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अब 30 दिन में कराना होगा मस्टररोल का एमआईएस
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:43 AM IST
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जौनपुर। मनरेगा के तहत काम शुरू होने के तीस दिन के अंदर श्रमिकों के मस्टररोल की एमआईएस रिपोर्ट देने को अनिवार्य कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था पंद्रह सितंबर से लागू हो जाएगी। तय समय में एमआईएस नहीं देने पर मस्टलरोल समाप्त हो जाएगा और मस्टररोल की धनराशि संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के वेतन व रोजगार सेवक के मानदेय से वसूल की जाएगी।
गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत जाब कार्ड बनाकर इच्छुक ग्रामीणों को कार्य किया जा रहा है। इस योजना को पारदर्शी बनाने के लिए योजना के तहत मजदूर के किए कार्य का मस्टररोल तैयार किया जाता है। मस्टररोल के हिसाब से ही मजदूरों को काम के अनुसार मजदूरी का भुगतान किया जाता है। अबतक मस्टररोल का एमआईएस कराने के लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं थी। इसके चलते काम के काफी समय बीत जाने के बाद एमआईएस के जरिये पैसा का भुगतान कराया जाता था। इससे मजदूरों की मजदूरी के भुगतान में विलंब होता था। इस समस्या को दूर कर पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मस्टररोल का एमआईएस रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया गया। अब काम होने के तीस दिन के अंदर एमआईएस रिपोर्ट देने को अनिवार्य कर दिया गया है। निर्धारित अवधि में एमआईएस नहीं होने पर मस्टररोल समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में मस्टररोल की धनराशि संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के वेतन व रोजगार सेवक के मानदेय से वसूल की जाएगी। वसूल की गई धनराशि से श्रमिकों को मजदूरी दी जाएगी। प्रभारी श्रमायुक्त श्रम रोजगार कमलेश कुमार सोनी ने बताया कि सरकार ने मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों के मस्टररोल का एमआईएस रिपोर्ट कार्य शुरू होने के 30 दिन के अंदर देने का निर्देश दिया है। श्रमिकों की मजदूरी का समय से भुगतान और योजना को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई गई है। यह व्यवस्था 15 सितंबर से लागू हो जाएगी।
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गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत जाब कार्ड बनाकर इच्छुक ग्रामीणों को कार्य किया जा रहा है। इस योजना को पारदर्शी बनाने के लिए योजना के तहत मजदूर के किए कार्य का मस्टररोल तैयार किया जाता है। मस्टररोल के हिसाब से ही मजदूरों को काम के अनुसार मजदूरी का भुगतान किया जाता है। अबतक मस्टररोल का एमआईएस कराने के लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं थी। इसके चलते काम के काफी समय बीत जाने के बाद एमआईएस के जरिये पैसा का भुगतान कराया जाता था। इससे मजदूरों की मजदूरी के भुगतान में विलंब होता था। इस समस्या को दूर कर पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मस्टररोल का एमआईएस रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया गया। अब काम होने के तीस दिन के अंदर एमआईएस रिपोर्ट देने को अनिवार्य कर दिया गया है। निर्धारित अवधि में एमआईएस नहीं होने पर मस्टररोल समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में मस्टररोल की धनराशि संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के वेतन व रोजगार सेवक के मानदेय से वसूल की जाएगी। वसूल की गई धनराशि से श्रमिकों को मजदूरी दी जाएगी। प्रभारी श्रमायुक्त श्रम रोजगार कमलेश कुमार सोनी ने बताया कि सरकार ने मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों के मस्टररोल का एमआईएस रिपोर्ट कार्य शुरू होने के 30 दिन के अंदर देने का निर्देश दिया है। श्रमिकों की मजदूरी का समय से भुगतान और योजना को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई गई है। यह व्यवस्था 15 सितंबर से लागू हो जाएगी।
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