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रसोइयों ने किया धरना प्रदर्शन
Jaunpur
Updated Mon, 11 Nov 2013 05:41 AM IST
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बक्शा। बकाया भुगतान और मानदेय बढ़ाए जाने समेत काई अन्य मांगों को लेकर परिषदीय विद्यालयों में तैनात रसोइयों ने बक्शा ब्लाक मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की। अपनी मांग से संबंधित मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीओ पंचायत को सौंपा। रविवार को सीडीओ के दौरे की सूचना पर सिकरारा और बक्शा ब्लाक के रसोइये यहां इकट्ठा हुए थे। सीडीओ का कार्यक्रम निरस्त हो गया तो एडीओ पंचायत को ज्ञापन सौंप वापस चले गए।
रसोइया संघ के जिलाध्यक्ष संतोष मिश्र की अगुवाई में यहां पहुंचे रसोइयों ने कहा कि विद्यालय के बच्चों को महीने भर खाना बनाकर खिलाने के एवज में उन्हें सिर्फ एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। यह उनकी मेहनत की आधी कीमत भी नहीं है। इतना कम पैसा मिलने के बाद भी पिछले सात महीने का पैसा उन्हें नहीं दिया गया है। रसोइयों ने यह भी कहा कि ग्राम प्रधान के घर से रोज रोज राशन लाने की समस्या से भी वे तंग आ चुके हैं। इस व्यवस्था को बदल कर महीने में एक बार या दो बार राशन उठाने की व्यवस्था बननी चाहिए। मानदेय बढ़ाकर कम से कम तीन हजार रुपये किया जाना चाहिए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि रसोइयों को एक तो वाजिब मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है। जो दिया जा रहा है उसका समय से भुगतान नहीं हो रहा है। और उन्हें आकस्मिक अवकाश की भी व्यवस्था नहीं की गई है। अगर किसी को कभी अचानक किसी काम से अवकाश पर जाना पड़ा तो मानदेय में कटौती कर ली जाती है। आकस्मिक अवकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। मानदेय का भुगतान उन्हें चेक के माध्यम से किया जाता है। यह व्यवस्था ठीक नहीं है। भुगतान उनके बैंक के बचत खाते में होना चाहिए। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में परेशानी हो रही है। इस नाते रसोईं गैस की व्यवस्था की जानी चाहिए। धरना प्रदर्शन में शिवशंकर उपाध्याय, गीता देवी, जड़ावती, सरोजा, प्रमीला, मनोरमा समेत अन्य रसोइये भी मौजूद थे।
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रसोइया संघ के जिलाध्यक्ष संतोष मिश्र की अगुवाई में यहां पहुंचे रसोइयों ने कहा कि विद्यालय के बच्चों को महीने भर खाना बनाकर खिलाने के एवज में उन्हें सिर्फ एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। यह उनकी मेहनत की आधी कीमत भी नहीं है। इतना कम पैसा मिलने के बाद भी पिछले सात महीने का पैसा उन्हें नहीं दिया गया है। रसोइयों ने यह भी कहा कि ग्राम प्रधान के घर से रोज रोज राशन लाने की समस्या से भी वे तंग आ चुके हैं। इस व्यवस्था को बदल कर महीने में एक बार या दो बार राशन उठाने की व्यवस्था बननी चाहिए। मानदेय बढ़ाकर कम से कम तीन हजार रुपये किया जाना चाहिए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि रसोइयों को एक तो वाजिब मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है। जो दिया जा रहा है उसका समय से भुगतान नहीं हो रहा है। और उन्हें आकस्मिक अवकाश की भी व्यवस्था नहीं की गई है। अगर किसी को कभी अचानक किसी काम से अवकाश पर जाना पड़ा तो मानदेय में कटौती कर ली जाती है। आकस्मिक अवकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। मानदेय का भुगतान उन्हें चेक के माध्यम से किया जाता है। यह व्यवस्था ठीक नहीं है। भुगतान उनके बैंक के बचत खाते में होना चाहिए। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में परेशानी हो रही है। इस नाते रसोईं गैस की व्यवस्था की जानी चाहिए। धरना प्रदर्शन में शिवशंकर उपाध्याय, गीता देवी, जड़ावती, सरोजा, प्रमीला, मनोरमा समेत अन्य रसोइये भी मौजूद थे।
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