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श्राद्ध कर्म और पिंडदान के साथ पितरों को विदाई दी गई
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:16 AM IST
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मछलीशहर। पितृपक्ष श्राद्ध कर्म और पिंडदान के साथ ही समाप्त हो गया। लोगों ने सोमवार को अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पितरों की पूजा करने का विधान है। पितरों के पूजन का यह पर्व प्रतिपदा से आरम्भ होकर अमावस्या तिथि तक चलता है। सोमवार को अमावस्या तिथि सुबह 10 बजकर 43 मिनट से आरम्भ हो गई। जो मंगलवार को 9 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी।
श्राद्धकर्म कुतप बेला में ही सम्पन्न होता है। इसलिए सोमवार को ही अमावस्या तिथि को मान्यता विद्वानों द्वारा देते हुए पितृ विसर्जन किया गया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में नदी अथवा तालाब के किनारे लोगों ने हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार विधि विधान से पिंडदान कर पितरों की विदाई। सोमवार को दिन में लोगों ने जिन्हें अपने पितरों की मृत्यु तिथि का ज्ञान नही था ,ऐसे लोगों ने पिण्डदान भी किया। पितरों को भोजन आदि चढ़ाया गया। ब्राह्मणों को भी भोजन कराने के बाद दक्षिणा देकर विदा किया गया। इस प्रकार एक पखवाड़े से चला आ रहा पितृपक्ष समाप्त हो गया। पितृपक्ष खत्म होते ही नवरात्र की शुरूआत हो गई। पूजा पंडालों में पूर्तियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
श्राद्धकर्म कुतप बेला में ही सम्पन्न होता है। इसलिए सोमवार को ही अमावस्या तिथि को मान्यता विद्वानों द्वारा देते हुए पितृ विसर्जन किया गया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में नदी अथवा तालाब के किनारे लोगों ने हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार विधि विधान से पिंडदान कर पितरों की विदाई। सोमवार को दिन में लोगों ने जिन्हें अपने पितरों की मृत्यु तिथि का ज्ञान नही था ,ऐसे लोगों ने पिण्डदान भी किया। पितरों को भोजन आदि चढ़ाया गया। ब्राह्मणों को भी भोजन कराने के बाद दक्षिणा देकर विदा किया गया। इस प्रकार एक पखवाड़े से चला आ रहा पितृपक्ष समाप्त हो गया। पितृपक्ष खत्म होते ही नवरात्र की शुरूआत हो गई। पूजा पंडालों में पूर्तियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
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