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सौहार्द की अनोखी तस्वीर : जौनपुर में हिंदू परिवार भी रखते हैं ताजिया, शहादत की याद में बहाते हैं आंसू
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शिया धर्मगुरु मौलाना सैय्यद इंतेज़ाम हैदर के हाथों सम्मानित होते ज्ञान कुमार। फाइल फोटो
जौनपुर। मुहर्रम के महीने में बड़ी संख्या में हिंदू अजादार हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत को याद करते हैं। यह आयोजन हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन गया है। दस दिनों तक चलने वाले इन कार्यक्रमों में हिंदू परिवार पूरे उत्साह से शामिल होते हैं। यह नजारा आज भी शहर के सदर इमामबाड़ा में भी देखने को मिलेगा। जहां बड़ी संख्या में हिंदू ताजिया को ठंडा करने के लिए लेकर साथ-साथ निकलते हैं।
अहियापुर निवासी सूरज साहू बताते हैं कि वह बचपन में बीमार थे, तभी उनके पिता राजेश साहू ने मन्नत मांगी थी। स्वस्थ होने के बाद से उनके पिता वह और बड़े भाई सोनू साहू मुहर्रम मनाते हैं। वह काले कपड़ों में रहकर नंगे पांव न सिर्फ इमाम हुसैन की अजादारी करते हैं बल्कि शबीहे तुर्बत ताबूत को अपने हाथों से उठाकर नजरानए अकीदत पेश करते हैं। सूरज के मुताबिक उनके पिता का 10 अगस्त 2011 को निधन हो गया। लेकिन वह दोनों भाई 25 साल से परंपरा निभाते आ रहे हैं। इसी तरह सैदनपुर निवासी पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड प्रबंधक ज्ञान कुमार भी मुहर्रम मनाते हैं। दस दिनों तक रोजाना अजाखाने में ताजिया रखने के बाद मजलिस व मातम का सिलसिला चलता रहता है और 11वीं मुहर्रम को उनके आवास से शबीहे ताबूत अलम व दुलदुल का जुलूस निकाला जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू अजादार शामिल होते हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने हजरत इमाम हुसैन के ऊपर दास्ताने कर्बला के नाम से किताब भी लिखी थी। साथ ही वे कर्बला के दर्शन भी कर चुके हैं। हजरत इमाम हुसैन ने जिस तरह से कर्बला के मैदान में शांति का प्रतीक बनते हुए अपने व परिजनों की शहादत दी उससे हमें सीख लेने की जरूरत है और उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर अमन व शांति का पैगाम दें यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।
रोजाना मजलिस में हो रहे शामिल
अहियापुर इमामबाड़े में रोजाना शाम को सात बजे के बाद देखने को मिलता है। यहां मजलिस के बाद इमाम हुसैन को अपना नजरानए अकीदत को पेश करते हुए इमाम हुसैन को चाहने वाले अपने गम का इजहार खिराजे अकीदत पेश करते हैं। यही नहीं इन लोगों ने फिदाये हुसैन नाम की हिंदू अंजुमन बना रखी है, जो नौहा मातम करने के साथ-साथ दसवीं मुहर्रम को अपने घरों में रखे ताजिये को सिर पर रखकर सदर इमामबाड़े स्थित कर्बला में लेजाकर दफन करते हैं।
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आज ठंडा किए जाएंगे 1270 से अधिक ताजिये
जौनपुर। जनपद में आज जगह-जगह ताजिये को लेकर जुलूस निकाला गया। 1100 से अधिक स्थानों पर जुलूस निकलेगा। इस दौरान 1270 से अधिक ताजिये संबंधित इमामबाड़ों में ठंडा किए जाएंगे।
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अहियापुर निवासी सूरज साहू बताते हैं कि वह बचपन में बीमार थे, तभी उनके पिता राजेश साहू ने मन्नत मांगी थी। स्वस्थ होने के बाद से उनके पिता वह और बड़े भाई सोनू साहू मुहर्रम मनाते हैं। वह काले कपड़ों में रहकर नंगे पांव न सिर्फ इमाम हुसैन की अजादारी करते हैं बल्कि शबीहे तुर्बत ताबूत को अपने हाथों से उठाकर नजरानए अकीदत पेश करते हैं। सूरज के मुताबिक उनके पिता का 10 अगस्त 2011 को निधन हो गया। लेकिन वह दोनों भाई 25 साल से परंपरा निभाते आ रहे हैं। इसी तरह सैदनपुर निवासी पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड प्रबंधक ज्ञान कुमार भी मुहर्रम मनाते हैं। दस दिनों तक रोजाना अजाखाने में ताजिया रखने के बाद मजलिस व मातम का सिलसिला चलता रहता है और 11वीं मुहर्रम को उनके आवास से शबीहे ताबूत अलम व दुलदुल का जुलूस निकाला जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू अजादार शामिल होते हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने हजरत इमाम हुसैन के ऊपर दास्ताने कर्बला के नाम से किताब भी लिखी थी। साथ ही वे कर्बला के दर्शन भी कर चुके हैं। हजरत इमाम हुसैन ने जिस तरह से कर्बला के मैदान में शांति का प्रतीक बनते हुए अपने व परिजनों की शहादत दी उससे हमें सीख लेने की जरूरत है और उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर अमन व शांति का पैगाम दें यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।
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रोजाना मजलिस में हो रहे शामिल
अहियापुर इमामबाड़े में रोजाना शाम को सात बजे के बाद देखने को मिलता है। यहां मजलिस के बाद इमाम हुसैन को अपना नजरानए अकीदत को पेश करते हुए इमाम हुसैन को चाहने वाले अपने गम का इजहार खिराजे अकीदत पेश करते हैं। यही नहीं इन लोगों ने फिदाये हुसैन नाम की हिंदू अंजुमन बना रखी है, जो नौहा मातम करने के साथ-साथ दसवीं मुहर्रम को अपने घरों में रखे ताजिये को सिर पर रखकर सदर इमामबाड़े स्थित कर्बला में लेजाकर दफन करते हैं।
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आज ठंडा किए जाएंगे 1270 से अधिक ताजिये
जौनपुर। जनपद में आज जगह-जगह ताजिये को लेकर जुलूस निकाला गया। 1100 से अधिक स्थानों पर जुलूस निकलेगा। इस दौरान 1270 से अधिक ताजिये संबंधित इमामबाड़ों में ठंडा किए जाएंगे।

शिया धर्मगुरु मौलाना सैय्यद इंतेज़ाम हैदर के हाथों सम्मानित होते ज्ञान कुमार। फाइल फोटो