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प्राथमिक वर्ग में वृद्धि और जूनियर वर्ग में स्वाती ने मारी बाजी
Updated Tue, 07 Aug 2018 12:04 AM IST
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जौनपुर। स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी रामेश्वर प्रसाद सिंह की 36वीं पुण्यतिथि पर रविवार को हिंदी भवन में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 310 बच्चों ने भाग लिया। चित्रकला प्रतियोगिता के प्रथम पुरस्कार विजेताओं में प्राथमिक वर्ग की वृद्धि गुप्ता (सेंट पैट्रिक्स स्कूल), द्वितीय प्राथमिक वर्ग के मो. रेहान (रिजवी लर्नर्स एकेडमी), प्राथमिक वर्ग उच्च के अच्युत दुबे (रिजवी लर्नर्स एकेडमी), जूनियर वर्ग की स्वाती (सेंट पैट्रिक्स स्कूल) एवं उच्च माध्यमिक वर्ग की सृष्टि श्रीवास्तव (सेंट पैट्रिक्स स्कूल) रहीं। विजेताओं को मुख्य अतिथि ने पुरस्कृत किया।
मुख्य अतिथि टीडी कालेज के प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि जौनपुर सांस्कृतिक संचेतना और सौहार्द्र का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां की सांस्कृतिक चेतना में हिंदी सेवियों का प्रमुख मंच रहे हिंदी भवन का अभूतपूर्व योगदान रहा है और रामेश्वर सिंह इन गतिविधियों के केंद्र पुरुष रहे। उन्होंने अपनी भी संपूर्ण उपलब्धि के लिए हिन्दी की सेवा को ही आधार बताया। उन्होंने कहा कि जब सारे लोग अपनी रोजी-रोटी के चक्कर में थे तब वे महामानव हिंदी, देश और समाज के लिए समर्पित थे। उन्होंने कहा कि जौनपुर का पहला प्रेस स्थापित करते हुए उनके सामने कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था बल्कि उसके पीछे आजादी की लड़ाई और हिन्दी की सेवा का लक्ष्य था। हिन्दी भवन ने हमारी संस्कृति, कविता और हिन्दी साहित्य को मंच दिया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र पटेल ने कहा कि यह हिन्दी भवन का निर्माण अपनी भाषा और संस्कृति के प्रतीक के तौर पर किया गया था। उन्होंने चित्र कला प्रतियोगिता का जिक्र करते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चे अपने चित्रों के जरिए अपनी भावनाएं अभिव्यक्त करते हैं। चित्रों को देख कर लगता है कि उनमें गहरी संवेदना है। साहित्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने रामेश्वर प्रसाद सिंह के स्वतंत्रता संग्राम, समय के माध्यम से पत्रकारिता एवं सामाजिक क्षेत्र में किए गए योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अनुकरणीय बताया। डा. पीसी विश्वकर्मा ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। हिन्दी भवन के अध्यक्ष अजय कुमार, हिन्दी साहित्य सम्मेलन के जनार्दन प्रसाद अष्ठाना, ओमप्रकाश मिश्र, राजेश पांडेय, रामजीत मिश्र, अरविन्द उपाध्याय, डा. प्रतीक मिश्र, संजय सेठ, अखिलेश, रामराज गौतम, शमशीर हसन मौजूद रहे। संचालन हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री डा. अजय विक्रम सिंह ने किया।
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मुख्य अतिथि टीडी कालेज के प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि जौनपुर सांस्कृतिक संचेतना और सौहार्द्र का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां की सांस्कृतिक चेतना में हिंदी सेवियों का प्रमुख मंच रहे हिंदी भवन का अभूतपूर्व योगदान रहा है और रामेश्वर सिंह इन गतिविधियों के केंद्र पुरुष रहे। उन्होंने अपनी भी संपूर्ण उपलब्धि के लिए हिन्दी की सेवा को ही आधार बताया। उन्होंने कहा कि जब सारे लोग अपनी रोजी-रोटी के चक्कर में थे तब वे महामानव हिंदी, देश और समाज के लिए समर्पित थे। उन्होंने कहा कि जौनपुर का पहला प्रेस स्थापित करते हुए उनके सामने कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था बल्कि उसके पीछे आजादी की लड़ाई और हिन्दी की सेवा का लक्ष्य था। हिन्दी भवन ने हमारी संस्कृति, कविता और हिन्दी साहित्य को मंच दिया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र पटेल ने कहा कि यह हिन्दी भवन का निर्माण अपनी भाषा और संस्कृति के प्रतीक के तौर पर किया गया था। उन्होंने चित्र कला प्रतियोगिता का जिक्र करते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चे अपने चित्रों के जरिए अपनी भावनाएं अभिव्यक्त करते हैं। चित्रों को देख कर लगता है कि उनमें गहरी संवेदना है। साहित्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने रामेश्वर प्रसाद सिंह के स्वतंत्रता संग्राम, समय के माध्यम से पत्रकारिता एवं सामाजिक क्षेत्र में किए गए योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अनुकरणीय बताया। डा. पीसी विश्वकर्मा ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। हिन्दी भवन के अध्यक्ष अजय कुमार, हिन्दी साहित्य सम्मेलन के जनार्दन प्रसाद अष्ठाना, ओमप्रकाश मिश्र, राजेश पांडेय, रामजीत मिश्र, अरविन्द उपाध्याय, डा. प्रतीक मिश्र, संजय सेठ, अखिलेश, रामराज गौतम, शमशीर हसन मौजूद रहे। संचालन हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री डा. अजय विक्रम सिंह ने किया।
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