{"_id":"5af0a2c14f1c1b5c098b8a56","slug":"152571974312-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राम बचन ने छोटी उम्र में किताब छोड़, पौधों को बनाया दोस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राम बचन ने छोटी उम्र में किताब छोड़, पौधों को बनाया दोस्त
Updated Tue, 08 May 2018 12:40 AM IST
विज्ञापन
तराशा हुआ दरख्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जाफराबाद। पर्यावरण संरक्षण का पैगाम देने के लिए रामबचन बिंद ने जिस बगिया को सजाना शुरू किया था वह आज उनकी पहचान बन चुकी है। उन्होंने एक दशक में पांच हजार से अधिक पौधों को पाल कर दरख्त बनाया और उसे संवार कर सुंदर रूप दिया है। उनकी बगिया को देखने विदेशी भी आ चुके हैं।
जफराबाद क्षेत्र के इमलो गांव निवासी रामबचन को दस साल की उम्र में ही पेड़-पौधों से लगाव हो गया था। तब वह कक्षा आठ में पढ़ रहे थे। वह अपनी रुचि के कारण पेड़ पौधों पर शोध करते रहे। बगिया को सुंदर रूप दिया। अब वह नर्सरी तैयार कर प्रकृति प्रेमियों को मुफ्त में पौधे भी मुहैया कराते हैं। वह क्षेत्र समोपुर ,गोसाईपुर ,कलंदरपुर, विशेश्वरपुर ,महमदपुर, कादीपुर उत्तर गांव, रत्तीपुर सहित तमाम गांव में आम, नीम, बरगद, पीपल, आदित्य हजारों पेड़ लगवा चुके हैं। उनके अनुभव का लाभ लेने वालों की संख्या रोज बढ़ती जा रही है।
राम वचन ने 18 विस्वा जमीन में बगिया को सजाई है। अमेरिका में रह रहे इसी गांव के क्षितिज मौर्या ने बगिया की सुंदरता के चित्र अपने अमेरिकी मित्र माइक जार्डन, टेरेन, डैन व जोंस को दिखाया तो वे खुद को रोक न सके। जब भारत आए तो उन्होंने बगिया देखी। रामबचन के बागीचे में एक किलो तक के अमरूद, आम की 70 प्रजातियां, रुद्राक्ष, सिंदूर, किन्नू, चीकू ,जावित्री, दालचीनी ,लोहबान ,कपूर तमाम औषधि पौधे लहलहा रहे हैं। उन्होंने पौधों के तराश कर देवी-देवताओं की आकृति भी दे रखी है। उनके सुंदर तरीके से तराशे पौधों को देखकर कोई भी चकित रह जाता है। रामबचन को शिकायत है कि प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। यह अलग बात है कि सामाजिक संगठनों ने उनके इस काम की न सिर्फ सराहना की बल्कि सम्मानित भी किया।
जफराबाद क्षेत्र के इमलो गांव निवासी रामबचन को दस साल की उम्र में ही पेड़-पौधों से लगाव हो गया था। तब वह कक्षा आठ में पढ़ रहे थे। वह अपनी रुचि के कारण पेड़ पौधों पर शोध करते रहे। बगिया को सुंदर रूप दिया। अब वह नर्सरी तैयार कर प्रकृति प्रेमियों को मुफ्त में पौधे भी मुहैया कराते हैं। वह क्षेत्र समोपुर ,गोसाईपुर ,कलंदरपुर, विशेश्वरपुर ,महमदपुर, कादीपुर उत्तर गांव, रत्तीपुर सहित तमाम गांव में आम, नीम, बरगद, पीपल, आदित्य हजारों पेड़ लगवा चुके हैं। उनके अनुभव का लाभ लेने वालों की संख्या रोज बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
राम वचन ने 18 विस्वा जमीन में बगिया को सजाई है। अमेरिका में रह रहे इसी गांव के क्षितिज मौर्या ने बगिया की सुंदरता के चित्र अपने अमेरिकी मित्र माइक जार्डन, टेरेन, डैन व जोंस को दिखाया तो वे खुद को रोक न सके। जब भारत आए तो उन्होंने बगिया देखी। रामबचन के बागीचे में एक किलो तक के अमरूद, आम की 70 प्रजातियां, रुद्राक्ष, सिंदूर, किन्नू, चीकू ,जावित्री, दालचीनी ,लोहबान ,कपूर तमाम औषधि पौधे लहलहा रहे हैं। उन्होंने पौधों के तराश कर देवी-देवताओं की आकृति भी दे रखी है। उनके सुंदर तरीके से तराशे पौधों को देखकर कोई भी चकित रह जाता है। रामबचन को शिकायत है कि प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। यह अलग बात है कि सामाजिक संगठनों ने उनके इस काम की न सिर्फ सराहना की बल्कि सम्मानित भी किया।
विज्ञापन