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सूदखोरों के दिए दर्द ने ली किसान की जान
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:17 PM IST
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बुंदेलखंड के किसानों की बदहाली और सूदखोरों की दबंगई किसानों के लिए मौत
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का सबब बनने लगी है। ऐसा ही एक मामला कदौरा थाना क्षेत्र में सामने आया।
यहां पर सूदखोरों के चंगुल में फंसे एक किसान की गुरुवार की देर रात
हार्टअटैक से मौत हो गई। इस किसान की पीड़ा को दो दिन पहले ही अमर उजाला ने
प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
बुंदेलखंड का किसान इन दिनों दैवी आपदाओं से जूझ रहा है। किसानों के सामने परिवार का पेट भरने तक का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में किसान पहले तो बैंकों से कर्ज ले रहे हैं और जब बैंक कर्ज देना बंद कर देते हैं तो मजबूरी में वह सूदखोरों के चंगुल में फंस जाते हैं। सूदखोरों के फैले इस जाल को लेकर बीती 16 फरवरी को अमर उजाला ने प्रमुखता से
खबर प्रकाशित की थी। इसमें कदौरा थाना क्षेत्र के इस्लामाबाद निवासी किसान दयाशंकर पुत्र रामनारायण की भी पीड़ा प्रकाशित की थी। दयाशंकर के पास तीन एकड़ भूमि थी। उसने सबसे पहले 30 हजार रुपये का कर्ज बैंक से लिया था। इसके बाद उसने दस हजार रुपये किसान क्रेडिट कार्ड और सहकारी समितियों से कर्ज लिया था। जब इस पर भी बात नहीं
बनी तो मजबूरी में उसने सूदखोरों से भी 40 हजार रुपये का कर्ज ले लिया। सूदखोरों का ब्याज इतनी तेजी से बढ़ा कि थोड़ी ही समय में यह रकम लाखों रुपये तक पहुंच गई। जिसे अदा कर पाना इस किसान की हैसियत से बाहर हो गया।
उधर, फसल खराब होने से चिंता में डूबे इस किसान को गुरुवार की देर शाम हार्टअटैक पड़ा और उसकी मौत हो गई। किसान की मौत से पूरा परिवार सदमें में पहुंच गया है। अब घर कैसे चलेगा इसे लेकर परिवार को चिंता सता रही है। मृतक के पीछे उसका विकलांग पुत्र शिवम् गुप्ता रह गया जो अभी 18 वर्ष का है।
बुंदेलखंड का किसान इन दिनों दैवी आपदाओं से जूझ रहा है। किसानों के सामने परिवार का पेट भरने तक का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में किसान पहले तो बैंकों से कर्ज ले रहे हैं और जब बैंक कर्ज देना बंद कर देते हैं तो मजबूरी में वह सूदखोरों के चंगुल में फंस जाते हैं। सूदखोरों के फैले इस जाल को लेकर बीती 16 फरवरी को अमर उजाला ने प्रमुखता से
खबर प्रकाशित की थी। इसमें कदौरा थाना क्षेत्र के इस्लामाबाद निवासी किसान दयाशंकर पुत्र रामनारायण की भी पीड़ा प्रकाशित की थी। दयाशंकर के पास तीन एकड़ भूमि थी। उसने सबसे पहले 30 हजार रुपये का कर्ज बैंक से लिया था। इसके बाद उसने दस हजार रुपये किसान क्रेडिट कार्ड और सहकारी समितियों से कर्ज लिया था। जब इस पर भी बात नहीं
बनी तो मजबूरी में उसने सूदखोरों से भी 40 हजार रुपये का कर्ज ले लिया। सूदखोरों का ब्याज इतनी तेजी से बढ़ा कि थोड़ी ही समय में यह रकम लाखों रुपये तक पहुंच गई। जिसे अदा कर पाना इस किसान की हैसियत से बाहर हो गया।
उधर, फसल खराब होने से चिंता में डूबे इस किसान को गुरुवार की देर शाम हार्टअटैक पड़ा और उसकी मौत हो गई। किसान की मौत से पूरा परिवार सदमें में पहुंच गया है। अब घर कैसे चलेगा इसे लेकर परिवार को चिंता सता रही है। मृतक के पीछे उसका विकलांग पुत्र शिवम् गुप्ता रह गया जो अभी 18 वर्ष का है।