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हुसैन के बताए रास्ते पर चलने से सबका भला
Jalaun
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। मोहर्रम की नौ तारीख को गंजमुरादाबाद से आए सज्जादा नशीन मौलाना वलीउर्रहमान उर्फ फजलू मियां ने कहा कि मोहर्रम की पहली तारीख से इमाम हुसैन का जिक्रे शुरू हो जाता है।
उन्होंने बताया कि कर्बला की जंग में इमाम हुसैन के साथ केवल 72 जांनिसार साथी थे। जो इमाम हुसैन की हर बात पर मर मिटने को तैयार थे। बादशाह यजीद ने हजरत हुसैन को चारों तरफ से घिरवा लिया था। उसने अपने सैनिकों द्वारा नहरों का पानी हुसैन के लिए बंद करवा दिया। कड़ी निगरानी करा दी कि एक बूंद भी पानी हुसैन के काफिले तक न पहुंचे। हुसैन के भाई हजरत अब्बास को मासूम असगर की प्यास न देखी गई। उन्होंने हुसैन से पानी के लिए इजाजत मांगी तो हुसैन ने इस शर्त पर इजाजत दी कि तुम जंग नहीं करोगे। हुसैन से किया वादा हजरत अब्बास ने खुद की जान देकर पूरा किया। उन्होंने कहा कि जिसने हक कर्बला अदा कर दिया, उसने अपने नाना का वादा वफा कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने बताया कि अगर हुसैन चाहते तो दो बूंद पानी क्या समंदर भी उनके पास आ जाता। इस मौके पर यासिर मियां, हाफिज इकरार खां, उम्मेद अली, इशहाक, अल्ताफ, जैनुल आब्दीन, साबिर खां, हाजी माजिद हुसैन, इरफान खां, शमशाद हुसैन आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि कर्बला की जंग में इमाम हुसैन के साथ केवल 72 जांनिसार साथी थे। जो इमाम हुसैन की हर बात पर मर मिटने को तैयार थे। बादशाह यजीद ने हजरत हुसैन को चारों तरफ से घिरवा लिया था। उसने अपने सैनिकों द्वारा नहरों का पानी हुसैन के लिए बंद करवा दिया। कड़ी निगरानी करा दी कि एक बूंद भी पानी हुसैन के काफिले तक न पहुंचे। हुसैन के भाई हजरत अब्बास को मासूम असगर की प्यास न देखी गई। उन्होंने हुसैन से पानी के लिए इजाजत मांगी तो हुसैन ने इस शर्त पर इजाजत दी कि तुम जंग नहीं करोगे। हुसैन से किया वादा हजरत अब्बास ने खुद की जान देकर पूरा किया। उन्होंने कहा कि जिसने हक कर्बला अदा कर दिया, उसने अपने नाना का वादा वफा कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने बताया कि अगर हुसैन चाहते तो दो बूंद पानी क्या समंदर भी उनके पास आ जाता। इस मौके पर यासिर मियां, हाफिज इकरार खां, उम्मेद अली, इशहाक, अल्ताफ, जैनुल आब्दीन, साबिर खां, हाजी माजिद हुसैन, इरफान खां, शमशाद हुसैन आदि मौजूद रहे।
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