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समाज के लिए घातक है शिक्षा का व्यावसायीकरण
Updated Sun, 12 Aug 2018 12:20 AM IST
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जौनपुर। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नई दिल्ली के प्रो. आरपी पाठक ने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण समाज के लिए घातक है। शिक्षण संस्था के साथ समाज हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है कि शिक्षा के विकास के लिए आगे आएं। शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने के बजाय उसके विकास को प्राथमिकता दें। वह टीडी कालेज के बीएड विभाग में आयोजित शिक्षक शिक्षा में संस्कृति एवं नवाचार विषय पर व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से आयोजित शिक्षा नीतियों एवं आवश्यक शिक्षा की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय एवं विदेश शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक एवं पाठ्यक्रम का तुलनात्मक अध्यक्ष प्रस्तुत किया। टीचर ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम एवं समयावधि के परिवर्तन के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष पर प्रकाश डाला। शिक्षा के साथ-साथ संस्कार को बढ़ावा दिए जाने की कवायद की। अध्यापक शिक्षा में भारतीय मूल्य, दर्शन, नैतिकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता को बताया। शिक्षकों और छात्रों के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। समस्या और समाधान प्रक्रिया को बताया। व्याख्यान की अध्यक्षता प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह ने की। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डा. समर बहादुर सिंह, डा. विनय कुमार सिंह, डा. सुधांशु सिन्हा, डा. वंदना शु्क्ला, डा. रीता सिंह. डा. श्रद्दा, डा. गीता आदि मौजूद थी। संचालन डा. अजय कुमार सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से आयोजित शिक्षा नीतियों एवं आवश्यक शिक्षा की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय एवं विदेश शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक एवं पाठ्यक्रम का तुलनात्मक अध्यक्ष प्रस्तुत किया। टीचर ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम एवं समयावधि के परिवर्तन के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष पर प्रकाश डाला। शिक्षा के साथ-साथ संस्कार को बढ़ावा दिए जाने की कवायद की। अध्यापक शिक्षा में भारतीय मूल्य, दर्शन, नैतिकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता को बताया। शिक्षकों और छात्रों के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। समस्या और समाधान प्रक्रिया को बताया। व्याख्यान की अध्यक्षता प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह ने की। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डा. समर बहादुर सिंह, डा. विनय कुमार सिंह, डा. सुधांशु सिन्हा, डा. वंदना शु्क्ला, डा. रीता सिंह. डा. श्रद्दा, डा. गीता आदि मौजूद थी। संचालन डा. अजय कुमार सिंह ने किया।
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