{"_id":"5b995d58867a557e88369619","slug":"153677754317-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरतालिका तीज पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरतालिका तीज पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
Updated Thu, 13 Sep 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जौनपुर। हरतालिका तीज पर बुधवार को सुहागिनों ने निराजल व्रत रखा। अखंड सौभाग्य के लिए देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की पूजा की। व्रती महिलाओं ने शाम को मंदिर में पुष्प, धूपदीप व नैवेद्य आदि से देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती का पूजन की। दोपहर के बाद मंदिर परिसर में दर्शन पूजन के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। घरों में शाम को तीज व्रत की कथा का श्रवण किया गया। मिट्टी की बनी शिव, पार्वती और गणपति की पूजा की गई।
हरितालिका तीज व्रत का सुहागिन का कठिन व्रत है। कुंवारी कन्याएं भी व्रत रखती हैं। अखंड सुहाग की कामना से निराजल रहकर दिन भर भगवान शिव और पार्वती की आराधना की जाती है। भोर में उठकर मीठी वस्तु खाकर पानी पीने के बाद व्रत की शुरुआत हुई। बादलों की आवाजाही से मौसम थोड़ा ठीक था लेकिन उमस के चलते त्योहार कठिन हो गया था। तीज की तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू हो गई थीं। बाजार से शृंगार के वस्तुओं की खरीद और मेहंदी आदि लगाने का सिलसिला देर रात और बुधवार को दिन में भी चलता रहा। व्रती महिलाओं ने तिल के पत्ते को सिर पर रखकर स्नान किया। नए वस्त्र धारण किए और सोलह शृंगार किया। मिट्टी के बने शिव और पार्वती की मूर्तियों की प्रतीष्ठा के बाद उनकी पूजा की गई। उसके शिवालयों में जाकर दर्शन-पूजन किया गया। माता गौरी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित की गईं। सुबह से पूजा के लिए फल आदि की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ रही। मेंहदी लगवाने के लिए एक दिन पहले से दुकानों पर महिलाओं की भीड़ रही। त्योहार के कारण फलों के दाम भी बढ़ गए थे। बाजार में केला जहां 40 से लेकर 50 रुपये दर्जन तो सेब 90 से 120 रूपये किलो तक बिका।
शाम को घरों में कथा का श्रवण भी किया गया। कथा के अनुसार सर्वप्रथम इस व्रत को देवी पार्वती ने महादेव को वर के रूप में पाने के लिए किया था। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया था। उनकी तपस्या में व्यवधान न हो इसलिए सखियां उन्हें हर ले गई थी। शिव ने दर्शन दिए। देवी पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में महादेव का पूजन किया था। सखियों द्वारा हरे जाने के कारण ही इस तीज को हरितालिका तीज कहा जाने लगा। इस व्रत को मनाने की परंपरा उसी दिन शुरू हुई। पति की दीर्घायु के लिए तथा कुवारी कन्याएं मनोवांक्षित वर की प्राप्ति के लिए हरितालिका (तीज) का व्रत करती है।
विज्ञापन
हरितालिका तीज व्रत का सुहागिन का कठिन व्रत है। कुंवारी कन्याएं भी व्रत रखती हैं। अखंड सुहाग की कामना से निराजल रहकर दिन भर भगवान शिव और पार्वती की आराधना की जाती है। भोर में उठकर मीठी वस्तु खाकर पानी पीने के बाद व्रत की शुरुआत हुई। बादलों की आवाजाही से मौसम थोड़ा ठीक था लेकिन उमस के चलते त्योहार कठिन हो गया था। तीज की तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू हो गई थीं। बाजार से शृंगार के वस्तुओं की खरीद और मेहंदी आदि लगाने का सिलसिला देर रात और बुधवार को दिन में भी चलता रहा। व्रती महिलाओं ने तिल के पत्ते को सिर पर रखकर स्नान किया। नए वस्त्र धारण किए और सोलह शृंगार किया। मिट्टी के बने शिव और पार्वती की मूर्तियों की प्रतीष्ठा के बाद उनकी पूजा की गई। उसके शिवालयों में जाकर दर्शन-पूजन किया गया। माता गौरी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित की गईं। सुबह से पूजा के लिए फल आदि की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ रही। मेंहदी लगवाने के लिए एक दिन पहले से दुकानों पर महिलाओं की भीड़ रही। त्योहार के कारण फलों के दाम भी बढ़ गए थे। बाजार में केला जहां 40 से लेकर 50 रुपये दर्जन तो सेब 90 से 120 रूपये किलो तक बिका।
विज्ञापन
शाम को घरों में कथा का श्रवण भी किया गया। कथा के अनुसार सर्वप्रथम इस व्रत को देवी पार्वती ने महादेव को वर के रूप में पाने के लिए किया था। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया था। उनकी तपस्या में व्यवधान न हो इसलिए सखियां उन्हें हर ले गई थी। शिव ने दर्शन दिए। देवी पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में महादेव का पूजन किया था। सखियों द्वारा हरे जाने के कारण ही इस तीज को हरितालिका तीज कहा जाने लगा। इस व्रत को मनाने की परंपरा उसी दिन शुरू हुई। पति की दीर्घायु के लिए तथा कुवारी कन्याएं मनोवांक्षित वर की प्राप्ति के लिए हरितालिका (तीज) का व्रत करती है।
विज्ञापन