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कूड़े से पटी नालियां, नहीं हो रही सफाई
Updated Fri, 25 May 2018 12:12 AM IST
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जौनपुर। मानसून सिर पर है लेकिन नगर पालिका प्रशासन बारिश से निपटने के लिए अभी तक कोई तैयारी नहीं किया है। नगर के सभी बड़े नालों के साथ नालियां भी जाम हो गई है। सफाई का कोरम पूरा किया जा रहा है। नाली और नालों के सफाई न होने से हल्की बारिश में भी शहर के कई इलाके पानी से डूब जाते हैं। नगर पालिका परिषद तकरीबन 12 करोड़ रूपए खर्च करने का बजट में प्रस्ताव पास किया था। ऐसे में लगता है कि साफ सफाई के नाम पर हर साल लाखों की खेल हो रही है।
शहर के 39 वार्डों में तकरीबन 100 से अधिक नाले और नालियां हैं। जिसमें दो एक को छोड़ दिया जाए तो सभी नाले और नालियां कूड़े से पट गए हैं। इसके लिए लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है। अपना कूड़ा लोग सामने के नाले नाली में फेंक देते हैं। जबकि थोड़ी दूर कूड़ेदान रखा गया है और नगर पालिका की गाड़ियां भी कूड़ा उठाने कभी कभार आ ही जाती है। बावजूद इसके सभी नालों को कूड़े से पाट दिया गया है। जून से बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। बावजूद इसके नालों की सफाई का काम अभी तेजी से शुरू नहीं हो सका है। जिसकी वजह से अगर हल्की बारिश भी हुई तो नाले उफान पर आ जाएंगे और मोहल्लों में पानी गंदगी भरा पसर जाएगा जिससे कई तरह की बीमारियां भी पैदा हो सकती है।
भैसासुर नाले की 10 साल से नहीं हुई सफाई
जौनपुर। शहर का महत्वपूर्ण नाला भैसासुर नाला है। यह नाला वाजिदपुर चौराहे से निकलकर जेसीज होते गोमती नदी में गिरता है। मजे की बात है कि नाले के ऊपर होटल, शोरूम, लोगों की बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो गई है। नाले का पूरा अस्तित्व लोगों ने मिटा दिया है। बारिश के मौसम में 5 से 6 मोहल्ले इसकी वजह से पानी में डूब जाते हैं। 10 साल में कई ईओ आए और गए किसी ने इसकी सफाई कराने का जहमत नहीं उठाया। सबको अपनी कुर्सी का भय सताता है। वर्तमान ईओ कृष्ण चंद ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद नाले की पैमाइश शुरू कराई लेकिन कुर्सी गवां देने के भय से वह भी चुप बैठ गए। उनके विभाग के कुछ अधिकारियों व मंत्रियों का दबाव पड़ा तो वह चुप्पी मारकर बैठ गए।
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सफाई नालों की शकरमंडी से शुरू करा दी गई है। बड़े नाले को जेसीबी से और छोटे नालों को सफाई कर्मचारियों से साफ कराया जाएगा। भैसासुर नाले पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसकी वजह से इसकी सफाई नहीं हो पा रही है।
कृष्ण चंद्र
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद, जौनपुर
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शहर के 39 वार्डों में तकरीबन 100 से अधिक नाले और नालियां हैं। जिसमें दो एक को छोड़ दिया जाए तो सभी नाले और नालियां कूड़े से पट गए हैं। इसके लिए लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है। अपना कूड़ा लोग सामने के नाले नाली में फेंक देते हैं। जबकि थोड़ी दूर कूड़ेदान रखा गया है और नगर पालिका की गाड़ियां भी कूड़ा उठाने कभी कभार आ ही जाती है। बावजूद इसके सभी नालों को कूड़े से पाट दिया गया है। जून से बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। बावजूद इसके नालों की सफाई का काम अभी तेजी से शुरू नहीं हो सका है। जिसकी वजह से अगर हल्की बारिश भी हुई तो नाले उफान पर आ जाएंगे और मोहल्लों में पानी गंदगी भरा पसर जाएगा जिससे कई तरह की बीमारियां भी पैदा हो सकती है।
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भैसासुर नाले की 10 साल से नहीं हुई सफाई
जौनपुर। शहर का महत्वपूर्ण नाला भैसासुर नाला है। यह नाला वाजिदपुर चौराहे से निकलकर जेसीज होते गोमती नदी में गिरता है। मजे की बात है कि नाले के ऊपर होटल, शोरूम, लोगों की बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो गई है। नाले का पूरा अस्तित्व लोगों ने मिटा दिया है। बारिश के मौसम में 5 से 6 मोहल्ले इसकी वजह से पानी में डूब जाते हैं। 10 साल में कई ईओ आए और गए किसी ने इसकी सफाई कराने का जहमत नहीं उठाया। सबको अपनी कुर्सी का भय सताता है। वर्तमान ईओ कृष्ण चंद ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद नाले की पैमाइश शुरू कराई लेकिन कुर्सी गवां देने के भय से वह भी चुप बैठ गए। उनके विभाग के कुछ अधिकारियों व मंत्रियों का दबाव पड़ा तो वह चुप्पी मारकर बैठ गए।
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सफाई नालों की शकरमंडी से शुरू करा दी गई है। बड़े नाले को जेसीबी से और छोटे नालों को सफाई कर्मचारियों से साफ कराया जाएगा। भैसासुर नाले पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसकी वजह से इसकी सफाई नहीं हो पा रही है।
कृष्ण चंद्र
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद, जौनपुर