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न्यूनतम पारा चढ़ने से झुलसा बदन
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sun, 17 Apr 2016 11:25 PM IST
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छाता लगाकर धूप से बचाव
- फोटो : अमर उजाला
मौसम की बेरुखी बढ़ती ही जा रही है। अप्रैल में गर्मी ने प्रचंडता के सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। रविवार को अधिकतम तापमान में तो चार डिग्री की गिरावट दर्ज की गई जबकि न्यूनतम तापमान इतना ही बढ़कर 30 डिग्री सेल्सियस हो गया। इससे गर्मी ने लोगों के लिए जीना दुश्वार कर दिया। इस सप्ताह सोमवार से शनिवार तक तो दोपहर के समय तेज धूप व
गर्म हवाओं के चलते सड़कों पर सन्नाटा रहा। मौसम के इस मिजाज से शाक भाजी किसान परेशान हैं। गर्मी बढ़ने से हरी सब्जियां समय से पहले ही सूख रही हैं। रविवार को सुबह 11 बजे तक सूरज आग ही उगलता रहा। इसके बाद बादल छा जाने से धूप का असर कुछ कम रहा लेकिन न्यूनतम तापमान बढ़ने से गर्मी ने बेहाल किया। शनिवार को अधिकतम तापमान 42
डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री रहा। रविवार को अधिकतम तापमान तो 42 से घटकर 38 पर आ गया वहीं न्यूनतम तापमान 26 से बढ़कर 30 डिग्री पर पहुंच गया। मौसम में
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गर्मी अपने चरम पर है। इस गर्मी से जहां आम जनमानस बेहाल है वहीं किसानों की भी मुसीबत बढ़ गई है। क्यारियों में सब्जी सूख रही है। इस समय लौकी, तरोई, भिंडी की फसल करने वाले किसान मौसम को लेकर चिंतित हैं। किसान राममहेश का कहना है कि मौसम का लगातार बदलना फसल के लिए घातक है।
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गर्म हवाओं के चलते सड़कों पर सन्नाटा रहा। मौसम के इस मिजाज से शाक भाजी किसान परेशान हैं। गर्मी बढ़ने से हरी सब्जियां समय से पहले ही सूख रही हैं। रविवार को सुबह 11 बजे तक सूरज आग ही उगलता रहा। इसके बाद बादल छा जाने से धूप का असर कुछ कम रहा लेकिन न्यूनतम तापमान बढ़ने से गर्मी ने बेहाल किया। शनिवार को अधिकतम तापमान 42
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डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री रहा। रविवार को अधिकतम तापमान तो 42 से घटकर 38 पर आ गया वहीं न्यूनतम तापमान 26 से बढ़कर 30 डिग्री पर पहुंच गया। मौसम में
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गर्मी अपने चरम पर है। इस गर्मी से जहां आम जनमानस बेहाल है वहीं किसानों की भी मुसीबत बढ़ गई है। क्यारियों में सब्जी सूख रही है। इस समय लौकी, तरोई, भिंडी की फसल करने वाले किसान मौसम को लेकर चिंतित हैं। किसान राममहेश का कहना है कि मौसम का लगातार बदलना फसल के लिए घातक है।