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जिले में 13 प्रतिशत हुई बुआई, खेतों में वह भी सूख रही

Tue, 19 Jul 2022 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 11:33 PM IST
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13 percent sown in the district, it is also drying up in the fields
करंजा कला क्षेत्र के हरिहरपुर गांव में बारिश के अभाव में खेत में पड़ी दरारें। संवाद - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। सावन महीने में भी धूल उड़ रही है। अधिकांश खेत परती पड़े हुए हैं। इस समय 13.05 प्रतिशत खेती जो हुई भी है, वह सूखने की कगार पर है। वहीं, किसान खेतों में पड़ी दरार और सूख रही फसलों को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि इस बार सूखे के कारण बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है।
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हालांकि मौसम विभाग के लोगों के अनुमान से कुछ उम्मीद है, लेकिन फसलों के उत्पादन पर बहुत ज्यादा प्रभाव अभी से ही पड़ गया है। अब तो निजी नलकूपों से सिंचाई करने वाले भी किसान हिम्मत छोड़ दिए हैं। जंगीपुर कला की किसान कैलाश यादव ने बताया कि जब खेतों में पानी की सख्त जरूरत हैं। तब सूखे जैसे हालात हैं। माइनर में पानी न आने से किसानों की चिंता दोगुनी हो गई है। प्रशासन की लापरवाही की तरफ इशारा करते हुए वह कहते हैं कि माइनर और तालाब सूखे पड़े हैं। किसान जिलेदार का कहना है कि बिजली भी परेशान कर रही है। समय से बिजली न मिल पाने के कारण ट्यूबवेल से पानी नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन से माइनर में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ने जाने की मांग की है।
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जनपद में इस साल 226318 हेक्टेयर खेती का लक्ष्य रखा गया है लेकिन अभी तक 29537.065 हेक्टेयर ही खेती की जा सकी है। यानी 13.05 प्रतिशत ही खेती की गई है। मौसम को देखते हुए अधिकांश खेत अभी तक खाली हैं। अब तो सिंचाई न होने पाने के कारण खेतों में दरारें पड़ जा रही है, क्योंकि सिंचाई करने के तीन-चार दिन बाद ही खेत में पानी का असर खत्म हो जा रहा है। ऐसे में अब किसान भी हाथ खड़े कर लिए हैं। जिन इलाकों से नहर गुजरी हैं, वहां के भी किसान परेशान हैं, क्योंकि नहर का भी पानी किसान के काम नहीं आ पा रहा है। वहीं, बरसात न होने के कारण खरीफ फसलों की बोआई में विलंब हो गया है। हरिहरपुर के किसान विशाल यादव का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो खेत में खड़ी नर्सरी सूख जाएगी। कुछ किसानों ने पौधे को सूखने से बचाने के लिए डीजल डालकर इंजन से सिंचाई भी शुरू कर दिए हैं लेकिन तेल के दाम आसमान पर होने से खेती की लागत काफी बढ़ जा रही है। ऐसे में कई किसान इंजन से सिंचाई करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
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डीएसआर विधि से कराई गई धान की नर्सरी की रोपाई
अपर जिला कृषि अधिकारी डा. रमेशचंद्र यादव कहते हैं कि किसान कम अवधि वाली फसल की प्रजातियों की ही इस समय बोआई करें, धान की नर्सरी यदि 25 दिन से अधिक हो गई है तो उसकी रोपाई न करके (डीएसआर) विधि से धान की सीधी बुआई मशीन से कर दें तो कम पानी में कम अवधि में कृषि निवेशों की बचत करते हुए किसान बेहतर उत्पादन ले सकते हैं।
150 रुपए प्रति घंटा हुई सिंचाई
सिंचाई के लिए पानी की बढ़ती मांग को लेकर निजी नलकूप संचालकों ने सिंचाई के दाम भी बढ़ा दिए हैं। पिछले दो माह पहले तक बिजली से चलने वाले नलकूपों से सिंचाई के लिए 100 से 110 रुपये प्रति घंटे तक के लिए जा रहे थे मगर मांग अधिक देखते हुए अब 150 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई की जा रही है। इससे मध्यवर्गीय किसान निजी नलकूपों से चाय भी नहीं करा पा रहा है।

छिटपुट बारिश का भी नहीं मिला लाभ
जौनपुर। आंकड़ों पर नजर डाले तो जून में औसत 87.60 मिलीमीटर बारिश होनी थी लेकिन 17.06 मिलीमीटर ही बरसात हुई। जुलाई में 87.60 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी मगर अब तक महज 10.04 मिलीमीटर वर्षा हुई है। ये बारिश छिटपुट हो रही है, जिसके कारण मिट्टी की ऊपरी परत भी गीली नहीं हो पा रही है। मौसमविद् बताते हैं कि एक दशक से लगातार औसत 865.90 मिलीमीटर से काफी कम वर्षा हो रही है। इस तरह कम बारिश के चलते खेती में लागत अधिक आ रही है। साथ ही दीमक व अन्य कीटों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे किसान चिंतित हैं।
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