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मिलती नहीं सुविधाए, घर से ही लेकर आनी होती है कुर्सी और पानी
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मालगोदाम की गड्ढायुक्त जर्जर सड़क।
- फोटो : ORAI
उरई। भले ही रेलवे प्रशासन व्यापारियों के लिए बड़े बड़े दावे करे कि व्यापारी रेलवे से माल भेजें और मंगवाएं, उन्हें पूरी सहूलियत दी जाएगी पर जमीनी हकीकत इससे उलट है। हालत यह है कि जिन व्यापारियों का माल आता है, वे व्यापारी अपने घर से कुर्सी और पानी के कंटेनर तक लेकर लाते है। उनके बैठने के लिए टिन शेड तक का इंतजाम नहीं है। मजदूर भी बैठने के लिए पेड़ की छांव तलाशते रहते हैं। बारिश के समय समस्या और बढ़ जाती है।
उरई रेलवे स्टेशन के माल गोदाम की हालत बदहाल है। वैसे तो यहां सरकारी राशन चावल, गेहूं, खाद के अलावा हर महीने दस रैक व्यापारियों का भी माल आता है पर यहां सुविधाओं का अभाव है। कई बार सरकारी राशन भी भीग जाता है, जिसकी वजह से गुणवत्तायुक्त राशन गरीबों तक नहीं पहुंच पाता है। रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण भी रात में काम नहीं हो पाता है। कई बार जहरीले कीड़े भी निकल आते है। व्यापारी इस बात को लेकर भी नाराज है कि इस समस्या को लेकर कई मर्तबा अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं पर समस्या के निदान के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिले है। सालों से यह समस्या चली आ रही है।
मालगोदाम जर्जर, रोड भी खराब
मालगोदाम की हालत जर्जर है। पूरे मालगोदाम में कहीं शेड नहीं है। जो पूरा शेड है, वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। उसके चलते वह अनुपयोगी हो गया है। मालगोदाम के अंदर बिजली, पानी और हवा की कोई व्यवस्था नहीं है। मालगोदाम जाने वाले रास्ते की हालत भी खराब है। बारिश के दिनों में माल लेकर आने व जाने वाले ट्रक फंसकर खराब हो जाते है।
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इस तरह रेलवे लगाती है पेनाल्टी
मालगाड़ी के 42 कोच नौ घंटे में खाली करने होते है। ऐसा न होने पर डेढ़ सौ रुपये प्रति घंटे प्रति कोच के खिलाफ से पेनाल्टी लगाई जाती है। जगह खाली करने के लिए व्यापारियों को 15 घंटे की मोहलत दी जाती है कि वे माल उठाकर ले जाएं। 15 घंटे बाद प्रति घंटा 130 रुपये प्रति वैगन की दर से पेनाल्टी वसूली जाती है। यदि मालगाड़ी माल उतारने के बाद चली जाती है और व्यापारी अपना माल निर्धारित समय से नहीं ले जा पाता है तो संबंधित व्यापारी से दोनों पेनाल्टी की वसूली प्रति घंटे के हिसाब से एक साथ की जाती है।
लाखों का भुगतान, सुविधाएं न के बराबर
सीमेंट व्यापारी अखिलेश गुप्ता का कहना है कि उनके सीमेंट के हर महीने आठ से दस रैक आते है, जिसका भुगतान वह रेलवे को लाखों रुपये का करते है। कभी कभी डैमरेज का भी लाखों रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। हालत यह है कि घर से बैठने को कुर्सी लानी पड़ती है। यही नहीं मजदूर और स्टाफ के लिए करीब पांच हजार रुपये का पानी लग जाता है।
बारिश के समय बढ़ जाती है समस्या
ठेकेदार अभय सिंह का कहना है कि मालगोदाम के आसपास सुविधाओं का अभाव है। पल्लेदार न होने के कारण बारिश के दौरान न सिर्फ माल भीग जाता है, बल्कि मजदूरों को भी परेशानी होती है। शेड और फर्श न होने के कारण माल बर्बाद हो जाता है। अन्ना मवेशी और अराजकतत्व भी मालगोदाम में आ जाते है। सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की है लेकिन कोई सुविधा नहीं दी जाती है। जर्जर सड़क होने के कारण वाहन आने और जाने में दिक्कत होती है।
देशभर में भेजा जाता है गेहूं
उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम के मैनेजर रविंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब, हरियाणा व इलाहाबाद से चावल की रैक आती है। जबकि जिले से बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों को गेहूं भेजा जाता है। इसके अलावा मैहर (सतना) से सीमेंट और गुजरात से खाद के रैक आती है।
इतने रैक आते हैं मालगोदाम पर
सीमेंट के रैक-55, खाद के रैक-25 व गेहूं व चावल के 40 से 45 रैक
व्यापारियों की समस्याएं दूर होंगी
मालगोदाम को दोहरीकरण के काम के दौरान नए सिरे से बनाया जाएगा। हालांकि इसमें अभी समय लगेगा, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था में जो भी समस्याएं हैं, उन्हें दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है।-संदीप माथुर, डीआरएम, झांसी मंडल
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उरई रेलवे स्टेशन के माल गोदाम की हालत बदहाल है। वैसे तो यहां सरकारी राशन चावल, गेहूं, खाद के अलावा हर महीने दस रैक व्यापारियों का भी माल आता है पर यहां सुविधाओं का अभाव है। कई बार सरकारी राशन भी भीग जाता है, जिसकी वजह से गुणवत्तायुक्त राशन गरीबों तक नहीं पहुंच पाता है। रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण भी रात में काम नहीं हो पाता है। कई बार जहरीले कीड़े भी निकल आते है। व्यापारी इस बात को लेकर भी नाराज है कि इस समस्या को लेकर कई मर्तबा अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं पर समस्या के निदान के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिले है। सालों से यह समस्या चली आ रही है।
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मालगोदाम जर्जर, रोड भी खराब
मालगोदाम की हालत जर्जर है। पूरे मालगोदाम में कहीं शेड नहीं है। जो पूरा शेड है, वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। उसके चलते वह अनुपयोगी हो गया है। मालगोदाम के अंदर बिजली, पानी और हवा की कोई व्यवस्था नहीं है। मालगोदाम जाने वाले रास्ते की हालत भी खराब है। बारिश के दिनों में माल लेकर आने व जाने वाले ट्रक फंसकर खराब हो जाते है।
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इस तरह रेलवे लगाती है पेनाल्टी
मालगाड़ी के 42 कोच नौ घंटे में खाली करने होते है। ऐसा न होने पर डेढ़ सौ रुपये प्रति घंटे प्रति कोच के खिलाफ से पेनाल्टी लगाई जाती है। जगह खाली करने के लिए व्यापारियों को 15 घंटे की मोहलत दी जाती है कि वे माल उठाकर ले जाएं। 15 घंटे बाद प्रति घंटा 130 रुपये प्रति वैगन की दर से पेनाल्टी वसूली जाती है। यदि मालगाड़ी माल उतारने के बाद चली जाती है और व्यापारी अपना माल निर्धारित समय से नहीं ले जा पाता है तो संबंधित व्यापारी से दोनों पेनाल्टी की वसूली प्रति घंटे के हिसाब से एक साथ की जाती है।
लाखों का भुगतान, सुविधाएं न के बराबर
सीमेंट व्यापारी अखिलेश गुप्ता का कहना है कि उनके सीमेंट के हर महीने आठ से दस रैक आते है, जिसका भुगतान वह रेलवे को लाखों रुपये का करते है। कभी कभी डैमरेज का भी लाखों रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। हालत यह है कि घर से बैठने को कुर्सी लानी पड़ती है। यही नहीं मजदूर और स्टाफ के लिए करीब पांच हजार रुपये का पानी लग जाता है।
बारिश के समय बढ़ जाती है समस्या
ठेकेदार अभय सिंह का कहना है कि मालगोदाम के आसपास सुविधाओं का अभाव है। पल्लेदार न होने के कारण बारिश के दौरान न सिर्फ माल भीग जाता है, बल्कि मजदूरों को भी परेशानी होती है। शेड और फर्श न होने के कारण माल बर्बाद हो जाता है। अन्ना मवेशी और अराजकतत्व भी मालगोदाम में आ जाते है। सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की है लेकिन कोई सुविधा नहीं दी जाती है। जर्जर सड़क होने के कारण वाहन आने और जाने में दिक्कत होती है।
देशभर में भेजा जाता है गेहूं
उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम के मैनेजर रविंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब, हरियाणा व इलाहाबाद से चावल की रैक आती है। जबकि जिले से बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों को गेहूं भेजा जाता है। इसके अलावा मैहर (सतना) से सीमेंट और गुजरात से खाद के रैक आती है।
इतने रैक आते हैं मालगोदाम पर
सीमेंट के रैक-55, खाद के रैक-25 व गेहूं व चावल के 40 से 45 रैक
व्यापारियों की समस्याएं दूर होंगी
मालगोदाम को दोहरीकरण के काम के दौरान नए सिरे से बनाया जाएगा। हालांकि इसमें अभी समय लगेगा, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था में जो भी समस्याएं हैं, उन्हें दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है।-संदीप माथुर, डीआरएम, झांसी मंडल

व्यापारी अखिलेश गुप्ता।- फोटो : ORAI

मालगोदाम पर ट्रेन से सामग्री उतारते मजदूर।- फोटो : ORAI

रेलवे स्टेशन पर पानी पीते मजदूर।- फोटो : ORAI

ठेकेदार अभय सिंह।- फोटो : ORAI

उरई मालगोदाम के बाहर बैठे व्यापारी।- फोटो : ORAI