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भक्त की रक्षा के लिए भगवान लेते हैं अवतार
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बरईपार। हिरण्यकश्यप अपने भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेने के लिए ब्रह्मा की तपस्या का निर्णय लिया। वह एक वट के नीचे बैठ गया, जहां देव गुरु वृहस्पति तोता का रूप धारण कर वृक्ष पर बैठ गए और नारायण नाम का रट लगाने लगे। इससे परेशान होकर हिरण्यकश्यप तपस्या छोड़कर घर आ गया। पत्नी ने पूछा कि आप तपस्या छोड़कर क्यों चले आए तो तोता की बात बताई। इसके बाद उसकी पत्नी भी भगवान के नाम का जप किया। जिससे उसका गर्भ ठहर गया और भक्त प्रहलाद के रूप में बालक का जन्म हुआ। उक्त बातें कथावाचक कुमारी रुक्मणी शास्त्री जी ने सिकरारा ब्लॉक के नेवढ़िया बरईपार गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद की कथा का श्रद्घालुओं को रसपान कराते हुए सुनाया।
उन्होंने कहा कि जब प्रह्लाद गुरुकुल से घर आए तो हिरण्यकश्यप ने पूछा कि क्या शिक्षा ग्रहण किए हो। प्रहलाद भगवान का गुणगान करने लगे। इससे हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा और कहा कि तुम मेरे शत्रु का गुणगान कर रहे हो लेकिन प्रहलाद ने भगवान की आराधना नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप प्रह्लाद पर अत्याचार करता रहा लेकिन प्रहलाद को भगवान बचाते रहे। एक दिन हिरण्य कश्यप ने प्रह्लाद से कहा कि तुम्हारे भगवान कहां हैं। प्रह्लाद ने जवाब दिया कि कण-कण में हैं और इस खंभे में भी हैं। इतना सुनते ही हिरण्यकश्यप ने तलवार निकाल कर खंभे पर वार कर दिया। तब नरसिंह के रूप में भगवान प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं। इस प्रकार, भगवान पापी का वधकर भक्तों का मान रखते हैं। इसके पूर्व, मुख्य यजमान कमलेश सोनी ने कथावाचक का माल्यार्पण कर स्वागत किया और पूजन अर्चन कराया। इस मौके पर रत्नेश जायसवाल, लालमणि यादव, अखलेश सोनी, राजेश, सुरेश और कृपाशंकर गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि जब प्रह्लाद गुरुकुल से घर आए तो हिरण्यकश्यप ने पूछा कि क्या शिक्षा ग्रहण किए हो। प्रहलाद भगवान का गुणगान करने लगे। इससे हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा और कहा कि तुम मेरे शत्रु का गुणगान कर रहे हो लेकिन प्रहलाद ने भगवान की आराधना नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप प्रह्लाद पर अत्याचार करता रहा लेकिन प्रहलाद को भगवान बचाते रहे। एक दिन हिरण्य कश्यप ने प्रह्लाद से कहा कि तुम्हारे भगवान कहां हैं। प्रह्लाद ने जवाब दिया कि कण-कण में हैं और इस खंभे में भी हैं। इतना सुनते ही हिरण्यकश्यप ने तलवार निकाल कर खंभे पर वार कर दिया। तब नरसिंह के रूप में भगवान प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं। इस प्रकार, भगवान पापी का वधकर भक्तों का मान रखते हैं। इसके पूर्व, मुख्य यजमान कमलेश सोनी ने कथावाचक का माल्यार्पण कर स्वागत किया और पूजन अर्चन कराया। इस मौके पर रत्नेश जायसवाल, लालमणि यादव, अखलेश सोनी, राजेश, सुरेश और कृपाशंकर गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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