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या हुसैन या अब्बास की सदा से गूंजा शहर
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:28 AM IST
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जौनपुर। इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में दसवीं मुहर्रम के मौके पर शुक्रवार को पूरा शहर या हुसैन या अब्बा, या सकीना या अब्बास जैसी गमगीन सदाओं से गूंज उठा। शहर के विभिन्न मुहल्लों से ताजिया, अलम, जुल्जनाह के साथ मातमी जुलूस निकला। नौहा मातम के साथ जुलूस सदर इमामबाड़े पहुंचा जहां नम आंखों के बीच ताजिए सुपुर्द-ए-खाक किए गए। मजलिसें शामें गरीबा में मौलाना ने कबला की दास्तां सुनाई तो पूरा मजमा रो पड़ा। इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के गम में लोगों ने मातम किया।
नगर क्षेत्र के अधिकांश ताजिये सदर इमाम बारगाह स्थित गंजे शहीदा में सुपुर्द ए खाक किये गए जबकि कुछ ताजिए मोहल्लों की कर्बलाओं में भी सुपुर्द ए खाक हुए। चहारसू चौराहे से उठा जुलूस शिया जामा मस्जिद होते हुए मुख्य मार्गों से गुजरकर सदर इमामबारगाह पहुंचा। इमामबाड़ा शाह अबुल हसन भंडारी, बलुआघाट, कटघरा, मोहल्ला रिजवीं खां, पुरानी बाजार, ताड़तला, बारादुअरिया, अहियापुर, पानदरीबा के ताजिए भी सदर इमामबारगाह स्थित गंजे शहीदा में दफ्न हुए। सिपाह मोहल्ले के ताजिये नबी साहब स्थित गंजे शहीदा में दफ्न किये गये। इसके पूर्व बलुआघाट स्थित शाही किला मस्जिद, मोहल्ला दीवान शाह, कबीर, ताड़तला की मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर नमाजे आशूरा का आयोजन हुआ। देर शाम सदर इमामबारगाह की ईदगाह मैदान में मजलिसें शामे गरीबां हुई जिसे कैसर नवाब ने सम्बोधित किया। संचालन तहसीन शाहिद ने किया। मोहर्रम के जुलूस को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
करंजाकला बाजार से ताजिया का जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होते हुए करंजाखुर्द गांव पहुंचा वहां से करंजाखुर्द इमामबारगाह से दोनों गांवों की अंजुमनों ने मिलकर ताजिया उठाया और सात किलोमीटर दूर बेगमगंज सदर इमामबाड़ा पहुंचा। जहां पर ताजियों को ठंडा किया गया। बक्शा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के बर्रेपट्टी, दक्षिणपट्टी, पूराशेरखां, मोहम्मदपुर, महिमापुर, सदरुद्दीनपुर, बेलापार आदि गांवों से नौहा मातम के साथ जुलूस उत्तरपट्टी गांव मख्दूम शाह स्थित रौजे ए इमाम हुसैन पर पहुंचा। यहां से एक साथ सभी जुलूस सदर इमामबाड़े पहुंचा। जहां ताजियों को ठंडा किया गया। शामे गरीबां की मजलिस को मौलाना गुलाम बाकिर ने खेताब किया। सुजानगंज, मछलीशहर, बदलापुर, खुटहन, केराकत, शाहगंज, खेतासराय, मड़ियाहूं, जफराबाद आदि इलाकों में भी ताजिए का जुलूस निकाला गया।
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नगर क्षेत्र के अधिकांश ताजिये सदर इमाम बारगाह स्थित गंजे शहीदा में सुपुर्द ए खाक किये गए जबकि कुछ ताजिए मोहल्लों की कर्बलाओं में भी सुपुर्द ए खाक हुए। चहारसू चौराहे से उठा जुलूस शिया जामा मस्जिद होते हुए मुख्य मार्गों से गुजरकर सदर इमामबारगाह पहुंचा। इमामबाड़ा शाह अबुल हसन भंडारी, बलुआघाट, कटघरा, मोहल्ला रिजवीं खां, पुरानी बाजार, ताड़तला, बारादुअरिया, अहियापुर, पानदरीबा के ताजिए भी सदर इमामबारगाह स्थित गंजे शहीदा में दफ्न हुए। सिपाह मोहल्ले के ताजिये नबी साहब स्थित गंजे शहीदा में दफ्न किये गये। इसके पूर्व बलुआघाट स्थित शाही किला मस्जिद, मोहल्ला दीवान शाह, कबीर, ताड़तला की मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर नमाजे आशूरा का आयोजन हुआ। देर शाम सदर इमामबारगाह की ईदगाह मैदान में मजलिसें शामे गरीबां हुई जिसे कैसर नवाब ने सम्बोधित किया। संचालन तहसीन शाहिद ने किया। मोहर्रम के जुलूस को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
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करंजाकला बाजार से ताजिया का जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होते हुए करंजाखुर्द गांव पहुंचा वहां से करंजाखुर्द इमामबारगाह से दोनों गांवों की अंजुमनों ने मिलकर ताजिया उठाया और सात किलोमीटर दूर बेगमगंज सदर इमामबाड़ा पहुंचा। जहां पर ताजियों को ठंडा किया गया। बक्शा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के बर्रेपट्टी, दक्षिणपट्टी, पूराशेरखां, मोहम्मदपुर, महिमापुर, सदरुद्दीनपुर, बेलापार आदि गांवों से नौहा मातम के साथ जुलूस उत्तरपट्टी गांव मख्दूम शाह स्थित रौजे ए इमाम हुसैन पर पहुंचा। यहां से एक साथ सभी जुलूस सदर इमामबाड़े पहुंचा। जहां ताजियों को ठंडा किया गया। शामे गरीबां की मजलिस को मौलाना गुलाम बाकिर ने खेताब किया। सुजानगंज, मछलीशहर, बदलापुर, खुटहन, केराकत, शाहगंज, खेतासराय, मड़ियाहूं, जफराबाद आदि इलाकों में भी ताजिए का जुलूस निकाला गया।
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