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सावन के पहले दिन मंदिरों में श्रद्घालुओं का लगा तांता

Updated Sun, 29 Jul 2018 12:26 AM IST
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जौनपुर। सावन के पहले दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। खासकर शहर के मैहर मंदिर, नव दुर्गा शिव मंदिर, त्रिलोचन महादेव, गौरी शंकर धाम, साईं नाथ धाम, करसूल नाथ, दियावां महादेव में श्रद्घालुओं की भीड़ लगी रही। डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी और एसपी दिनेश पाल सिंह ने त्रिलोचन महादेव मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और दर्शन पूजन आरती की।
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जलालपुर क्षेत्र के त्रिलोचन महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हजारों कांवरियों व शिवभक्तों ने मंदिर में जलाभिषेक किया। डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी और एसपी दिनेश पाल सिंह ने भी दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में सुरक्षा प्रबंध का जायजा लिया। मंदिर के महंत ओंकार गिरी, व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनुराग वर्मा से बंदोबस्त के बारे में बात की। मंदिर के पास के तालाब को सुंदरीकरण का आश्वासन दिया। कहा मंदिर परिसर के बाहर चारों तरफ कूड़ेदान का बंदोबस्त किया जाए और पालिथीन पर रोक लगाई जाएगी। मंदिर प्रबंधक मुरलीधर गिरी से कहा कि दुकानें नियत स्थान पर लगें। साथ ही पुलिस बल की तैनाती करने को कहा। कांवरियों एवं भक्तों को मंदिर में आने व जाने का मार्ग अलग-अलग हो। ध्यान रहे कि किसी द्वार पर भीड़ एकत्र न हो। मंदिर के 200 मीटर पहले बैरीकेडिंग लागने को कहा।

बक्शा क्षेत्र के साईं नाथ मंदिर पर शनिवार को जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ रही। सुबह चार बजे कपाट खुलते ही भक्तों की लाइन लग गई। हर-हर महादेव के उद्घोष एवं घंटे घड़ियाल के बीच लोगों ने जलाभिषेक किया। महिलाओं की भी भारी भीड़ रही। जलाभिषेक के दौरान भक्त भगवान शिव को फूल, माला, भांग, धतूरा तथा दूध चढ़ाए। इस दौरान पुलिस के जवानों के अलावा मंदिर प्रबंधक माला शुक्ला, पुजारी भोलानाथ शुक्ल, शोभनाथ यादव आदि लगे रहे। सिरकोनी के कबूलपुर क्षेत्र के बाल कांवरिया संघ का जत्था जलाभिषेक करने के लिए त्रिलोचन महादेव के लिए रवाना हुए। बाल कांवरिया संघ के लोगों ने घर पर पूजा पाठ करके आदि गंगा गोमती में स्नान कर पहले बाबा जोगीवीर पर जलाभिषेक किया और पुन: गोमती से जल भरकर त्रिलोचन महादेव में जलाभिषेक के लिए रवाना हुए। इस मौके पर पप्पू बंगाली, शक्ति नागर, बच्चा, शानू आदि मौजूद रहे।
बरईपार क्षेत्र के चक घसीटा नाथ मंदिर पर सुबह से ही जलाभिषेक करने वालों का तांता लगा रहा। सावन के पवित्र महीने में पहले दिन ही लोगों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और मंगलमय कामना किया। लोगों का कहना है कि सावन महीने पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से बहुत सारे दुखों का नाश हो जाएगा। पानी निकासी की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर में सफाई की गई। बदलापुर क्षेत्र के गौरीशंकर धाम चंदापुर, रामजानकी शिव मंदिर सरोखनपुर, संत भंगड़दास मंदिर बरौली, चौरेश्वरनाथ छंगापुर, गौरीशंकर मंदिर पुरानी बाजार, पंचधाम मंदिर आदि शिव मंदिरों पर शनिवार को जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मंदिर का कपाट खुलते ही भक्तों की लाइन लग गई। हर-हर महादेव के उद्घोष एवं घंटे घड़ियाल के बीच लोगों ने जलाभिषेक शुरू किया। महिलाओं की भारी भीड़ रही। जलाभिषेक के दौरान भक्तों ने भगवान शिव को फूल, माला, धतूरा, दूध से स्नान कराया। पुरानी बाजार स्थित गौरीशंकर मंदिर पर महिलाओं ने भगवान शिव को खुश करने के लिए शिव गीत प्रस्तुत कर लोगों को भाव विभोर कर दिया। गीत प्रस्तुत करने वालों में सुप्रिया राय, अनुराधा शर्मा, पंकज पांडेय, माधुरी, विद्यावती, गायत्री आदि रहे। उधर उसरा बाजार स्थित सुखबटोर धाम मंदिर पर शनिवार को सावन के प्रथम दिन से अनवरत सावन के समापन तक हरिकीर्तन का शुभारंभ किया गया। विधि विधान से शुरू हरिकीर्तन का शुभारंभ स्वामी ध्यानी गिरि महराज के श्रीमुख से हुआ। महराज ने बताया कि हरिकीर्तन के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। इस मौके पर पीएन शुक्ल, डा. दयाराम, सीताराम, महेंद्र यादव, रामपाल आदि मौजूद रहे।


