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सजदे में नमाजी को तलवार लगाई है
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:35 AM IST
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जौनपुर। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के दामाद मौला हजरत अली की शहादत के मौके पर जनपद के विभिन्न इलाकों में शबीहे ताबूत व अलम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान रोजेदारों द्वारा मौला अली की याद में नौहा मातम करते हुए पुरसा दिया। हर तरफ बस यही नौहा सुनाई पड़ रहा था, ‘एक शोर था मस्जिद में खालिद की दुहाई है, सजदे में नमाजी को तलवार लगाई है...।’
शाही किला स्थित मद्दू के इमामबाड़े में अंजुमन हुसैनिया के नेतृत्व में हुई मजलिस को मौलाना कैसर अब्बास आजमगढ़ ने खिताब किया। मजलिस के बाद तुर्बत का जुलूस निकाला गया जो शाही किला होते हुए नगर के चहारसू चौराहे पहुंचा जहां मास्टर मोहम्मद हसन नसीम ने तकरीर किया। यहां अलम व तुर्बत का जुलूस का मिलन हुआ जिसे देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलक उठे। नगर के मोहल्ला अजमेरी की मस्जिद शाह अता हुसैन व बलुआघाट में मजलिसे आयोजित हुई जिसके बाद शबीहे ताबूत व अलम बरामद हुआ। शाम करीब पांच बजे दोनों जुलूस नगर के चहारसू चौराहे पर पहुंचे जहां अलम को तुरबत से मिलाया गया और दोनों जुलूस एक साथ शाह पंजा स्थित कदम रसूल के लिए रवाना हुआ। जहां बाद नमाज मगरिब नौहा शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना महफुजुल हसन खां ने अदा कराई। इसके पूर्व अजमेरी मोहल्ला में मजलिस को मौलाना सैय्यद सफदर हुसैन जैदी सरबराह जामिया जाफरे सादिक ने संबोधित करते हुए कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं के प्रति समर्पित था। हजरत अली ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। नवाब युसुफ रोड पर एक तकरीर की गई जिसे मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने संबोधित किया। चहारसू पर मुहम्मद हसन ने तकरीर करते हुए कहा कि हजरत अली ने ऐसी न्याय व्यवस्था अपने शासनकाल में बनायी जो आज भी मिसाल के तौर पर प्रस्तुत की जाती है। जुलूस चहारसू मातमी अंजुमनों के हमराह ओलंदगंज, शाहीपुल से अपने कदीम रास्ते से होते हुए पंजे शरीफ दरगाह तक गया जहां पर जुलूस की समाप्ति नमाजे मगरबैन को बजमात अदा करने से हुई। जुलूस में अंजुमन हुसैनिया के सदर डा. जौहर अली खां, फैसल हसन तबरेज, इसरार हुसैन एडवोकेट, मेंहदी रजा एडवोकेट, जहीर हसन, तहसीन शाहिद, मुन्ना अकेला शहजादे अली मंजर डेजी, वसीम हैदर, हाजी असगर हुसैन जैदी, असलम नकवी, रिजवान हैदर राजा, शाहिद मेंहदी, रूमी आब्दी, हसन जाहिद खां बाबू, अनवार आब्दी एवं इत्यादि उपस्थित थे। जुलूस का संचालन मेंहदी रजा एडवोकेट ने किया।
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शाही किला स्थित मद्दू के इमामबाड़े में अंजुमन हुसैनिया के नेतृत्व में हुई मजलिस को मौलाना कैसर अब्बास आजमगढ़ ने खिताब किया। मजलिस के बाद तुर्बत का जुलूस निकाला गया जो शाही किला होते हुए नगर के चहारसू चौराहे पहुंचा जहां मास्टर मोहम्मद हसन नसीम ने तकरीर किया। यहां अलम व तुर्बत का जुलूस का मिलन हुआ जिसे देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलक उठे। नगर के मोहल्ला अजमेरी की मस्जिद शाह अता हुसैन व बलुआघाट में मजलिसे आयोजित हुई जिसके बाद शबीहे ताबूत व अलम बरामद हुआ। शाम करीब पांच बजे दोनों जुलूस नगर के चहारसू चौराहे पर पहुंचे जहां अलम को तुरबत से मिलाया गया और दोनों जुलूस एक साथ शाह पंजा स्थित कदम रसूल के लिए रवाना हुआ। जहां बाद नमाज मगरिब नौहा शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना महफुजुल हसन खां ने अदा कराई। इसके पूर्व अजमेरी मोहल्ला में मजलिस को मौलाना सैय्यद सफदर हुसैन जैदी सरबराह जामिया जाफरे सादिक ने संबोधित करते हुए कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं के प्रति समर्पित था। हजरत अली ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। नवाब युसुफ रोड पर एक तकरीर की गई जिसे मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने संबोधित किया। चहारसू पर मुहम्मद हसन ने तकरीर करते हुए कहा कि हजरत अली ने ऐसी न्याय व्यवस्था अपने शासनकाल में बनायी जो आज भी मिसाल के तौर पर प्रस्तुत की जाती है। जुलूस चहारसू मातमी अंजुमनों के हमराह ओलंदगंज, शाहीपुल से अपने कदीम रास्ते से होते हुए पंजे शरीफ दरगाह तक गया जहां पर जुलूस की समाप्ति नमाजे मगरबैन को बजमात अदा करने से हुई। जुलूस में अंजुमन हुसैनिया के सदर डा. जौहर अली खां, फैसल हसन तबरेज, इसरार हुसैन एडवोकेट, मेंहदी रजा एडवोकेट, जहीर हसन, तहसीन शाहिद, मुन्ना अकेला शहजादे अली मंजर डेजी, वसीम हैदर, हाजी असगर हुसैन जैदी, असलम नकवी, रिजवान हैदर राजा, शाहिद मेंहदी, रूमी आब्दी, हसन जाहिद खां बाबू, अनवार आब्दी एवं इत्यादि उपस्थित थे। जुलूस का संचालन मेंहदी रजा एडवोकेट ने किया।
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