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Jalaun News: 25 साल से चार किमी सड़क का इंतजार, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
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फोटो- 31 प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
फोटो- 31 प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
- तहसील पहुंचकर किया प्रदर्शन, बोले- सड़क नहीं बनी तो इस बार नहीं देंगे वोट
- वन भूमि और निजी जमीन के कारण अटका है निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
कालपी। करीब 25 वर्षों से महज चार किलोमीटर पक्की सड़क के इंतजार में बैठे गुलौली क्षेत्र के ग्रामीणों का शनिवार को धैर्य जवाब दे गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण तहसील पहुंचे और सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए। सड़क नहीं बनी तो रोड नहीं तो वोट नहीं का ऐलान किया जाएगा। ग्रामीणों के प्रदर्शन को देखते हुए उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य ने उनकी समस्या उच्चाधिकारियों तक पहुंचाकर समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि कालपी नगर से गुलौली गांव की सीधी दूरी करीब 10 किलोमीटर है, लेकिन पक्के मार्ग के अभाव में उन्हें कालपी पहुंचने के लिए 25 से 30 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। क्षेत्र में गुलौली, सुरौली, हवेली, बगिया, मदरा लालपुर, पाली, मौहारी, मवई समेत कई गांव हैं, जिनके लोगों के लिए बाजार, इलाज, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए कालपी प्रमुख केंद्र है। सड़क न होने से रोजाना ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में रास्ते की हालत और खराब हो जाती है। कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में अतिरिक्त दूरी और खराब रास्ते के कारण दिक्कत होती है। वहीं क्षेत्र में उच्च शिक्षा के पर्याप्त साधन न होने से छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए कालपी आना पड़ता है। ऐसे में सड़क की समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई है।
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2002 में शुरू हुआ था निर्माण, वन विभाग ने रोक दिया काम
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2002 में तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक डॉ. अरुण मेहरोत्रा के प्रयास से रायढ़ दिवारा से गुलौली तक पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया गया था। रायढ़ के आगे वन विभाग की भूमि आने के कारण काम रोक दिया गया। इसके बाद करीब 25 वर्ष बीत गए, लेकिन सड़क पूरी नहीं हो सकी।
पांच करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा
सार्वजनिक निर्माण विभाग के अवर अभियंता अतुल पाल ने बताया कि प्रस्तावित मार्ग में करीब 1463 मीटर वन विभाग की भूमि और लगभग 500 मीटर निजी किसानों की भूमि आ रही है। सड़क निर्माण में करीब पांच करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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- तहसील पहुंचकर किया प्रदर्शन, बोले- सड़क नहीं बनी तो इस बार नहीं देंगे वोट
- वन भूमि और निजी जमीन के कारण अटका है निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
कालपी। करीब 25 वर्षों से महज चार किलोमीटर पक्की सड़क के इंतजार में बैठे गुलौली क्षेत्र के ग्रामीणों का शनिवार को धैर्य जवाब दे गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण तहसील पहुंचे और सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए। सड़क नहीं बनी तो रोड नहीं तो वोट नहीं का ऐलान किया जाएगा। ग्रामीणों के प्रदर्शन को देखते हुए उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य ने उनकी समस्या उच्चाधिकारियों तक पहुंचाकर समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि कालपी नगर से गुलौली गांव की सीधी दूरी करीब 10 किलोमीटर है, लेकिन पक्के मार्ग के अभाव में उन्हें कालपी पहुंचने के लिए 25 से 30 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। क्षेत्र में गुलौली, सुरौली, हवेली, बगिया, मदरा लालपुर, पाली, मौहारी, मवई समेत कई गांव हैं, जिनके लोगों के लिए बाजार, इलाज, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए कालपी प्रमुख केंद्र है। सड़क न होने से रोजाना ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है।
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बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में रास्ते की हालत और खराब हो जाती है। कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में अतिरिक्त दूरी और खराब रास्ते के कारण दिक्कत होती है। वहीं क्षेत्र में उच्च शिक्षा के पर्याप्त साधन न होने से छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए कालपी आना पड़ता है। ऐसे में सड़क की समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई है।
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2002 में शुरू हुआ था निर्माण, वन विभाग ने रोक दिया काम
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2002 में तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक डॉ. अरुण मेहरोत्रा के प्रयास से रायढ़ दिवारा से गुलौली तक पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया गया था। रायढ़ के आगे वन विभाग की भूमि आने के कारण काम रोक दिया गया। इसके बाद करीब 25 वर्ष बीत गए, लेकिन सड़क पूरी नहीं हो सकी।
पांच करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा
सार्वजनिक निर्माण विभाग के अवर अभियंता अतुल पाल ने बताया कि प्रस्तावित मार्ग में करीब 1463 मीटर वन विभाग की भूमि और लगभग 500 मीटर निजी किसानों की भूमि आ रही है। सड़क निर्माण में करीब पांच करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।