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प्रभावी संचार के लिए सृजनात्मकता जरूरी
Updated Sun, 04 Feb 2018 12:28 AM IST
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जौनपुर। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन के संकायाध्यक्ष प्रो. परवेज तालीब ने कहा कि संचार तभी प्रभावी होता जब उसमें सृजनात्मकता हो। बोलते और लिखते समय उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए जिसका भाव हम समझते हों। हमें श्रोता का ध्यान रखना चाहिए। वह शनिवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंध विभाग और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से आयोजित नेतृत्व कार्यशाला के अंतिम दिन बोल रहे थे।
उन्होंने प्रभावी संप्रेषण के लिए टिप्स दिए। लेखन क्षमता की वृद्धि के लिए काउंसलिंग सत्र का आयोजन हुआ। अंतिम सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों को साझा किया। प्रो. रंजना प्रकाश ने कहा कि शिक्षकों के व्यवहार में नम्रता होनी चाहिए क्योंकि विद्यार्थी अपने शिक्षकों से ही सीख लेते है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. हरि प्रकाश ने अपने विचार व्यक्त किए। समन्वयक मुराद अली ने चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अजय द्विवेदी , प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, डा. विनोद सिंह, प्रो. बन्दना राय, डा. प्रदीप कुमार, डा. पुष्पा सिंह, डा. नूपुर तिवारी, डा. संजीव गंगवार, डा. सौरभ पाल, डा. रसिकेश, डा. संतोष कुमार,डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुशील सिंह आदि मौजूद रहे।
उन्होंने प्रभावी संप्रेषण के लिए टिप्स दिए। लेखन क्षमता की वृद्धि के लिए काउंसलिंग सत्र का आयोजन हुआ। अंतिम सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों को साझा किया। प्रो. रंजना प्रकाश ने कहा कि शिक्षकों के व्यवहार में नम्रता होनी चाहिए क्योंकि विद्यार्थी अपने शिक्षकों से ही सीख लेते है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. हरि प्रकाश ने अपने विचार व्यक्त किए। समन्वयक मुराद अली ने चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अजय द्विवेदी , प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, डा. विनोद सिंह, प्रो. बन्दना राय, डा. प्रदीप कुमार, डा. पुष्पा सिंह, डा. नूपुर तिवारी, डा. संजीव गंगवार, डा. सौरभ पाल, डा. रसिकेश, डा. संतोष कुमार,डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुशील सिंह आदि मौजूद रहे।
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