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हर तालिका तीज पर सुहागिनों ने रखा निर्जला ब्रत

Fri, 25 Aug 2017 12:34 AM IST
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:34 AM IST
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हर तालिका तीज पर सुहागिनों ने रखा निर्जला ब्रत
तीज पूजा करती महिलाएं
जौनपुर। हरतालिका तीज पर गुरुवार को महिलाओं ने निर्जला व्रत धारण कर अखंड सुहाग की कामना की। व्रती महिलाओं ने भोर में ही शिव-पार्वती की पूजा अर्चना की। जबकि कुंवारी कन्याओं ने सुखद भविष्य की कामना से पूजन अर्चन किया। भोर से ही शिवालयों पर महिला श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई थी।
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हरतालिका तीज को लेकर महिलाएं बुधवार को ही मेहंदी लगवा ली थीं और सौंदर्य प्रसाधन की खरीदारी की थी। गुरुवार को सोलह शृंगार कर शुभ मुहूर्त पर सुबह पौने छह बजे से शिवालयों में पहुंचीं और पूजा अर्चना कर कथा सुनी। सिकरारा क्षेत्र के पं. रामशकल उपाध्याय ने बताया कि यह व्रत कुंवारी और सुहागन दोनों रखती हैं। एक कथा के अनुसार मां पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पहुंच कर घोर तप किया। इस दौरान उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया। पार्वती की यह स्थिति देखकर उनके पिता अत्यंत दुखी थे। कई युग बीत गए लेकिन गौरा की तपस्या चलती रही। इसी दौरान एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर मां पार्वती के पिता के पास पहुंचे, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पिता ने जब मां पार्वती को उनके विवाह की बात बताई तो वह बहुत दुखी हो गई और विलाप करने लगी। फिर एक सखी के पूछने पर माता ने उसे बताया कि वह यह कठोर व्रत भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कर रही हैं जबकि उनके पिता उनका विवाह विष्णु से कराना चाहते हैं। तब सहेली की सलाह पर माता पार्वती घने वन में चली गई और वहां एक गुफा में जाकर भगवान शिव की आराधना में लीन हो गईं।
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भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया। तब माता के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया और इच्छानुसार उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। वह तिथि भी तृतीया थी। मान्यता है कि इस दिन जो कुमारी कन्याएं व्रत रखती हैं उन्हें मनोनुकूल पति की प्राप्ति होती है। उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन मेहंदी लगाने और झूला-झूलने की प्रथा है।
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