बरईपार/धर्मापुर। क्षेत्र के सोनहिता बाजार से 50 कांवरियों का जत्था बाबा धाम दर्शन और जलाभिषेक करने के लिए रवाना हुए। गाजे बाजे के साथ कांवरिया नाचते हुए दारुनपुर तिराहा पर पहुंचे जहां से वह बाबा धाम के लिए रवाना हुए। गाजे बाजे के साथ यात्रा निकाली गई। लोगों का मानना है कि बाबा धाम में जलाभिषेक करने के बाद उनकी सारी मनोकामना पूर्ण होगी। यह सात दिवसी य यात्रा बाबा धाम होते हुए बासकीनाथ, चित्रकूट, मैहर, काशी विश्वनाथ को जलाभिषेक करने के बाद वापस आएंगे। कांवरियों में अजय कुमार शुक्ला, पप्पू यादव, राकेश यादव, रमेश, मनीष, मगन, पप्पू तिवारी, अनिल तिवारी, विनय कुमार शुक्ला, पल्लू यादव, ताड़ी यादव आदि रहे। उधर धर्मापुर क्षेत्र में सावन के पहले ही दिन श्रद्धालु भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए काफी संख्या में बाबा धाम के लिए रवाना हुए। उनके जोश एवं उत्साह को देख लोगों को उनके नृत्य को सराहा। सरेमु, हनुआ डीह, चक पीड़वा आदि से करीब 70 कावरियों का जत्था रवाना हुआ।



मुफ्तीगंज। बाबाधाम जलाभिषेक करने के लिए मुफतीगंज ब्लाक के सरेमु , हनुआडीह, चक व पीड़वा आदि गावां से 70 कावरियों का एक जत्था शनिवार को रवाना हुआ। इस दौरान कावरियों द्वारा बोल बम बोल बम के जयकारे से पूर वातारण भक्तिमय हो गया था। उधर, बरईपार क्षेत्र के सोनहिता बाजार से 50 कांवरियों का जत्था बाबा धाम दर्शन और जलाभिषेक करने के लिए रवाना हो गया। गाजेबाजे के साथ कांवरिया नाचते हुए दारुनपुर तिराहा पर पहुंचे जहां से ग्रामीणों ने उन्हें विदा किया। गाजे बाजे के साथ यात्रा निकाली गई। बाबा धाम में जलाभिषेक करने के बाद उनकी सारी मनोकामना पूर्ण होगी। सात दिवसीय यात्रा बाबा धाम होते हुए बासकीनाथ, चित्रकूट, मैहर ,काशी विश्वनाथ को जलाभिषेक करने के बाद वापस आएंगे। कांवरियों में मुख्य रूप से अजय कुमार शुक्ला, पप्पू यादव, राकेश यादव, रमेश, मनीष, मगन, पप्पू तिवारी, अनिल तिवारी, विनय कुमार शुक्ला, पल्लू यादव, ताड़ी यादव आदि शामिल थे।



जलालपुर। त्रिलोचन महादेव मंदिर अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर का शिवलिंग स्वयंभीू है। मंदिर के सामने पूरब दिशा में ऐतिहासिक कुंड है, जिसमें हमेशा जल रहता है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से बुखार और चर्म रोगों से छुटकारा मिल जाता है। जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर वाराणसी मार्ग पर स्थित शिवालय तक पहुंचने के लिए साधनों की कमी नहीं है। लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग के किनारे होने के कारण आवागमन की पर्याप्त सुविधा है। रोडवेज बस और प्राइवेट वाहन दिन भर चलते हैं।
त्रिलोचन का प्राचीन व ऐतिहासिक शिव मंदिर अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को समेटे हुए है। हालांकि कोई यह नहीं बता पाता है कि इस स्थान का नाम त्रिलोचन क्यों पड़ा है। िं किंतु यहां के पुजारियों का कहना है कि तीसरी नेत्र खोलकर बाबा भोले शंकर ने यहीं पर भस्मासुर को भस्म किया था। यहां शिवलिंग नहीं है। अपितु उस पर पूरा चेहरा, आंख, मुंह, नाक आदि बना हुआ है। आज भी अर्घ में कपूर जलाने के बाद स्पस्ट तौर पर देखा जा सकता है। इस प्राचीन शिव मंदिर में शिवििलिंग स्पष्ट रूप से उत्तर दिशा में पीछे झुका है। बताते हैं कि किसी जमाने में रेहटी और लहंगपुर समीपवर्ती दो गांवों के लोगों में विवाद हुआ था कि यह शिव मंदिर किस गांव की सरहद में है। पंचायतों से फैसला नहीं हुआ तो दोनों गांव के लोगों ने मंदिर का मुख्य गेट बंद कर दिया। फिर जब वह खुला तो लोगों की आंखें आश्चर्य से फटी रह गई। शिवििलिंग उत्तर दिशा में रेहटी गांव की तरफ स्पष्ट रूप से झुका हुआ था। तब से यह मंदिर उसी गांव में माना जाता है। त्रिलोचन महादेव मंदिर में श्रावण के महीने में लाखों की संख्या में कांवरिया व श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में फोर्स की ब्यवस्था की गई है। पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही है। मंदिर व धर्मशाला के साफ-सफाई का कार्य चल जोर-शोर से चल रहा है। स्रावण मास में जलाभिषेख के लिए मंदिर की साफ-सफाई व पूजन आरती के बाद मन्दिर का कपाट भोर में तीन बजे से कावरियां व भक्तों के लिए कपाट खोल दिए जाएंगे। मंदिर में दर्शनार्थियों को भोलेनाथ का दर्शन व जलाभिषेक कराने की प्रशासन व मंदिर के ब्यवस्थापक के द्वारा जोरो पर तैयारी चल रही है। मन्दिर कमेटी के लोगों ने श्रद्धालुओं से अपील है कि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कतार में लगकर जलाभिषेक व दर्शन-पूजन करें।
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