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चिकित्सकों की मनमानी आयुष्मान योजना पर पड़ रही भारी
Updated Sun, 02 Dec 2018 11:52 PM IST
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जौनपुर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का लाभ चिकित्सकों की मनमानी की वजह रोगियों को नहीं मिल रहा है। योजना लागू होने के दो महीने में बाद महज सात लोगों का इलाज इसके तहत किया जा सका है। योजना से निजी अस्पताल जुड़ भी नहीं रहे हैं। एक लाख 87 हजार 454 से अधिक परिवारों को इसके तहत सुविधा दी जानी है लेकिन चिकित्सक मरीजों को हतोत्साहित करके इलाज ही नहीं करना चाहते हैं। आयुष्मान भारत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है। पूरे देश में एक साथ 23 सितंबर को पीएम ने इसे लांच किया था। इस योजना के तहत वर्ष 2011 आर्थिक, सामाजिक, जातीय गणना के हिसाब से एक लाख 87 हजार 454 परिवारों को इसके लिए सूचीबद्ध किया गया। पंजीकृत परिवार के सदस्यों का साल भर में पांच लाख रुपये तक का इलाज किसी भी अस्पताल में कराया जा सकता है। मगर चिकित्सकों की मनमानी के चलते मरीजों को निराश होना पड़ रहा है। एक मरीज को सीएमओ ने खुद जिला अस्पताल भेजा था, जिसे सर्जन ने बहाना बनाकर लौटा दिया। एक प्रशासनिक अधिकारी ने एक मरीज को आपरेशन के लिए भेजा तो डाक्टर ने यह कहकर लौटा दिया कि वह दवा से ही ठीक हो जाएगा। खैर अधिकारी ने दूसरे अस्पताल भेजकर उस गरीब का आपरेशन कराया। रोजना मरीजों के साथ ऐसा ही हो रहा है। जिन प्राइवेट अस्पतालों को चिह्नित किया गया है वे भी ऐसे मरीजों को ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसकी वजह से एक मरीज का इलाज प्राइवेट अस्पताल में हुआ है। इसके अलावा जिला अस्पताल में तीन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदलापुर में तीन मरीजों का इलाज इस योजना के तहत हुआ है।
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