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मानव के लिए मंगलकारी है भक्ति
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:04 AM IST
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सतहरिया। शांतिकुंज हरिद्वार से आए संत संतोष महाराज ने कहा कि मानव शरीर पंचवटी है। इसमें वैराग्य, ज्ञान व भक्ति निहित है। इसमें से वैराग्य व ज्ञान निकल जाने से भक्ति अबला बनकर सुसुप्ता अवस्था में पहुंच जाती है। यह दुखदायी तथा अमंगलकारी है। भक्ति के जागृत होने पर ही मानव का कल्याण हो सकता है। वह मुंगराबादशाहपुर के मां गायत्री शक्तिपीठ में प्रज्ञा पुराण कथा के दूसरे दिन बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ज्ञान, लक्ष्मण वैराग्य तथा मां सीता भक्ति का स्वरूप हैं। इनके एक साथ रहने से ही मानव कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि आज का प्राणी कितना लोभी हो चुका है। जब वह पूजा घरों में जाता है तो वह सिर्फ अपने स्वार्थ की मांग करता है। भगवान को नहीं मांगता है। यही वजह है कि उसके आंखों से अंधकार व अज्ञानता का पर्दा नहीं उठ पा रहा है। जो दूसरों के लिए जीता व मरता है वह महामानव बन जाता है। जो प्राणी कामनाओं पर अंकुश लगाने में सफल हो जाता है वही सुखी जीवन का भागीदार बनता है। संचालन शक्ति पीठ के आचार्य गुलाब ने किया।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ज्ञान, लक्ष्मण वैराग्य तथा मां सीता भक्ति का स्वरूप हैं। इनके एक साथ रहने से ही मानव कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि आज का प्राणी कितना लोभी हो चुका है। जब वह पूजा घरों में जाता है तो वह सिर्फ अपने स्वार्थ की मांग करता है। भगवान को नहीं मांगता है। यही वजह है कि उसके आंखों से अंधकार व अज्ञानता का पर्दा नहीं उठ पा रहा है। जो दूसरों के लिए जीता व मरता है वह महामानव बन जाता है। जो प्राणी कामनाओं पर अंकुश लगाने में सफल हो जाता है वही सुखी जीवन का भागीदार बनता है। संचालन शक्ति पीठ के आचार्य गुलाब ने किया।
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