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पंडालों में जयकारे के साथ पहुंचने लगी मां दुर्गा की प्रतिमाएं
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:16 AM IST
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जौनपुर। सोमवार को पितृपक्ष खत्म होते ही मां दुर्गा की प्रतिमाएं पंडालों की ओर रवाना होने लगी। बुधवार से आरम्भ हो रहे नवरात्रि पर्व को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। पितृपक्ष के समाप्त होते ही श्रद्धालु भक्त दुर्गा पूजा पंडाल को व्यवस्थित करने के बाद सोमवार को मूर्ति लेकर पंडालो में पहुंचे। जहां पर बुधवार से माता की मूर्ति स्थापना कर नौ दिन तक उपासना की जाएगी। मूर्तिकारों के यहां सोमवार को सुबह से ही मूर्ति ले जाने वाले लोगों की कतार लगी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक नवरात्र और दुर्गा पूजा को लेकर धूम शुरू हो गई है।
शारदीय नवरात्र को लेकर पूजा पंडालों में तैयारियां तेज हो गई है। मूर्ति को पंडाल तक पहुंचाने के लिए से ही मूर्तिकारों के यहां भीड लगी रही। पूजा पंडालों को सजाने के साथ सजावट को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से मूर्ति लेने के लिए लोग मूर्तिकारों के पहुंचने लगे। हवन पूजन के साथ बुधवार से नवरात्र शुरू हो जाएगा। कलश स्थापना मुहूर्त के विषय में पं. रवि पांडेय का कहना है कि 10 अक्तूबर दिन बुधवार को नवरात्र का प्रथम दिन है। चूंकि प्रतिपदा तिथि सुबह 7 बजकर 56 मिनट तक है। अत: कलश स्थापना सुबह 7 बजकर 56 मिनट से पूर्व ही होगी। दूसरा अभिजित मुहूर्त दोपहर में 11.37 से 12.23 के बीच होगा। उस समय भी कलश स्थापना का योग है। 17 अक्टूबर को अष्टमी व्रत है एवं उसी दिन दोपहर में 12.27 के बाद नवमी तिथि लग जाएगी। चूंकि नवमी 18 अक्टूबर को दोपहर में 2.32 तक ही रहेगी। इसी समय के बीच हवन का कार्यक्रम सम्पन्न होगा। उसके बाद नवरात्र व्रत का व्रत का पारण यानी अन्न ग्रहण करना है। जबकि विजय दशमी पर्व 19 अक्टूबर को होगा।
शारदीय नवरात्र को लेकर पूजा पंडालों में तैयारियां तेज हो गई है। मूर्ति को पंडाल तक पहुंचाने के लिए से ही मूर्तिकारों के यहां भीड लगी रही। पूजा पंडालों को सजाने के साथ सजावट को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से मूर्ति लेने के लिए लोग मूर्तिकारों के पहुंचने लगे। हवन पूजन के साथ बुधवार से नवरात्र शुरू हो जाएगा। कलश स्थापना मुहूर्त के विषय में पं. रवि पांडेय का कहना है कि 10 अक्तूबर दिन बुधवार को नवरात्र का प्रथम दिन है। चूंकि प्रतिपदा तिथि सुबह 7 बजकर 56 मिनट तक है। अत: कलश स्थापना सुबह 7 बजकर 56 मिनट से पूर्व ही होगी। दूसरा अभिजित मुहूर्त दोपहर में 11.37 से 12.23 के बीच होगा। उस समय भी कलश स्थापना का योग है। 17 अक्टूबर को अष्टमी व्रत है एवं उसी दिन दोपहर में 12.27 के बाद नवमी तिथि लग जाएगी। चूंकि नवमी 18 अक्टूबर को दोपहर में 2.32 तक ही रहेगी। इसी समय के बीच हवन का कार्यक्रम सम्पन्न होगा। उसके बाद नवरात्र व्रत का व्रत का पारण यानी अन्न ग्रहण करना है। जबकि विजय दशमी पर्व 19 अक्टूबर को होगा।
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