवेक कुमार सिंह, मांधाता सिंह, मुकेश शुक्ला, दिनेश शुक्ला, संजय यादव, प्रभाकर वर्मा, नम:नाथ शर्मा, श्यामबिहारी मौर्य आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन




इन मुख्य समस्याओं जताई गई नाराजगी -बिना विधिक प्रक्रियाओं का पालन किए आदेश पारित करना। निर्णय सुरक्षित होने के बावजूद पत्रावलियों पर फैसला न करना और बार-बार तारीख बढ़ाना। एकपक्षीय रूप से वाद पत्रावलियों को निरस्त करना और सुनवाई न करना। नए वादों को नेट पर दर्ज न करना और लंबित मामलों का निस्तारण न करना। खतौनी में आदेशों का अनुपालन न किया जाना। एसडीएम न्यायालय में धारा 38(2), धारा 67 और वर्ग 4 के मामलों में आदेश लंबित रहना। पेशकार के कार्यों में अनियमितता, पत्रावलियों का न मिलना और आदेश जारी न करना।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed