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Jalaun News: विधवा भाभी की गैर इरादतन हत्या में देवर को दस साल की सजा
Wed, 07 Aug 2024 02:52 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Wed, 07 Aug 2024 02:52 AM IST
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उरई। भाभी की गैर इरादतन हत्या में देवर को अपर सत्र न्यायाधीश ने दस साल की सजा सुनाकर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। जुर्माने की राशि मृतका की बेटी को दी जाएगी।
जिला कानपुर देहात के देवराहट थाना क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर निवासी रामशंकर ने 27 फरवरी 2018 को कदौरा थाना पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि उसने पुत्री गुड्डो देवी की शादी घटना से छह वर्ष पहले कदौरा थाना क्षेत्र मदरालालपुर निवासी इंद्रपाल से की थी। शादी के लगभग दो साल बाद दामाद की मौत हो गई थी। दामाद की मृत्यु से पहले एक बच्ची पैदा हुई थी। जिसका नाम गायत्री है।
दामाद की मृत्यु के बाद से उसकी पुत्री ससुराल में रहकर मजदूरी कर भरण पोषण करती थीं। दस बीघा जमीन होने के बावजूद सास ससुर खर्चा भी नहीं देते थे। उसकी पुत्री ससुर से अपने हिस्से को जमीन मांग रही थी। बेटी के फोन करने पर वह 27 फरवरी 2018 को उसकी ससुराल गए थे। खाना खाने के बाद वह आराम कर रहे थे तभी देवर शिशुपाल ने कमरे में जाकर सिलबट्टे से बेटी का सिर कुचल दिया।
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शोर शराबा सुनकर जब वह कमरे में पहुंचा तो बेटी गुड्डो देवी की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने चार अप्रैल 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया था। कोर्ट में छह साल चले ट्रायल के बाद मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम शिवकुमार ने शिशुपाल को गैर इरादतन हत्या में दोषी पाते हुए दस साल की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। जुर्माने की राशि मृतका के बच्ची को दी जाएगी।
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जिला कानपुर देहात के देवराहट थाना क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर निवासी रामशंकर ने 27 फरवरी 2018 को कदौरा थाना पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि उसने पुत्री गुड्डो देवी की शादी घटना से छह वर्ष पहले कदौरा थाना क्षेत्र मदरालालपुर निवासी इंद्रपाल से की थी। शादी के लगभग दो साल बाद दामाद की मौत हो गई थी। दामाद की मृत्यु से पहले एक बच्ची पैदा हुई थी। जिसका नाम गायत्री है।
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दामाद की मृत्यु के बाद से उसकी पुत्री ससुराल में रहकर मजदूरी कर भरण पोषण करती थीं। दस बीघा जमीन होने के बावजूद सास ससुर खर्चा भी नहीं देते थे। उसकी पुत्री ससुर से अपने हिस्से को जमीन मांग रही थी। बेटी के फोन करने पर वह 27 फरवरी 2018 को उसकी ससुराल गए थे। खाना खाने के बाद वह आराम कर रहे थे तभी देवर शिशुपाल ने कमरे में जाकर सिलबट्टे से बेटी का सिर कुचल दिया।
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शोर शराबा सुनकर जब वह कमरे में पहुंचा तो बेटी गुड्डो देवी की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने चार अप्रैल 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया था। कोर्ट में छह साल चले ट्रायल के बाद मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम शिवकुमार ने शिशुपाल को गैर इरादतन हत्या में दोषी पाते हुए दस साल की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। जुर्माने की राशि मृतका के बच्ची को दी जाएगी।