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बस 32 सेकेंड में 75 जिलों के नाम, 21 सेकेंड में सभी राज्यों की राजधानी
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स्कूल की खबर के लिए दिव्या गौड़ की फोटो।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों का माहौल अब तेजी से बदलने लगा है। यहां पढ़ने वाले बच्चों की प्रतिभा भी किसी से कम नहीं है। नजीर के तौर पर यशस्वी और आफिया को लिया जा सकता है। प्रदेश के सभी 75 जिलों के नाम आपको भले ही न याद हों, लेकिन यशस्वी महज 32 सेकेंड में फर्राटेदार ढंग से सारे नाम बता देती है। देश के सभी राज्य और उनकी राजधानी के नाम आफिया से महज 21 सेकेंड में सुन सकते हैं। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली इन बेटियों की प्रतिभा का हर कोई कायल है।
पिछले दिनों विद्यालय के निरीक्षण पर गए डीएम-एसपी भी उनकी सराहना किए बिना खुद को नहीं रोक पाए। दोनों ही बेटियां सिकरारा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय ताहिरपुर की छात्राएं हैं। पढ़ने में होनहार यह बेटियां बेहद सामान्य परिवारों से हैं। भरतपुर गांव निवासी यशस्वी के पिता सुनील किसान हैं, जबकि मां प्रियंका पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पढ़ने में मेधावी यशस्वी आईएएस बनना चाहती है। वह विद्यालय की हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। वहीं सिकरारा निवासी आफिया के पिता सफी अहमद और मां शमा बानो की पृष्ठभूमि भी बेहद साधारण है। सामान्य ज्ञान की जानकारी रखने वाली आफिया फर्राटेदार अंग्रेजी में वार्तालाप करती है। उसने अपनी अनपढ़ मां को साक्षर भी बनाया है। सिकरारा ब्लॉक के बीईओ राजीव यादव का कहना है कि पढ़ाई के प्रति इनकी ललक सराहनीय है। निजी स्कूलों के बच्चों से ये तनिक भी कम नहीं। गत शनिवार को विद्यालय पहुंचे डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी राजकरन नय्यर भी इन बच्चों से मिलकर उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। उन्हें आगे बढ़ाने का भरोसा दिया।
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मजदूर पिता की बेटी लिखती है कविता
प्राथमिक विद्यालय लखेसर में कक्षा पांच की छात्रा दिव्या गौड़ के पिता देवव्रत गौड़ पेशे से मजदूर हैं। सुविधाओं के अभाव के बावजूद उसके हौसले बुलंद हैं। वह मार्मिक कविताएं लिखती है। राज्य स्तरीय ऑनलाइन काव्य संगोष्ठी में भी दिव्या ने अपनी कविता प्रस्तुत की, जिसे काफी सराहना मिली।
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पिछले दिनों विद्यालय के निरीक्षण पर गए डीएम-एसपी भी उनकी सराहना किए बिना खुद को नहीं रोक पाए। दोनों ही बेटियां सिकरारा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय ताहिरपुर की छात्राएं हैं। पढ़ने में होनहार यह बेटियां बेहद सामान्य परिवारों से हैं। भरतपुर गांव निवासी यशस्वी के पिता सुनील किसान हैं, जबकि मां प्रियंका पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पढ़ने में मेधावी यशस्वी आईएएस बनना चाहती है। वह विद्यालय की हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। वहीं सिकरारा निवासी आफिया के पिता सफी अहमद और मां शमा बानो की पृष्ठभूमि भी बेहद साधारण है। सामान्य ज्ञान की जानकारी रखने वाली आफिया फर्राटेदार अंग्रेजी में वार्तालाप करती है। उसने अपनी अनपढ़ मां को साक्षर भी बनाया है। सिकरारा ब्लॉक के बीईओ राजीव यादव का कहना है कि पढ़ाई के प्रति इनकी ललक सराहनीय है। निजी स्कूलों के बच्चों से ये तनिक भी कम नहीं। गत शनिवार को विद्यालय पहुंचे डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी राजकरन नय्यर भी इन बच्चों से मिलकर उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। उन्हें आगे बढ़ाने का भरोसा दिया।
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मजदूर पिता की बेटी लिखती है कविता
प्राथमिक विद्यालय लखेसर में कक्षा पांच की छात्रा दिव्या गौड़ के पिता देवव्रत गौड़ पेशे से मजदूर हैं। सुविधाओं के अभाव के बावजूद उसके हौसले बुलंद हैं। वह मार्मिक कविताएं लिखती है। राज्य स्तरीय ऑनलाइन काव्य संगोष्ठी में भी दिव्या ने अपनी कविता प्रस्तुत की, जिसे काफी सराहना मिली।

स्कूल की खबर के लिए यशस्वी यादव की फोटो।- फोटो : JAUNPUR

स्कूल की खबर के लिए आफिया बानो की फोटो।- फोटो : JAUNPUR
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