{"_id":"574c7da04f1c1bd24c109526","slug":"journalism-is-not-negative-dm","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकारात्मक न हो पत्रकारिता-डीएम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकारात्मक न हो पत्रकारिता-डीएम
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Mon, 30 May 2016 11:21 PM IST
विज्ञापन
विकास भवन में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर संगोष्ठी को संबोधित करते एसपी बबलू कुमार, साथ में डीएम संदीप कौर व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पत्रकारिता में नकरात्मक रिपोर्टिंग नहीं की जानी चाहिए। प्रशासन और मीडिया को मिलकर विकासात्मक योजनाओं के प्रसार और उनके प्रभावों की सही तस्वीर सामने लानी चाहिए। ताकि विकास की गति को बढ़ाया जा सके। जिलाधिकारी संदीप कौर ने यह बात हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विकास भवन में आयोजित एक विचार गोष्ठी में कही। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट
एसोसिएशन की ओर से सोमवार को हुए कार्यक्रम में डीएम ने कहा कि पत्रकारिता विकासात्मक होनी चाहिए। उसका उद्देश्य समाज का हर क्षेत्र में विकास होना चाहिए। इस दौरान एसपी बबलू कुमार ने भी पत्रकारिता में पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात कही। उन्होंने रिपोर्टिंग में विश्लेषण पर भी जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार अयोध्याप्रसाद कुमुद ने हिंदी पत्रकारिता
दिवस मनाए जाने के कारणों का भी उल्लेख किया। कहा कि 1826 में आज ही के दिन पंडित युगल किशोर शुक्ल ने प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंड मार्तंड का प्रकाशन प्रारंभ किया था। इसी दिन की याद में हर वर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस का आयोजन किया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि पत्रकारों को पेंशन योजना से आच्छादित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। वरिष्ठ स्तंभकार केपी सिंह ने कहा कि पहले की पत्रकारिता विश्लेषणात्मक होती थी। क्राइम की खबरें भले ही उस दिन न छपें पर दो दिन बाद पूरे विश्लेषण के साथ छापी जाती थीं। इसकी विश्वसनीयता इतनी होती थी कि पुलिस भी मीडिया के रिपोर्ट को आधार मानकर अपनी जांच को आगे बढ़ती थी। पत्रकारों के स्किल
डेवलपमेंट पर भी चर्चा की गई। इस दौरान एएसपी शकील अहमद, एडीएम आनंद कुमार, एसडीएम संजय सिंह समेत उपजा के जिला अध्यक्ष अरविंद दुबे ने भी पत्रकारिता में मानकों, विश्वसनीयता समेत हिंदी भाषा के विकास पर जोर दिया। इस दौरान महेंद्र प्रताप सिंह, स्वतंत्र छायाकार एवं श्रमजीवी संगठन के पूर्व जिलाध्यक्ष, सुधीर त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष उपजा,
मनोज राजा, जिला महामंत्री, जिला उपाध्यक्ष संजय गुप्ता, कांग्रेस के चौधरी श्याम सुंदर, अजय इटौरिया, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, भारत विकास परिषद के युद्ध वीर कंथरिया आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
एसोसिएशन की ओर से सोमवार को हुए कार्यक्रम में डीएम ने कहा कि पत्रकारिता विकासात्मक होनी चाहिए। उसका उद्देश्य समाज का हर क्षेत्र में विकास होना चाहिए। इस दौरान एसपी बबलू कुमार ने भी पत्रकारिता में पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात कही। उन्होंने रिपोर्टिंग में विश्लेषण पर भी जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार अयोध्याप्रसाद कुमुद ने हिंदी पत्रकारिता
विज्ञापन
दिवस मनाए जाने के कारणों का भी उल्लेख किया। कहा कि 1826 में आज ही के दिन पंडित युगल किशोर शुक्ल ने प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंड मार्तंड का प्रकाशन प्रारंभ किया था। इसी दिन की याद में हर वर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस का आयोजन किया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि पत्रकारों को पेंशन योजना से आच्छादित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। वरिष्ठ स्तंभकार केपी सिंह ने कहा कि पहले की पत्रकारिता विश्लेषणात्मक होती थी। क्राइम की खबरें भले ही उस दिन न छपें पर दो दिन बाद पूरे विश्लेषण के साथ छापी जाती थीं। इसकी विश्वसनीयता इतनी होती थी कि पुलिस भी मीडिया के रिपोर्ट को आधार मानकर अपनी जांच को आगे बढ़ती थी। पत्रकारों के स्किल
डेवलपमेंट पर भी चर्चा की गई। इस दौरान एएसपी शकील अहमद, एडीएम आनंद कुमार, एसडीएम संजय सिंह समेत उपजा के जिला अध्यक्ष अरविंद दुबे ने भी पत्रकारिता में मानकों, विश्वसनीयता समेत हिंदी भाषा के विकास पर जोर दिया। इस दौरान महेंद्र प्रताप सिंह, स्वतंत्र छायाकार एवं श्रमजीवी संगठन के पूर्व जिलाध्यक्ष, सुधीर त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष उपजा,
मनोज राजा, जिला महामंत्री, जिला उपाध्यक्ष संजय गुप्ता, कांग्रेस के चौधरी श्याम सुंदर, अजय इटौरिया, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, भारत विकास परिषद के युद्ध वीर कंथरिया आदि मौजूद थे।