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महिला अस्पताल में नहीं हो रहा गरीबों का इलाज
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:53 AM IST
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जौनपुर। जिला महिला चिकित्सालय की बदहाल है। यहां बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की तो कमी है ही, चिकित्सकों और कर्मचारियों की मनमानी के चलते मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। उत्तर प्रदेश विधान मंडल की महिला एवं बाल विकास संबंधी संयुक्त समिति के सामने तो अस्पताल में प्रसव के लिए पैसे लेने का मामला भी उजागर हुआ। इस पर समिति ने एक नर्स के निलंबन की संस्तुति तक की।
विधायी समिति ने सोमवार को प्रसव के लिए पैसे मांगने के आरोप में एक नर्स के निलंबन की संस्तुति की। उसी रात केराकत के सर्की गांव की अंतिमा यादव प्रसव पीड़ा से छटपटाती रहीं लेकिन नर्स उसे नजरअंदाज करती रही। मारे दर्द के वह बेड से उठकर बरामदे में पहुंचीं और फर्श पर ही बच्चे को जन्म दिया। उनके ससुर लालता प्रसाद यादव ने सीएमओ से इसकी शिकायत की। महिला अस्पताल में ज्यादातर मरीजों के साथ ऐसा ही सलूक होता है। इसका नतीजा है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार घट रही है। अस्पताल में 11 जनवरी को 25 महिलाएं भर्ती थीं जो 15 जनवरी को घटकर 10 तक पहुंच गई और 17 जनवरी को केवल सात महिलाएं अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारों का कहना है कि आशाएं अस्पताल में प्रसव के लिए महिलाओं को लाती हैं और उनसे एक से ढाई हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में बिना पैसे के इलाज संभव नहीं हैं। प्रसव से लेकर आपरेशन तक का रेट बंधा हुआ है। एक मरीजों ने बताया कि उन्हें भोजन और दूध भी कभी-कभार मिलता है।
संसाधनों का अभाव अलग से है। चिकित्सालय में 21 चिकित्सकों का पद है लेकिन पांच ही डाक्टर तैनात हैं। ऐसे में समय से अस्पताल में चिकित्सक ही नहीं मिलती हैं। नर्स और दाइयां मनमानी करती रहती हैं। ओपीडी में भी एक या दो महिला चिकित्सक ही बैठती हैं। यहां नर्सों की संख्या भी कम है। 17 की तुलना में 13 ही नर्स यहां तैनात हैं।
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सुविधा शुल्क लेने की बात सही नहीं है। अगर कोई नर्स या स्टाफ पैसा ले वरहा है तो मरीजों को लिखित देना चाहिए। जहां तक सफाई की बात है स्थान के अभाव में कबाड़ वार्ड में रख दिया गया है। इसे हटा दिया जाएगा। डाक्टरों की कमी को लेकर शासन को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन कोई इंतजाम नहीं हुआ। -डा. आरएस सरोज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय, जौनपुर
विधायी समिति ने सोमवार को प्रसव के लिए पैसे मांगने के आरोप में एक नर्स के निलंबन की संस्तुति की। उसी रात केराकत के सर्की गांव की अंतिमा यादव प्रसव पीड़ा से छटपटाती रहीं लेकिन नर्स उसे नजरअंदाज करती रही। मारे दर्द के वह बेड से उठकर बरामदे में पहुंचीं और फर्श पर ही बच्चे को जन्म दिया। उनके ससुर लालता प्रसाद यादव ने सीएमओ से इसकी शिकायत की। महिला अस्पताल में ज्यादातर मरीजों के साथ ऐसा ही सलूक होता है। इसका नतीजा है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार घट रही है। अस्पताल में 11 जनवरी को 25 महिलाएं भर्ती थीं जो 15 जनवरी को घटकर 10 तक पहुंच गई और 17 जनवरी को केवल सात महिलाएं अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारों का कहना है कि आशाएं अस्पताल में प्रसव के लिए महिलाओं को लाती हैं और उनसे एक से ढाई हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में बिना पैसे के इलाज संभव नहीं हैं। प्रसव से लेकर आपरेशन तक का रेट बंधा हुआ है। एक मरीजों ने बताया कि उन्हें भोजन और दूध भी कभी-कभार मिलता है।
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संसाधनों का अभाव अलग से है। चिकित्सालय में 21 चिकित्सकों का पद है लेकिन पांच ही डाक्टर तैनात हैं। ऐसे में समय से अस्पताल में चिकित्सक ही नहीं मिलती हैं। नर्स और दाइयां मनमानी करती रहती हैं। ओपीडी में भी एक या दो महिला चिकित्सक ही बैठती हैं। यहां नर्सों की संख्या भी कम है। 17 की तुलना में 13 ही नर्स यहां तैनात हैं।
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सुविधा शुल्क लेने की बात सही नहीं है। अगर कोई नर्स या स्टाफ पैसा ले वरहा है तो मरीजों को लिखित देना चाहिए। जहां तक सफाई की बात है स्थान के अभाव में कबाड़ वार्ड में रख दिया गया है। इसे हटा दिया जाएगा। डाक्टरों की कमी को लेकर शासन को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन कोई इंतजाम नहीं हुआ। -डा. आरएस सरोज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय, जौनपुर