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कैंडिल जला शहीदों को किया याद
Updated Thu, 10 Aug 2017 12:42 AM IST
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शहीदों को नमन
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बक्शा। स्वतंत्रता आंदोलन में जिले के लोगों का बड़ा योगदान रहा है। 1942 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कई गांवों के नौजवान स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। स्वतंत्रता की अलख जगाते हुए उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग छेड़ कर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। धनियामऊ का पुल तोड़ने पहुंचे सेनानियों पर अंग्रेज सिपाहियों ने फायरिंग की। इस दौरान अंग्रेजों की गोली से चार वीर सपूत शहीद हो गए जबकि कई घायल हो गए थे। इससे क्रुद्ध लोगों ने फायरिंग का आदेश देने वाले एक इंस्पेक्टर पीट-पीट कर घायल किया था जिसकी दो दिन बाद मौत हो गई।
आजादी की लड़ाई में कूदने वाले वीर सपूतों ने 16 अगस्त को बदलापुर थाने को लूटने की योजना बनाई थी। क्रांतिकारियों ने धनियामऊ नाले के पास हाईवे पर बने पुल को तोड़ने की योजना बनाई। इसके लिए आसपास के कई गांवों के लोग जुटकर धनियामऊ पुल को तोड़ना चाहते थे ताकि जिला मुख्यालय का बदलापुर से संपर्क टूट जाए और वहां फोर्स न पहुंच सके। इसके बाद सेनानी थाने को आराम से लूट सकते थे। योजना के तहत 16 अगस्त 1942 की सुबह लोग धनियामऊ पुल के पास एकत्रित हो गए। थाना लूटने की भनक लगते ही बक्शा थाने से अंग्रेज सेना बदलापुर के लिए कूच कर गई। वहां इंस्पेक्टर ने नौजवानों की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया। इसके बाद अंग्रेजी सिपाहियों ने फायरिंग शुरू कर दी। नौजवान भी इंस्पेक्टर पर टूट पड़े। नौजवानों ने इंस्पेक्टर की इतनी पिटाई की कि उसकी दो दिनों बाद मौत हो र्गई। नौजवान गोली का जवाब ईंट पत्थरों से दे रहे थे। इसी दौरान अंग्रेज सेना की गोली से रामअधार, रामपदारथ चौहान, जमीदार सिंह, रामनिहोर कहार शहीद हो गए जबकि रामभरोस का एक हाथ गोली लगने से अलग हो गर्या। गोली लगने से भोला, बबई मिश्र, छत्रपाल सिंह घायल हो गए। इस घटना में जिन-जिन गांवों के नौजवान शामिल थे, अंग्रेजों ने उन गांव पर कहर ढा दिया। अंग्रेजों के जुल्म से लोग गांव छोड़कर जाने लगे। अंग्रेज सेना ने घरों में लूटपाट, आगजनी की। शहीदों की याद में धनियामऊ में स्मारक बना है।
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आजादी की लड़ाई में कूदने वाले वीर सपूतों ने 16 अगस्त को बदलापुर थाने को लूटने की योजना बनाई थी। क्रांतिकारियों ने धनियामऊ नाले के पास हाईवे पर बने पुल को तोड़ने की योजना बनाई। इसके लिए आसपास के कई गांवों के लोग जुटकर धनियामऊ पुल को तोड़ना चाहते थे ताकि जिला मुख्यालय का बदलापुर से संपर्क टूट जाए और वहां फोर्स न पहुंच सके। इसके बाद सेनानी थाने को आराम से लूट सकते थे। योजना के तहत 16 अगस्त 1942 की सुबह लोग धनियामऊ पुल के पास एकत्रित हो गए। थाना लूटने की भनक लगते ही बक्शा थाने से अंग्रेज सेना बदलापुर के लिए कूच कर गई। वहां इंस्पेक्टर ने नौजवानों की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया। इसके बाद अंग्रेजी सिपाहियों ने फायरिंग शुरू कर दी। नौजवान भी इंस्पेक्टर पर टूट पड़े। नौजवानों ने इंस्पेक्टर की इतनी पिटाई की कि उसकी दो दिनों बाद मौत हो र्गई। नौजवान गोली का जवाब ईंट पत्थरों से दे रहे थे। इसी दौरान अंग्रेज सेना की गोली से रामअधार, रामपदारथ चौहान, जमीदार सिंह, रामनिहोर कहार शहीद हो गए जबकि रामभरोस का एक हाथ गोली लगने से अलग हो गर्या। गोली लगने से भोला, बबई मिश्र, छत्रपाल सिंह घायल हो गए। इस घटना में जिन-जिन गांवों के नौजवान शामिल थे, अंग्रेजों ने उन गांव पर कहर ढा दिया। अंग्रेजों के जुल्म से लोग गांव छोड़कर जाने लगे। अंग्रेज सेना ने घरों में लूटपाट, आगजनी की। शहीदों की याद में धनियामऊ में स्मारक बना है।
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